अहिंसा की प्रबल समर्थक हैं नई राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू – अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर

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प्रतापगढ़/बांसवाड़ा । प्रख्यात जैन संत अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज ने कहा है कि भारत की अगली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पू्र्ण शाकाहारी रहकर भगवान महावीर के अहिंसा के सिद्दान्त का पालन किया है। वह सच्चे अर्थों में अहिंसा की अनुयायी हैं। उनका अपने खाने में प्याज और लहसुन तक का भी इस्तेमाल नहीं करना यह प्रदर्शित करता है कि उन्होंने राजनीति में रहते हुए भी सात्विक तरीके के जीवन जिया है। उनका यह आचरण बताता है कि वे सच्चे अर्थों में भगवान महावीर के बताए मार्ग का अनुसरण करने वाली हैं।
मुनिश्री ने कहा कि यदि सभी देशों के लोग भगवान महावीर के बताए मार्ग का अनुसरण करते हुए जीवों पर दया की भावना रखें तो कभी युद्ध की नौबत ही नहीं आए।
अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज ने कहा है कि आजादी के 75 साल बाद भारत को पहली आदिवासी राष्ट्रपति मिली हैं। आशा है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू आदिवासियों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में सार्थक कदम उठाएंगी। साथ ही कमजोर और निचले तबको की महिलाओं के सशक्तिकरण की राह भी आसान करेंगी।
मुनिश्री ने मुर्मू के सम्बंध में एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि अक्टूबर 2016 में जब मूर्मू झारखंड की राज्यपाल थीं तब जैन समाज के कुछ लोग उन्हें शाकाहार प्रदर्शनी का उद्घाटन का आमंत्रण देने गए। जब द्रौपदी मुर्मू से उन लोगों ने पूछा कि शाकाहार के संदर्भ में आपके क्या विचार है, तो उन्होंने कहा था कि मैं कट्टर शाकाहारी हूं। मेरे राज्यपाल बनने के बाद यहां के राजभवन में मांसाहार नहीं बनाया गया। राजभवन परिसर में रहने वाले सभी अधिकारियों व कर्मियों के आवासों में भी मांस-मछली का बनना प्रतिबंधित था।
बता दें कि मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है। नए राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण 25 जुलाई को होगा।

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