अपनी जन्मभूमि से जुड़े रहने और आभार मानने के लिए गांववासियों के लिए कर रहे काम

label_importantव्यक्तित्व

गांव के प्रति ऐसा जुड़ाव महामस्तकाभिषेक में अपने गांव छानी के 90 लोगों को उनके कलश के साथ लेकर गए राजेश शाह

प्रिया व्यास की रिपोर्ट 

अहमदाबाद । कहते है पंछी भोजन की तलाश खत्म कर कही से भी अपने घर ही लौटते है, और वह घर उन्हें पूरे मन से स्वीकार कर उनका स्वागत करता है। ऐसे ही राजस्थान के छानी गांव में 31 अगस्त 1957 में जन्मे राजेश शाह है जो अपने देश मुश्किल दौर का सामना करके तो लौटे पर अपनी रूट्स से जुड़े रहे और अपने साथ 150 लोगों को साथ लेकर आए। राजेश शाह बताते है मैं 1982 में  व्यवसाय के लिए कुवैत गया जहां पर मैंने दस साल व्यवसाय किया। 1990-91 में  खाड़ी संकट के दौरान वापस भारत लौट कर आना पड़ा। इस समय मैं अकेला भारत नहीं लौटा अपने साथ 150 अपने लोगों को साथ लेकर लौटा। जिन्हें मदद की ज़रुरत थी उनकी मदद भी की। इस मुश्किल दौर में अपना देश अपना गांव और अपने लोगों का महत्व जाना। तभी से तय कर लिया था कि अपने देश में रह कर ही अपनी जन्मभूमी गांव और समाज के लिए मैं तत्पर रहुंगा और सिर्फ इतना ही नहीं अपने गांववासियों को भी समाज से जोड़े रखने और उन्हें आगे लाने का काम करुंगा जिसकी कोशिश जारी है।

राजेश जी के बारे में – 

राजेश बताते है मेरे इस सेवा कार्य में मेरी पत्नि विमला शाह हर मोड़ पर मेरे साथ खड़ी है वहीं मेरा बड़ा बेटा भद्रेश मुंबई में बिल्डर है। दूसरा बेटा भावेश अमेरिका से लौटकर मुंबई में बड़े भाई के साथ व्यवसाय संभाल रहा है। दामाद राजेश जैन उदयपुर के ख्यात पीडियाट्रिशियन है तो बेटी एमबीए है। व्यवसाय और अपने द्वारा किए गए सेवा कार्यों पर बात करते हुए कहा कि मैंने कुवैत से लौटकर फर्नीचर का व्यवसाय शुरू किया। व्यवसाय को आगे बढ़ाने की कढ़ी में ही मैंने स्टील फर्नीचर का कारखाना शुरू किया। डुंगरपुर में व्यवसाय के साथ ही कई संस्थाओं से जुड़ कर सेवा कार्य में भी संलग्न रहा।  वहीं वुडन और स्टील फर्नीचर का व्यवसाय बैच कर मुंबई और उदयपुर में अपना दूसरा व्यवसाय शुरू किया। इस दौरान उदयपुर में संस्थाओं से जुड़ कर सेवा कार्य किए।

इसके साथ ही समाज में अच्छी पहचान बनाते हुए महासभा राष्ट्रीय संस्था में उपाध्यक्ष के रूप में काम कर रहे है। वहीं बाहुबली भगवान श्रवणबेलगोला मस्तकाभिषेक में राजस्थान से संयोजक के रुप में कार्य किया। साथ ही मस्ताभिषेक के दौरान अपने गांव के और आने परिचित  120  लोगों को उनके कलश के साथ लेकर गए और अभिषेक करवाया। वही हाल ही में मांगीतुंगी में हुए महामस्तकाभिषेक में गांव के 90 लोगों को लेकर गए और महामस्तकाभिषेक करवाया ।

