आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज जीवन परिचय

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• पूर्व नाम : श्री प्रदीप कुमार जैन

• पिता : श्रीमान राधेश्याम अग्रवाल

• माता : श्रीमती सावित्री देवी अग्रवाल

• विशेषता : वैष्णव धर्म से जैन धर्म परिवर्तन

• जन्मस्थान : पहाड़ी धीरज, सदर बाजार, दिल्ली।

• जन्म तिथि : 9 नवम्बर 1976

• शिक्षा : बी.कॉम, कम्प्यूटर

• भ्राता : अग्रज श्री प्रवीण कुमार, अनुज श्री नितिन कुमार

• विवाह : बाल ब्रह्मचारी

• खेल : क्रिकेट, फुटबॉल

• रुचि : गुरुभक्ति, स्वाध्याय, लेखन, चिंतन

• सांस्कृतिक रुझान : धार्मिक, सामाजिक नाट्य मंचन

• वैराग्य का कारण : मृत्यु बोध

• संस्कारों के स्रोत : साधु संगति, संस्कार जैन विद्यालय

 

वैराग्य पथ

• गांधीनगर दिल्ली में आचार्य सन्मति सागर के प्रथम दर्शन।

• आचार्य सन्मति सागर महाराज की दिल्ली में वैय्यावृति करते हुए आलू, प्याज, चमड़ा एवं रात्रिभोजन का त्याग किया ।

• आचार्य श्री महावीरकीर्ति महाराज की 24 वें समाधि दिवस पर आचार्य सन्मति सागर महाराज से 18 वर्ष की आयु में दिल्ली में आजीवन ब्रह्मचर्य का नियम लिया।

• आचार्य सन्मति सागर महाराज के हस्तकमलो से 16 जुलाई 1996 आषाढ़ सुदी एकम, वीर निर्वाण संवत् 2522 को शिकोहाबाद, उत्तर प्रदेश में मुनि दीक्षा सम्पन्न हुई।

• आचार्य श्री सन्मति सागर महाराज के अपने हस्तकमलो से 25 जनवरी 2007 को औरंगाबाद में आचार्य पद के संस्कार किए।

 

अब तक चातुर्मास

• 1996 से 2021 तक 26 चातुर्मास सम्पन्न किए जो निम्न स्थानों पर हुए

• फिरोजाबाद (उ.प्र. ),टीकमगढ़ (म.प्र.), चम्पापुर (बिहार), बनारस भेलूपुर (उ.प्र.), छतरपुर (म.प्र.), उज्जैन (म.प्र.), नरवाली (राज.), उदयपुर (राज.), खमेरा (राज.), बोरीवली मुम्बई (महा.), लासूरणे (महा.), लासूर (महा.), बोलठाण (महा.), फलटण (महा.), नातेपुते (महा.), रतलाम (म.प्र.), सम्मेदशिखर, सम्मेदशिखर, एटा (उ.प्र.), इटावा (उ.प्र.), बाराबंकी (उ.प्र.), बड़ौत (उ.प्र.), लोहारिया (राज.), सेक्टर 11 उदयपुर (राज.), हुमड़ भवन उदयपुर (राज.), मोहन कॉलोनी बांसवाड़ा (राज.)

अब तक प्रदान की गईं दीक्षा : आचार्य श्री की प्रेरणा से अब तक 42 श्रावक संयम पंथ पर चलने का संकल्प ले चुके हैं।

 

पंचकल्याणक प्रतिष्ठाएं :

• आचार्य श्री के सान्निध्य में देश भर में विभिन्न स्थानों पर 11 पंचकल्याण प्रतिष्ठाएं हो चुकी हैं और इनके जरिए पूरे देश में धर्म प्रभावना हुई है:

• लासूर स्टेशन (महा.)2007, अतिशय क्षेत्र कोकमठाण 2008, साकोरा नांदगांव 2008, बोलठाण (महा.) 2009, लासूरणे (महा.) 2011, एटा (उ.प्र.) 2014, भिण्ड (म.प्र.) 2015, जसवंतनगर (उ.प्र.) 2015, एटा (उ.प्र.) 2016, शास्त्री नगर मेरठ (उ.प्र.) 2017, रतलाम (म.प्र.) 2018

 

साहित्य सृजन

आचार्य श्री ने कई पुस्तकें लिखी हैं जो समाज का मार्गदर्शन कर रही हैं जैसे :

• गुणस्थान स्वरूप एवं विश्लेषण

• बहता पानी निर्मल

• द्रव्य संग्रह की टीका

• श्रमणाचार्य आदिसागर अंकलीकर परम्परा

• इंद्रप्रस्थ से मुक्तिधाम

• गुरु गरिमा

• मन की गुप्ति

• चौबीस ठाणा व्याख्यायिका

• सुन्दर गगरिया

• उदगांव का उदयाचल

• सन्मति संदेश

• भाव त्रिभंगी टीका

 

प्राप्त उपाधियां

आचार्य श्री को समाज व संतों द्वारा कई उपाधियां प्रदान की गई हैं जैसे : बालयोगी, अध्यात्मयोगी, युवाचार्य, वैय्यावृत्याचार्य, सरस्वती शिरोमणि, वात्सल्यपुंज, प्रशांत योगी, दिव्य तपस्वी, तपोमार्तण्ड, भक्तवत्सल, चेतना नायक, जीवन शिल्पी, श्रुत वारिधी, वात्सलय मूर्ति, श्रमण सूर्य, वात्सलय सिंधु, धर्म मित्र, वात्सलय सम्राट, धर्माचार्य।

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