ऐषणा समिति पर विशद जानकारी दी आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने

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न्यूज सौजन्य- राजेश पंचोलिया

श्रीमहावीरजी। पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी संघ सहित श्रीमहावीरजी अतिशय क्षेत्र में विराजित हैं। मंगलवार को नियम सार स्वाध्याय में समितियों के वर्णन में में ऐषणा समिति की चर्चा हुई। आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने बताया कि जो महाव्रती साधु विधिवत श्रावक के द्वारा नवधा भक्तिपूर्वक शुद्ध आहार ग्रहण करके अपनी आत्मा का ध्यान करता है, वही मोक्ष का अधिकारी है।
विवेचन में आचार्य श्री ने बताया कि नवधा भक्ति अंतर्गत पड़गाहन, उच्च आसान, चरण प्रक्षालन, पूजन, नमस्कार, मन- वचन- काय की शुद्धि और भोजनशुद्धि- इन नाम वाले नव प्रकार के पुण्यों से श्रावक श्राविकाएं नवधा भक्ति करते हैं।
वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री ने आगे बताया कि श्रद्धाशक्ति उपलब्धता, भक्ति, विवेक, दया और क्षमा इन नाम वाले सात गुणों सहित शुद्ध ओर योग्य आचार के पालन करने वाले श्रावक श्राविकाओं द्वारा दिए आहार को ग्रहण करते हुए, जो परम तपोधन रहते हैं, उनके ऐषणा समिति होती है।

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