जारी रखेंगे सेवा कार्य –
राजेश जी बताते है बच्चे बिज़नेस संभाल रहे है तो मैंने अपने आपको सेवाकार्य के लिए सेवतंत्र कर लिया है। कई संस्थाओं के साथ जुड़ कर मेरे सेवाकार्य जारी है हालही में रायगढ में पुराने मंदिर को तोड़ कर उसका जीर्णोध्दार में सहयोग कर रहें ।  इस प्रकार जीर्णोध्दार के कार्य जारी रहेंगे ।  वहीं महासभा के लिए अपने अपने दोस्त डॉ. विनीत जैन  से म्यूज़ियम के लिए जमीन उपलब्ध करवाई।


ऐसे ही महावीर में 24 साल बाद 27 नवंबर से 4 दिसंबर तक महामस्ताभिषेक किया जा रहा है। इसके लिए राजस्थान से मुझे संयोजक बनाया गया। सभी ने मिल कर महामस्ताभिषेक के लिए 2000 रुपए जनमंगल कलश रखा गया, जिससे हर व्यक्ति भाग ले सकें।

इस लोटरी सिस्टम के ज़रिए वे लोग जो 2 लाख रुपए खर्च नहीं कर सकते वे 2000 रुपए दे कर महाभिषेक कर सकेंगे।
आने वाले समय में सेवा कार्य की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए साधू आहार विहार के लिए कमिटी बना कर व्यवस्था पर विचार कर रहे है। इसके साथ ही संत भवन, छात्रावास और हॉस्पिटल बनाने जैसी योजना शामिल है जिससे लोगो को सुविधा मिल सकें।

कार्य और अचिवमेंट –

  •   वर्ष 1996-97 में रोटरी क्लब डूंगरपुर के अध्यक्ष रहे एवं ऐतिहासिक सामाजिक कार्यों को अंजाम दिया।
  •  डूंगरपुर में सुप्रकाश ज्योति –      मंच द्वारा इन्हें वागड़ रत्न और नगर परिषद द्वारा डूंगरपुर रत्न से नवाज़ा गया।
  •    1997-2001तक यह डूंगरपुर चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स के भी अध्यक्ष रहे जिसके अंतर्गत रिकॉर्ड नंबर ऑफ़ नए मेंबर्स बनाए एवं आस पास के सभी व्यापारियों को चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स से जोड़ा।
  • वर्ष 2007 में  बिल्डर्स असोसिएशन ऑफ़ उदयपुर के उपाध्यक्ष रहे एवं भारत विकास परिषद के अध्यक्ष के रूप में सराहनीय काम किए।
  • 2018 में बाहुबली मस्तकाभिषेक के दौरान राजस्थान प्रांत के मुख्य संयोजक रहे व कई लोगों की यात्रा एवं अभिषेक का संयोजन किया।

  • उदयपुर में बाहुबली मंच द्वारा इन्हें समाज रत्न से नवाज़ा गया।
  •  दो वर्षों से भारत वर्षीय दिगंबर तीर्थ संरक्षणी महासभा के राजस्थान प्रान्त के अध्यक्ष हैं ।
  •  वर्तमान में ये ध्यानेादय तीर्थ क्षेत्र उदयपुर के ट्रस्टी है एवं चतुर्मास कमेटी के अध्यक्ष रह चुके हैं।
  • हालही मैं मेवाड़ जैन समाज द्वारा इन्हें मेवाड़ जैन समाज गौरव अलंकरण से नवाजा गया है।
  • भारत वर्षीय दिगम्बर जैन महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष है।
  • श्रीफल फाउंडेशन के मुख्य ट्रस्टी के रूप में भी कार्यरत है।
  • साथ ही अपने गांव छानी में समवशरण बना रहे है।

नई पीढ़ी को संस्कृति, संस्कार और महापुरुषों से अवगत कराने के लिए सोशल मीडिया पर कर रहे प्लेटफार्म तैयार…

श्रीफल फाउण्डेशन द्वारा नई पीढ़ी को आचार संस्कार और अपनी संस्कृति से रूबरू करवाने के लिए प्लेटफार्म तैयार किया जा रहा है। जिसे जल्द ही
आचार्य,मुनि,आर्यिका माता से संस्कृति, संस्कार और आशीर्वाद लेकर समाज के कार्य करने वालों से विचार कर शुरू किया जाएगा।

Related Posts

Menu