बीते समय पर ध्यान ने देकर आगे का समय ठीक करेंः आचार्य श्री सुंदर सागर

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न्यूज सौजन्य- कुणाल जैन

प्रतापगढ़। स्थानीय नया मंदिर में आगुन्तक श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए आचार्य सुंदरसागर जी ने कहा है कि भगवान महावीर की दिव्यवाणी सुनने का सौभाग्य मिल रहा है, इसलिए आप सब सौभाग्यशाली हो। भगवान महावीर की देशना यही कहती है कि तुम अपना कल्याण करना चाहते हों तो पर की बातों को विराम दें और स्वयं की चर्चा करें। जन्म- मरण पुनः ना हो ऐसा प्रयास करना। जो समय बीत गया, उस पर ध्यान ना देकर बचे समय को अपनी आत्मा को शुद्ध करने में लगाएं।
उन्होंने कहा कि आचार्य कुंदकुंद स्वामी ने 11 वर्ष की आयु में दीक्षा लेकर समयसार की रचना की। उन्होंने समयसार की रचना कहीं देखकर नहीं की। उन्होंने स्वयं की आत्मा की और दृष्टि करके, प्रैक्टिकल किया और प्रैक्टिकल करके हर बात को स्वयं पर सिद्ध किया। इसके बाद ही समयसार को लिखा। समयसार पढ़ने का अधिकारी वह है जो आत्मा की प्यास रखता हो। रात्रि भोजन वाले करने वाले समयसार या किसी भी ग्रंथ को छूने के अधिकारी भी नहीं होते है।


भव्यात्माओं! कथनी और करनी में फर्क नहीं होना चाहिए। जिन शासन इतना सस्ता नहीं है। अगर आत्मा को जानना है तो जिनके पीछे सब छोड़ा है, उसको स्वीकार करो। संभावनाएं, संभावनाएं हैं वास्तविकता तो वर्तमान हैं। संभावना को वास्तविक करना आपके स्वयं के हाथ में है। संभावना आपके दिमाग में पले, उससे पहले अपनी आत्मा को इतना पावरफुल बना दो कि संभावनाओं के लिए कोई जगह ना रहे। भगवान महावीर कहते हैं क्यों मूर्ख बनता है? तू तो अनंतगुणों का धारी है, तू योग्य है चैतन्य है फिर क्यों सम्भावनाओं को, वास्तु को, दोषों को जगह देता है। तू स्वयं को बदल ले सारे वास्तु दोष दूर हो जाएंगे।

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