आनलाइन वेबीनार के माध्यम से आचार्य विद्यानंद जी के अवदान को याद किया

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जयपुर –  इस सदी के महान संत आचार्य श्री विद्यानंद जी के 97 वें जन्म दिवस के उपलक्ष्य में आनलाइन राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन राष्ट्रीय दिगंबर जैन प्रतिनिधि महासंघ एवं अखिल भारतीय जैन पत्र संपादक संघ के संयुक्त तत्वाधान में किया गया। वेबीनार में देश -विदेश के मूर्धन्य विद्वानों ने अपने विचार रखे और राष्ट्रसंत आचार्य विद्यानंद जी को याद करते हुए अपनी यादों को ताजा किया। संगोष्ठी का विषय था राष्ट्रसंत आचार्य श्री विद्यानंद जी का सामाजिक अवदान !

वेबीनार का शुभारंभ आचार्य कनक नंदी जी के आशीर्वचनों से प्रारंभ किया गया आपने कहा कि आचार्य विद्यानंद जी हम सभी के गुरु हैं और उन्हीं से प्रेरणा लेते हुए हम आज साधनारत हैं! देश के मूर्धन्य विद्वानों की श्रृंखला में प्रथम वक्ता के तौर पर झीलों की नगरी उदयपुर से प्रो. प्रेम सुमन ने अपनी बात को रखते हुए कहा कि आचार्य श्री हमेशा प्राकृत भाषा पर विशेष बल दिया करते थे उन्होंने श्रुत पंचमी को प्राकृत दिवस के रूप में बनाने के लिए हम सभी को प्रेरणा दी। उन्होंने कहा अक्षर हमेशा बिंदु से ही सुशोभित होता है ! हम सभी को अपने जीवन में भारतीय संस्कृति के तौर पर प्राकृत भाषा को समझने का प्रयास करते रहना चाहिए । बनारस से डॉ फूलचंद प्रेमी ने अपनी बात को रखते हुए कहा कि आचार्य विद्यानंद जी सरल स्वभावी व्यक्तित्व के धनी थे वे ज्ञान के बरगद के समान थे। पुणे से डॉ नीलम जैन ने कहा आचार्य विद्यानंद जी ने महिलाओं को स्वाध्याय करने की परंपरा से अवगत कराया उन्होंने कहा आचार्य श्री की मूल देन अनुसंधान ही है ,और वे हमारे लिए आराध्य तथा स्मरणीय रहेंगे।

दिल्ली के जाने माने विद्वान डॉ जयकुमार जी उपाध्ये ने आचार्य श्री से जुड़े अनेक संस्मरण से अवगत कराते हुए कहा आचार्य श्री प्राकृत भाषा के संरक्षक थे उन्होंने 4000 पुस्तकों में अपना आशीर्वाद और शुभकामना संदेश लिखा और पौने दो सौ विद्वानों को सम्मानित कराया ,वे हमेशा विद्वानों के प्रति अधिक वात्सल्य भाव रखा करते थे! आचार्य श्री पुरातत्व को अपनी जान से भी ज्यादा स्नेह करते थे।मध्यप्रदेश की नगरी बुरहानपुर के जाने-माने विद्वान पार्श्व ज्योति पत्रिका संपादक डॉ सुरेंद्र भारती ने कहा की गुरुदेव ने हमें झंडा भी दिया और डंडा भी अब हमें यह देखना है इस झंडे को डंडे के साथ रखकर हमेशा हमेशा के लिए कहां पर फहराना है और इसे यादगार बनाना है। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री ने सभी को एक साथ होने का मंत्र दिया था, वह मंत्र आज हम सब भूल गये हैं इस मंत्र को पुनः जागृत करने की आवश्यकता है।

यूएसए से जुड़े राम गोपाल जी ने कहा कि गुरु जी का ही मार्गदर्शन आज सभी के लिए कल्याण भूत है ! जैन संदेश के संपादक फिरोजाबाद के एडवोकेट अनूपचंद जी ने कहा कि आचार्य विद्यानंद जी सामाजिक संस्कृति के पक्षधर थे! भारतीय जैन मिलन की स्थापना आचार्य श्री की प्रेरणा का ही प्रतिफल है ! गुलाबी नगरी जयपुर से डॉ अनिल जैन ने अपनी बात को रखते हुए कहा कि आचार्य श्री सरल सुबोध वाणी के प्रवचनकार थे वे खोज में हमेशा संलग्न रहते थे। आचार्य श्री ने सभी को एक होकर संगठित होने की प्रेरणा दी वे कहते थे इस समाज को तोड़ो नहीं समाज को जोड़ो।

विदुषी डा.मीना जैन उदयपुर ने कहा कि इस सदी के महान संत को पाकर हम सभी गौरवान्वित हैं ! इन्दौर की
डॉ संगीता ने गुरुदेव के विचारों को जीवन में अपनाने का प्रण लिया ! जयपुर की नवोदित रचनाकार शिखा जैन ने आचार्य श्री द्वारा किये गये महत्वपूर्ण कार्यों का उल्लेख किया। राष्ट्रीय ऑनलाइन वेबीनार के मुख्य अतिथि के तौर पर जैन धर्म के मूर्धन्य विद्वान शास्त्री परिषद के अध्यक्ष डॉ श्रेयांस कुमार- बड़ोत ने अपने संबोधन में कहा कि आचार्य श्री अनुपम विलक्षण प्रतिभा के धनी थे, युवाओं के प्रति उनका वात्सल्य अधिक था ,वे सिद्धांत के अधिपति थे और हमेशा सभी के लिए स्वाध्याय की प्रेरणा दिया करते थे। उन्होंने कहा आचार्य श्री वास्तव में ज्ञान रत्नाकर थे । उन्होंने आचार्य श्री के स्मृति ग्रंथ को प्रकाशन करने की आवश्यकता प्रतिपादित की।

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए महा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ मणीन्द्र जैन- दिल्ली ने कहा आचार्य श्री के साथ मुझे अनेक कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ है ! आचार्य श्री हमेशा कहा करते थे स्व के साथ पर के उत्थान पर भी विचार करना चाहिए !संगोष्ठी में अखिल भारतीय जैन संपादक संघ के महामंत्री तथा वेबीनार के संयोजक डॉ अखिल बंसल ने सभी का आभार जताया और आ.श्री विद्यानंद जी द्वारा सामाजिक एकता के लिए उनके दिए मूल मंत्र- मत ठुकराओ,गले लगाओ, धर्म सिखाओ को अपनाने की प्रेरणा दी। संगोष्ठी का कुशल संचालन डॉक्टर ममता जैन पुणे ने किया! इसका सीधा प्रसारण अथाई यूट्यूब चैनल पर किया गया।

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