भूखा सोना मंजूर है लेकिन कभी भीख नहीं मांगूंगा

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उदयपुर। सोनम राणावत / सिर पे गोल टोपी, आंखों पर काला चश्मा लगाए अपनी साईकिल पर सवार वो घूम रहा था झील के किनारे। लोगों को आवाज लगाकर कह रहा था आइए साइकिल का करतब देखिए लेकिन कोई वहां नहीं रुक रहा था। जैसे जैसे दिन ढल रहा था वैसे वैसे उसकी चिंता और बढ़ती जा रही थी क्योंकि उसे अपना पेट भी तो भरना था। और पेट भरने के लिए पैसे की जरूरत होती है । लेकिन खुद्दारी उसके खून में थी । कमाई नहीं होने पर भी वो भीख नहीं मांग रहा था बल्कि और अधिक लोगों से साइकिल का उसका खेल देखने के लिए आग्रह कर रहा था। इस शक्स का नाम है गोगा जो कि उदयपुर स्थित पिछोला झील के किनारे अपनी साइकिल स हैरत अंगेज कारनामे दिखा रहा था । ताकि सौ-पचास रुपए कमाले तो दो वक्त की रोटी वो खा पाए। अजमेर के लोहाखान निवासी गोगा ने बताया कि वह कई सालों से यहां साइकिल पर करतब दिखा रहे हैं। उनहोने यह भी बताया कि वह करतब जरूर दिखाते हैं लेकिन किसी के सामने पैसों के लिए हाथ नहीं फैलाते हैं। फिर चाहे रात को भूख सोना मंजूर है। गोगा ने बताया कि उनका यह साईकिल का खेल देखने के बाद वो किसी से पैसा नहीं मांगते है अगर खेल किसी को अच्छा लगा और अपनी इच्छा से दे दिया तो ठीक है वरना चाहे भूखा सोना मंजूर है लेकिन वे किसी के सामने हाथ नहीं फैलाते। वे कहते हैं हाथों से मैं सिर्फ अपना कर्म करता हूं, उसके बाद भगवान जो चाहे वो होता है। खुद्दारी मेरे खून में है।

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