आज से हुआ है आपका संस्कार जन्म

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आर्यिका    ……आशीर्वाद ।

आज आप का संस्कार जन्म हुआ है। आज से अपकी नई पहचान होगी। आज से आपका का ना कोई स्थाई पता होगा और ना ही आप यह कह पाओगी कि मेरे पिता-माता या परिवार का सदस्य आया है बल्कि अब आप के लिए अब सब श्रावक होंगे। अब आप की क्रियाएं दूसरों के लिए नही स्वयं के लिए हांेगी। आप स्वयं याद करना कि कई बार आचार्य श्री ने आप को कुछ कहा होगा और आप कुछ कारण से नही कर पाईं होंगी या किया भी होगा तो आचार्य श्री के अनुकूल नही हुआ होगा। जब आपके साथ भी कुछ ऐसीे घटना घटे तो पूरे प्रकरण कोयाद कर लेना आपका मन शांत और आनंदित रहेगा।
आज से आप सब का उठना ,बैठना ,बोलना, सोना, खाना-पीना, देखना, सुनना इन सब के साथ विचार, सोच सब कुछ नया होगा।  अब पूरे समाज की नजर आप पर होगी और आप की दिनचर्या पर होगी। आज से आप के जीवन का एक नया अध्याय लिखा जाएगा। आप आज से पुराने परिचित व्यक्तियों से भी अनजान बनकर रहना। उन्हीं से सम्पर्क बढ़ाना जो मोक्ष मार्ग के लिए निकल रहे हों या जिन्होंने अपना जीवन साधु सेवा के लिए समर्पित कर रखा है।

कई श्रावक आप से जुड़ना चाहेंगे। उन सब  के जुड़ने के कारण अलग-अलग होंगे पर आप उन सब को धर्म के मार्ग पर चलने का उपदेश देना। आप उनमें से उन्हीं से संपर्क बनाना जो आपके दर्शन, ज्ञान और आचरण से प्रभावित होकर जुड़ा हो। वह श्रावक कभी ना कभी सयंम मार्ग पर आरूढ़ होगा और नही भी हुआ तो जीवन भर आपके सयंम पालन करने में सहयोग करेगा।
जब आप ब्रह्मचारी अवस्था में थीं तो आप संघ की व्यवस्थाएं संभालते हुए जल्दी जल्दी काम करवा लेती होंगी या स्वयं कर लेती होंगी पर ध्यान रखना अब ऐसा नहीं होगा। अब परिस्थितियां बदल गई है। अब व्यवस्थाएं बनाने में समय लगेगा काम देरी से भी होगा ,पूर्ण रूप से मन पसन्द भी नहीं होगा लेकिन ऐसी स्थिति में धैर्य बनाए रखना। अपने आप को सहज बनाए रखना। समाज और जुड़े लोग अब आपका काम नही आपका आचरण देखेंगे। गुरु के प्रति आप की श्रद्धा अटूट है जिनका शब्दों में वर्णन नही कर सकते पर अब वह श्रद्धा दिखनी भी चाहिए गुरु मुख से निकले प्रत्येक शब्द को आदेश मानकर ग्रहण करना। आप अब अपनी नजर से नहीं  गुरु की नजर से सब को देखना तभी संघ का माहौल स्वस्थ बनेगा और पूरे संघ का विचार एक जैसा होगा। इसी वातावरण से संघ में अन्य त्यागी आप के लिए आदेशपूर्ण है पर वह अब आचरण में दिखना चाहिए क्यों कि अब आप का व्यवहार गुरु के प्रति कैसा होगा वह भी महत्त्व रखेगा आप के इस मोक्षा मार्ग में।
यह सब बातें मैं वही बता रहा हूं जो होती ही है। यह सब मेरे जीवन में भी हुई है।

अंतर्मुखी  पूज्य सागर महाराज

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