अगाध श्रद्धा के साथ ललितपुर में निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के चातुर्मास की हुई स्थापना

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  • धर्म- संस्कृति का बहुत बड़ा सम्मेलन है चातुर्मास : मुनि श्री सुधासागर जी महाराज
  • मुनिश्री बोले ‘जिओ’ धर्म है ‘जीने’ दो संस्कृति है
  • मंगल कलश अनिल अंचल परिवार एवं राजेन्द्र थनवारा परिवार ने प्राप्त किया
  • शिविर पुण्यार्जक बने अजित गदयाना परिवार

 

न्यूज सौजन्य -सुनील जैन संचय 

लितपुर, 16 जुलाई। परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य निर्यापक मुनि, मुनिपुंगव 108 श्री सुधासागर जी महाराज,नगर गौरव मुनि 108 श्री पूज्यसागर जी महाराज, ऐलक श्री धैर्यसागर जी महाराज, छुल्लक श्री गम्भीरसागर जी महाराज की क्षेत्रपाल जैन मंदिर, ललितपुर में शनिवार को भव्य चातुर्मास मंगल कलश की स्थापना श्रद्धा-आस्था के साथ की गई।

धर्म से बड़ी होती है संस्कृति

मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि धर्म से बड़ी होती है संस्कृति। क्या आपने कभी सोचा है कि सारा जगत जीवित कैसे रहे!  संसार में कहीं कोई मौत ना हो! ऐसा विचार किया क्या! यदि ऐसा विचार आया तो तुम्हारा मन पूजनीय है।  भगवान वही हो सकता है जो भक्तों को भगवान बनाने की सोचता है।

चातुर्मास संस्कृति की ध्वजा को फहराता है :
उन्होंने आगे कहा कि  चातुर्मास धर्म और संस्कृति का एक बहुत बड़ा सम्मेलन है। चातुर्मास संस्कृति की ध्वजा को फहराता है। चातुर्मास आत्मकल्याण मात्र के लिए नहीं है। चातुर्मास उनके लिए करो जो तुम्हारे पैर से कुचल सकते हैं। चातुर्मास वह संस्कृति है जिसमें जीने दो की बात है। चातुर्मास में तुम अपने लिए नहीं बैठो, दूसरे के लिए बैठो। चातुर्मास जीने दो के लिए किया जाता है। जैन परंपरा में चातुर्मास अषाढ़ शुक्ल चतुर्दशी से कार्तिक बदी अमावस्या तक होता है।


साधु का चातुर्मास पराधीन नहीं स्वाधीन होता है :
मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने यह भी कहा कि चातुर्मास से संस्कृति का निर्माण होता है। साधु का चातुर्मास पराधीन नहीं, स्वाधीन होता है। वर्तमान परिपेक्ष्य में आज चातुर्मास के दो रूप हैं। श्रावक अपना चातुर्मास मांगलिक बनाएं। यह चातुर्मास घर -घर में खुशहाली देने वाला बने, हर घर में सुख -समृद्धि हो, चेहरों पर रौनक छाई रहे।

चातुर्मास में अपनी दैनंदिनी में परिवर्तन लाएं :
उन्होंने धर्मसभा में आगे कहा कि चातुर्मास में श्रद्धालु भी अपने जीवन में परिवर्तन लाएं। भोजन की थाली में बदलाव लाएं, बुरा देखने -सोचने में परिवर्तन आना चाहिए। घर को 4 महीने पावन बनाने की कोशिश करें। मंगल कलश ललितपुर के तुम्हारे चतुर्मास को सफल बनाने के लिए हैं। यदि ललितपुर के चातुर्मास को  मंगल करना है तो आपको मंगल कलश बैठाना ही पड़ेगा। मंगल कलश धर्म नहीं है,धर्म की संस्कृति है। यह मंगल कलश शगुन बनके तुम्हारे घर पहुंचेगा तो तुम्हारा कल्याण होगा। चातुर्मास साधु ही नहीं करता है, श्रद्धालु भी कर रहे हैं। उन्होंने सलाह दी कि आज से जैन समाज, ललितपुर में किसी के घर में रात्रि भोजन नहीं होना चाहिए, आलू प्याज नहीं बनेगा,अभक्ष्य का सेवन नहीं करें, जो शराब, गुटखा आदि आदि व्यसन करते हैं उनको नहीं करेंगे। यदि चातुर्मास में गुटका खाया तो नियम से कैंसर होगा यह चातुर्मास का चमत्कार होगा। यह चातुर्मास ललितपुर के लोगों को सुख समृद्धि देने वाला है।

चातुर्मास के मंगल कलश सर्वार्थ सिद्धि-अमृतसिद्धि कलशके पुण्यार्जन का सौभाग्य दिगंबर जैन पंचायत समिति ललितपुर के अध्यक्ष,अनिल जैन(अंचल),अंचल जैन परिवार व क्षेत्रपाल मंदिर ललितपुर के प्रबंधक राजेन्द्र जैन (लल्लू),अंकित जैन मोनू, अंकुर जैन थनवारा परिवार को प्राप्त हुआ।पर्युषण पर्व के दौरान होने वाले श्रावक संस्कार शिविर का पुण्यार्जन अजित जैन गदयाना परिवार को प्राप्त हुआ।


अन्य कलश तरुण जी अनुराग जी (काला) मुम्बई, महेंद्र जैन पप्पू,विमलेश जैन (कल्लू) अड़कु लाल श्याम लाल ललितपुर, जयंती परिवार (अलवर राजस्थान), डॉ अक्षय टढैया, मृदुला टढैया महामंत्री दिगंबर जैन पंचायत ललितपुर, वीरेंद्र कुमार, अमित कुमार जैन, सपना स्टोर गंगचारी परिवार ,श्री कुशल चंद जैन एडवोकेट परिवार,सुशील कुमार पारस जैन (सोनीपत), देवेंद्र कुमार, महेंद्र पाली, श्रीश कुमार ,मनीष कुमार सिंघई को प्राप्त हुआ। ध्वजारोहण करने का सौभाग्य श्री सोम चंद, संजीव कुमार, राजीव जैन लकी बुक डिपो परिवार एवं अखंड ज्योति प्रज्वलित करने का सौभाग्य खलेश कुमार रितेश कुमार रजनीश कुमार गदयाना परिवार को प्राप्त हुआ। इसके अलाबा 11 रिद्धि कलश एवं 300 से ज्यादा भक्ति कलश की स्थापना की गई। भक्तियां आदि विधि विधान के साथ चातुर्मास की स्थापना की गई।

संचालन ब्र. प्रदीप भैया सुयस एवं अमित पड़रिया ने किया। उक्त जानकारी ललितपुर से डॉ. सुनील जैन संचय ने प्रदान की। आभार एवं स्वागत जैन पंचायत के अध्यक्ष अनिल अंचल, महामंत्री डॉ अक्षय टढैया, मंदिर प्रबंधक राजेन्द्र जैन एवं पंकज जैन मोदी ने किया।

 

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