बड़े बाबा के जाप-अनुष्ठान से शुरू हो गया पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव

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दमोह। दमोह जिला मुख्यालय से 36 किमी दूर स्थित जैन तीर्थ क्षेत्र कुंडलपुर में पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव का शुभारंभ शनिवार को बड़े बाबा के जाप-अनुष्ठान से शुरू हो गया। रविवार को भी बड़े बाबा का जाप-अनुष्ठान किया गया। यहां श्रावकों-श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। मुनि संघों के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे एकत्रित हुए हैं। जयघोष से पूरा क्षेत्र मुंजायमान है। हजारों भक्त मुनियों की अगवानी करने यहां पहुंचे हुए हैं। श्रावक बड़े बाबा भगवान आदिनाथ और छोटे बाबा आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के दर्शनों के लिए आतुर हैं।

इस 11 दिवसीय आयोजन में देशभर से 20 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मुख्य समारोह 16 फरवरी से शुरू होगा। इस आयोजन में प्राण-प्रतिष्ठा के लिए विदेशों से भी पंचकल्याणक में शामिल होने प्रतिमाएं भी पहुंची हैं। इन प्रतिमाओं की यहां पर प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इसके बाद इन प्रतिमाओं को अमेरिका, इंग्लैंड समेत सम्बंधित देशों में ले जाकर उन्हें स्थापित कराया जाएगा। 24 फरवरी को बड़े बाबा का महामस्तकाभिषेक कराया जाएगा। कुंडलपुर का महाकुंभ 400 एकड़ में सजा है।

आज 14 फरवरी को घटयात्रा

कल 14 फरवरी सोमवार को घटयात्रा व ध्वजारोहण कार्यक्रम महामहोत्सव स्थल पर आचार्यश्री, समस्त मुनि संघ व आर्यिका माताजी के सानिध्य में किया जाएगा। 15 फरवरी मंगलवार को सकलीकरण, इंद्र प्रतिष्ठा, मंडप प्रतिष्ठा का कार्यक्रम है।

189 फीट है बड़े बाबा के मंदिर की ऊंचाई

जैन तीर्थ क्षेत्र कुंडलपुर में बड़े बाबा के मंदिर के शिखर की ऊंचाई 189 फीट है। दुनिया में अब तक नागर शैली में इतनी ऊंचाई वाला मंदिर नहीं है। इसमें लोहा, सरिया और सीमेंट का उपयोग नहीं किया है। इसे गुजरात व राजस्थान के लाल-पीले पत्थरों से तराशा गया है। पत्थर को दूसरे पत्थर से जोडऩे के लिए भी खास तकनीक का इस्तेमाल किया है। मंदिर की ड्राइंग डिजाइन अक्षरधाम मंदिर की डिजाइन बनाने वाले सोमपुरा बंधुओं ने तैयार की है।

8 वर्ष बाद कुंडलपुर पहुंचे हैं मुनि सुधासागर जी महाराज

निर्यापक मुनि सुधासागर 8 वर्ष बाद कुंडलपुर पहुंचे हैं। निर्यापक मुनि समयसागर, निर्यापक मुनि योगसागर, मुनि प्रशांतसागर, मुनि विमलसागर, अजितसागर, सौम्यसागर सहित कई अन्य संघों का भी कुंडलपुर में आगमन हो चुका है। कई भक्त आचार्यश्री विद्यासागर महाराज से दीक्षा लेने की आस जगाए हैं।

2,500 वर्ष पुराना सिद्धक्षेत्र है कुंडलपुर

कुंडलपुर को सिद्धक्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है। यहां 6& मंदिर हैं, जो 5वीं-6वीं शताब्दी के बताए जाते हैं। क्षेत्र 2500 साल पुराना बताया जाता है। कुंडलपुर सिद्ध क्षेत्र अंतिम श्रुत केवली श्रीधर केवली की मोक्ष स्थली है। यहां 1500 वर्ष पुरानी पद्मासन श्री 1008 आदिनाथ भगवान की प्रतिमा है जिन्हें बड़ेबाबा कहते हैं।

 

21 से 27 इंच की ऊंचाई की हैं प्रतिमाएं

मुख्य मंदिर के सामने सहस्त्रकूट में 1008 मूर्तियां स्थापित की जाएंगी। यह मूर्तियां 21 से 27 इंच ऊंचाई की हैं। इसी तरह त्रिकाल चौबीसी, वर्तमान चौबीसी, पूर्व चौबीसी और भविष्य चौबीसी में मूर्ति स्थापित की जाना है। पंच बालयति की 5-5 प्रतिमाएं भी स्थापित होंगी जो 45 और 26 इंच की पद्मासन मुद्रा में होंगी। इस प्रकार 724 प्रतिमाएं पद्मासन की 15 इंच की, 220 प्रतिमाएं खडगासन में 25 इंच की, 12 प्रतिमाएं खडगासन में 39 इंच की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी।

 

10 प्रतिमाओं की स्थापना विदेशों में होगी

कुंडलपुर पंचकल्याणक महोत्सव में 10 ऐसी प्रतिमाएं शामिल हो रही हैं, जिनकी स्थापना विदेशों में की जाएगी। जिनमें अमेरिका, ब्रिटेन और कनाड़ा के जैन मंदिर शामिल हैं। 100 से अधिक देशों से एनआरआइ श्रावकों के कुंडलपुर महोत्सव में

 

महामहोत्सव एक नजर में

संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज ससंघ के मंगल सान्निध्य में कुंडलपुर महामहोत्सव के मुख्य कार्यक्रमों की शुरुआत भगवान के गर्भकल्याणक पूर्व रूप से 16 फरवरी से प्रारंभ होगी। 17 फरवरी गर्भ कल्याणक उत्तर रूप, 18 फरवरी जन्म कल्याणक, 19 फरवरी तप कल्याणक पूर्व रूप, 20 फरवरी तप कल्याणक उत्तर रूप, 21 फरवरी ज्ञान कल्याणक पूर्व रूप, 22 फरवरी ज्ञान कल्याणक उत्तर रूप, 23 फरवरी मोक्ष कल्याणक में गजरथ फेरी का कार्यक्रम भव्यता से होगा। 24 फरवरी से भगवान आदिनाथ बड़े बाबा का मस्तकाभिषेक का प्रारंभ होगा जो फाल्गुन माह की अष्टान्हिका पर्व तक प्रतिदिन धार्मिक रीति से चलेगा।

 

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