अतिवीर मुनिराज जी का चातुर्मास कलश स्थापना

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रेवाड़ी। प्रथम बार धर्मनगरी रेवाड़ी में प्रशममूर्ति आचार्य श्री 108 शान्ति सागर जी महाराज ‘छाणी’ परंपरा के प्रमुख संत परम पूज्य आचार्य श्री 108 अतिवीर जी मुनिराज के 17वें मंगल चातुर्मास कलश स्थापना समारोह का ऐतिहासिक आयोजन 24 जुलाई 2022 को व्यापक धर्मप्रभावना के साथ अतिशय क्षेत्र नसिया जी के प्रांगण में सानंद संपन्न हुआ। मूलनायक अतिशयकारी श्री शान्तिनाथ भगवान के श्रीचरणों में श्रीफल अर्पित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारम्भ हुआ। पं. श्री मनीष जैन ‘संजू’ (टीकमगढ़), श्री राजेश जैन शास्त्री, डॉ. अजेश जैन शास्त्री, श्री अंशुल जैन शास्त्री आदि स्थानीय विद्वानों के निर्देशन में महानुभावों द्वारा ध्वजारोहण, मंगलाचरण, चित्र अनावरण, जिनवाणी विराजमान, दीप प्रज्जवलन, शास्त्र भेंट व पाद-प्रक्षालन आदि मांगलिक क्रियाएं संपन्न हुईं|


मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली जैन समाज के अध्यक्ष श्री चक्रेश जैन तथा पंजाब केसरी के कार्याध्यक्ष श्री स्वदेश भूषण जैन ने उपस्थित होकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई तथा आचार्य श्री का मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया| जैन दर्शन के मूर्धन्य विद्वान तथा अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्री परिषद् के अध्यक्ष डॉ. श्रेयांस कुमार जैन (बड़ौत) ने अपने ओजस्वी वक्तव्य में चातुर्मास काल में श्रमण व श्रावक की भूमिका का विवरण दिया तथा जैन धर्म की अभूतपूर्व प्रभावना में पूज्य आचार्य श्री के योगदान की भूरी-भूरी प्रशंसा की|
इस अवसर पर रेवाड़ी जैन समाज की महिलाओं, बच्चों, शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने अनेकों प्रेरक व मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। अध्यक्ष श्री पद्म कुमार जैन ने अपने वक्तव्य में रेवाड़ी में प्रस्तावित जैन पब्लिक कॉलेज के विषय में प्रकाश डाला| संचालन श्री राजेश जैन शास्त्री ने किया। समाज की सभी संस्थाओं व उपसमितियों के पदाधिकारियों द्वारा आचार्य श्री की अष्ट-द्रव्य के सुसज्जित थाल द्वारा विशेष पूजन किया गया। कार्यक्रम में अपनी मधुर संगीत लहरियों के साथ प्रीति जैन एन्ड पार्टी (जबलपुर) ने सभी को मन्त्रमुग्ध कर दिया।


विशाल धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए पूज्य आचार्य श्री के कहा कि चातुर्मास बाह्य यात्रा को विराम देकर अंतरंग की यात्रा को गति प्रदान करने का स्वर्णिम अवसर होता है। चातुर्मास का अवसर जीवन को सन्मार्ग की ओर ले जाने का माध्यम है। संत तो एक स्थान पर रूककर तथा साधना कर अपने कर्मों की निर्जरा कर लेता है, परन्तु श्रावकों को भी इस मौके का फायदा उठाने के लिए घर से निकल संत की चरण-सन्निधि में आना ही होगा। आचार्य श्री ने आगे कहा कि धर्मनगरी रेवाड़ी में प्रथम बार होने जा रहे वर्षायोग में अध्यात्म की वर्षा होगी। चातुर्मास काल में अनेक ग्रंथों की वाचना तथा स्वाध्याय संपन्न होगी। प्रभु की भक्ति, जिनवाणी की आराधना तथा जिनवचनों के रसपान से यह वर्षायोग ओतप्रोत होगा।


इस भव्य समारोह में राजधानी दिल्ली की विभिन्न कालोनियों के साथ-साथ गाज़ियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद, अलवर, तिजारा, फर्रुखनगर, नारनौल, कोसी कलां, मुंबई आदि जगह-जगह से पधारे हजारों मुनिभक्तों ने आचार्य श्री के चरणों में श्रीफल अर्पित कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। इस ऐतिहासिक चातुर्मास कलश स्थापना के अवसर पर प्रथम मुख्य कलश विराजमान करने का सौभाग्य सर्वोदय तीर्थ धारूहेड़ा के संस्थापक राजकुमार प्रदुमन जैन सपरिवार ने प्राप्त किया। समाज के 108 सौभाग्यशाली परिवारों को पंच-परमेष्टि कलश, रत्नत्रय कलश तथा भक्ति कलश विराजमान करने का सुअवसर प्राप्त हुआ| आयोजन समिति द्वारा बाहर से पधारे हुए सभी अतिथि व समाज श्रेष्ठियों का तिलक, माला व पटका पहनाकर सम्मान किया गया तथा चिह्न भेंट किया गया|

 

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