भगवान सबका अच्छा ही करते हैंः आचार्य श्री सुंदरसागर जी

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  • जो कुछ होता है, उसके पीछे खुद का ही कर्म
  • हाथ की रेखाएं अच्छी या बुरी नहीं होती, सब अपने कर्मों का लेखा-जोखा

न्यूज सौजन्य – कुणाल जैन 

प्रतापगढ़,27 जुलाई । स्थानीय नया मंदिर में आगुन्तक श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए आचार्य श्री सुंदरसागर जी ने कहा है कि भगवान महावीर की दिव्यदेशना का हम सब स्वाद ले रहे हैं। हम यह भी भलीभाँति जानते हैं कि भगवान महावीर अंतिम तीर्थंकर हैं। जब भी कोई महापुरुष कोई कार्य करते हैं तो विशुद्धि बढ़ाने के लिए ही करते हैं और आप कोई कार्य करते हैं तो नाम कमाने के लिए करते हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए अपनी बात स्पष्ट की कि हम और हम बचपन से सुनते आए हैं कि भगवान सबकी रक्षा करते हैं, भगवान ही सबका अच्छा और बुरा करते हैं। परंतु इस पंचम काल में ऐसा भी देखा गया है कि गरीब जो धर्म करता है, उसे और दुख मिलता है और अमीर जो धर्म नहीं करता है, फिर भी उसे सुख- शांति मिलती है। यह सत्य है कि नहीं? भगवान कुछ नहीं करता। तो धनंजय का बेटा बीमार हुआ तो ठीक कैसे हुआ और मैना कुमारी के दुख भगवान ने कैसे हरे, कैसे रक्षा करी? अंजनचोर का कष्ठ मिटाने वाले भी भगवान ही थे। सब का पालन करने वाले भगवान और सबका भाग्य लिखने वाले भगवान तो फिर बताइये- वह राग द्वेष से परे हैं, निरंकार हैं तो वह किसी के लिए बुरा क्यों लिखेंगे। भगवान सबके लिए अच्छा ही लिखेंगे। भगवान इतने गुणवान हैं कि सबका भविष्य परफेक्ट ही लिखेंगे।

उन्होंने कहा कि अब सवाल है- जो कुछ भी होता है ऊपर वाले की मर्जी से होता है तो, क्या कर्मों के हिसाब से होता है? जो कुछ होता है कर्मों के अनुसार होगा। एक मिनट के लिए विचार कीजिये जो भगवान सोचता है, वह वह होता है। जो- जो कार्य करोगे वैसा कार्य होगा, तो कर्म किसने किए हैं? आपने स्वयं ने या भगवान ने? जो भगवान सबका भाग्य बनाता है तो गरीब को गरीब क्यों बनाता है और अमीर को अमीर क्यों बनाता है?

आचार्य सुंदरसागर जी ने आगे प्रवचन में कहा- आपके पिताजी आपके लिए अच्छा भाग्य लिखेंगे। ये तो सत्य है ना तो उन्होंने आपकी शादी के लिए एक लड़की पसंद करी, शादी के लिए अच्छा स्टेज लगाया, खूब खर्चा किया, सोना भी चढ़ाया और शादी के समय लड़की भाग गई तो इसमे दोषी कौन? अब आप किसकी गलती निकालोगे पिताजी की या उसमें भी भगवान की गलती निकालोगे। आप भगवान की ही गलती निकालते हैं कि भगवान मेरी दुल्हन भाग गई, पर ये नहीं सोचते कि जो भी हुआ है सब मेरे कर्म हैं। मेरे परिवार के सबके कर्मों के कारण हो रहा है। कर्म स्वयं कर रहा है और दोष भगवान के ऊपर थोपा जाता है। आपने कर्म गलत किए हैं और आपके साथ गलत होता है तो आप कहते हैं कि भगवान ने गलत किया। गलत कर्म आपको बुरा समय दिखाते हैं और अच्छे कर्म आपको शांति समृद्धि लाते हैं। आप यह सोचें कि मेरे स्वयं का अच्छा करने वाला भी मैं हूं और बुरा करने वाला भी मैं हूं। हाथ की रेखाओं पर दोष नहीं देना। रेखा अच्छी या बुरी नहीं होती। सब अपने कर्मों का लेखा-जोखा है। उन हाथ की रेखोओं से, विभिन्न निशानों से सिर्फ अंदाजा लगाया जा सकता है कि ऐसा होगा या ना होगा।

भवात्माओं ! संम्भावना और वास्तविकता दोनों अलग- अलग होती है। हाथ की रेखाओं से सिर्फ संभावना लगाई जा सकती है कि ऐसा हो सकता है। वास्तविकता नहीं लगाई जा सकती और सबसे बड़ी गड़बड़ वही होती है जहां हम संभावना को वास्तविकता समझते हैं व उसे दिमाग में फिट कर लेते हैं। संभावना को दिमाग में स्थान देंगे, वास्तविकता में होने की संभावना ज्यादा होगी। स्वयं के कर्त्ताधर्ता हम स्वयं ही हैं। यही मानना चाहिए। आप सबका मंगल हो।

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