भावी दीक्षार्थियों ने श्री गणधर वलयविधान का किया पूजन

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  • अतिशय क्षेत्र श्रीमहावीरजी में 4 अगस्त को होंगी दो दीक्षाएं

न्यूज़ सैजन्य-राजेश पंचोलिया

श्रीमहावीरजी। प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवति आचार्य श्री शान्ति सागर जी के तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्म सागर जी से वर्ष 1969 में दीक्षित पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी की मुनि दीक्षा तथा आर्यिका श्री गुणमति जी की जन्म नगरी अतिशय क्षेत्र श्रीमहावीरजी में आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी चातुर्मास कमेटी के तत्वावधान में कल 4 अगस्त 2022 को दो दीक्षाएं होंगी।

चातुर्मास समिति अध्यक्ष श्री राजकुमार सेठी जयपुर ने बताया कि 1 अगस्त को श्री महावीर विधान, 2 अगस्त को आचार्य श्री वर्द्धमान सागर विधान तथा 3 अगस्त को दीक्षार्थी श्रीमती धीसी देवी जी 79 वर्ष दादी जोबनेर तथा श्रीमती भगवानी देवी जयपुरिया नानी सीकर 74 वर्ष द्वारा वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी संघ आर्यिका श्री सरस्वती मति माताजी एवम आर्यिका श्री सृष्टि भूषण जी संघ सान्निध्य में श्री गणधर वलय का पूजन किया गया। भट्टारक श्री सकल कीर्ति जी द्वारा रचित श्री गणधर वलय मंडल विधान की सुंदर रचना भाव संघस्थ श्री गजु भैया, पूनम दीदी, नेहा दीदी, दीप्ति दीदी, साधना दीदी ने की।

श्री गणधर विलय के प्रथम वलय में 8, द्वितीय वलय में 16 तथा तृतीय वलय में 32 कुल 48 अर्ध्य दीक्षार्थियों द्वारा भक्ति भाव पूर्वक चढ़ाए गए। आचार्य श्री द्वारा चढ़ाए गए अर्ध्य का गुण और महत्व बताया गया। इस विधान के पूजन की पात्रता केवल दीक्षार्थियों को होती है।
श्री गणधर वलय विधान के पूर्व, नित्य नियम पूजन की गई। दीक्षा समारोह में शामिल होने के लिए परिजन जोबनेर तथा सीकर समाज के अतिरिक्त निकटवर्ती नगरों तथा अन्य राज्यों से भक्त गण श्रीमहावीर जी में आए हैं।

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