बुंदेलखंड के प्राचीन तीर्थ, मंदिर और मूर्तियां हमारी अनमोल धरोहर-मंत्री उत्तराखंड उत्तरप्रदेश दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी

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ललितपुर। बुंदेलखंड क्षेत्र में जैन संस्कृति के अनेक चिन्ह, कई तीर्थक्षेत्र और प्राचीन मूर्तियां आदि हैं। इनके संरक्षण और सम्वर्द्धन की महती आवश्यकता है। पूरे समाज को इसके लिए आगे आना चाहिए ताकि इन तीर्थों को बचाया जा सके। भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी उत्तरप्रदेश, उत्तरांचल एवं मध्यांचल के संयुक्त तत्वावधान में हाल में 30 सितम्बर से 02 अक्टूबर 2020 तक आयोजित त्रिदिवसीय वेबिनार में विभिन्न वक्ताओं की ओर से ये विचार सामने आए। वेबिनार में बुंदेलखंड के तीर्थक्षेत्रों के संरक्षण व सम्वर्द्धन पर गहन मंथन किया गया। राष्ट्रीय वेबिनार में तीर्थ क्षेत्रों का विकास एवं प्राचीनता पर अनेक वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
प्रथम दिवस
वेबिनार के प्रथम दिवस की शुरूआत जयपुर के पं. प्रद्युम्न शास्त्री के मंगलाचरण से हुई और आॅनलाइन दीपप्रज्वलन उत्तर प्रदेश उत्तरांचल तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष जवाहर लाल जैन सिकंदराबाद ने किया। अध्यक्षता विमल सोगानी इंदौर (अध्यक्ष मध्यांचल तीर्थ क्षेत्र कमेटी) ने की।


इस दिन मुख्य अतिथि श्री सुरेश जैन आईएएस, भोपाल ने कहा भारत के संपूर्ण सांस्कृतिक वैभव के निर्माण और विकास में श्रमण संस्कृति और कला का अनुपम योगदान है। बुंदेलखंड में जगह-जगह प्राचीन तीर्थक्षेत्र हैं, ये हमारी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान हैं। इनके संरक्षण के लिए पूरे समाज को आगे आना चाहिए। वहीं मुख्य अतिथि जस्टिस विमला जैन (सेवानिवृत्त न्यायाधीश मध्यप्रदेश हाइकोर्ट) भोपाल ने कहा कि प्राचीन धरोहरों को सुरक्षित, स्वच्छ रखना प्रत्येक व्यक्ति का कत्र्तव्य है। सभी इनके संरक्षण के लिए तन, मन और धन और समय का दान करें। इतिहास को संजोना सभी का कत्र्तव्य है। वेबिनार में मुख्य वक्ताओं में सिद्धक्षेत्र नैनागिर के ऐतिहासिक तथ्यों पर प्रो. महेंद्र सिंघई भोपाल ने प्रकाश डाला, अतिशय क्षेत्र पपौरा जी टीकमगढ़ की प्राचीनता के बारे में के सुनील जैन टीकमगढ़ ने अवगत कराया तथा सिद्ध क्षेत्र बड़ागांव धसान के बारे में राकेश केसरिया ने अनेक नए तथ्यों पर प्रकाश डाला।
वेबिनार का संचालन करते हुए कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुनील संचय ललितपुर (मंत्री उत्तरप्रदेश- उत्तरांचल तीर्थक्षेत्र कमेटी) ने ललितपुर जनपद में बिखरी पड़ी पुरा सम्पदा और प्राचीन जैन तीर्थों के बारे में अवगत कराया। वरिष्ठ समाजसेवी राजेश रागी बक्सवाहा ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के संयोजक एवं प्रस्तुतकर्ता प्रद्युम्न कुमार शास्त्री जयपुर, मनीष विद्यार्थी शाहगढ, अंजना जैन जयपुर रहे।
द्वितीय दिवस
राष्ट्रीय वेबिनार के दूसरे दिन का आरम्भ राजस्थान लाडनूं की विदुषी डॉ.मनीषा जैन के मंगलाचरण से हुआ। ऑनलाइन दीप प्रज्जवलन सिद्धक्षेत्र द्रोणगिरि के मंत्री भागचंद पीली दुकान बड़ामलहरा ने किया।


दूसरे दिन के मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने कहा कि प्राचीन तीर्थक्षेत्र हमारी आस्था, श्रद्धा के केन्द्रबिन्दु हैं। इनकी मूर्तियां व तीर्थ क्षेत्र वास्तुकला के विशिष्ट प्रतिमान हैं। ऐसे स्थानों पर जाकर हम संस्कारित होते हैं। बुंदेलखंड के प्राचीन तीर्थ क्षेत्र, मंदिर हमारे अतीत के गौरव हैं। उन्होंने कहा कि तीर्थक्षेत्रों, पवित्र स्थानों के आसपास मांस, मदिरा की दुकानें नहीं होनी चाहिए। अध्यक्षता करते हुए उत्तर प्रदेश उत्तरांचल तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष जवाहर लाल जैन सिकंदराबाद ने कहा कि तीर्थक्षेत्र हमारी संस्कृति, आस्था के प्रतीक है। बुंदेलखंड में हमारी विरासत बिखरी पड़ी है।
कार्यक्रम की भूमिका और अतिथियों का परिचय कराते हुए उत्तर प्रदेश उत्तरांचल तीर्थ क्षेत्र कमेटी ललितपुर के मंत्री डॉ. सुनील संचय जनपद ललितपुर में स्थित देवगढ़, नवागढ़, गिरार, सिरोंन जी, मदनपुर, कारीटोरन, पवाजी, मदनपुर, बानपुर, बालाबेहट, दुधई, क्षेत्रपाल ललितपुर, चांदपुर-जहाजपुर आदि क्षेत्रों के बारे में अवगत कराया।
मुख्यवक्ताओं में महरौनी विकासखंड में स्थित तीर्थक्षेत्र नवागढ़ से निदेशक ब्र. जय कुमार निशांत भैया ने कहा कि प्रागैतिहासिक नवागढ़ अतिशय क्षेत्र जैन धर्म के 18वें तीर्थंकर भगवान अरहनाथ स्वामी के अतिशय से संपन्न है। नवागढ़ में निरंतर हो रहे अनुसंधान से अनेक बहुमूल्य जानकारी प्राप्त हो रही हैं। यह क्षेत्र भारतीय संस्कृति की अनमोल धरोहर है।
करगुवां जी झांसी जी से महामंत्री व वरिष्ठ समाजसेवी प्रवीण जैन संपादक दैनिक विश्व परिवार ने कहा कि अतिशय क्षेत्र करगुवा जी झाँसी भगवान पाश्र्वनाथ के अतिशय से सम्पन्न है। यहां 750 वर्ष पूर्व से भूगर्भ में प्राप्त पाश्र्वनाथ भगवान विराजमान हैं। भव्य मंदिर का निर्माण कार्य प्रगति पर है। 2 अक्टूबर गांधी जयंती अहिंसा दिवस पर यहां पक्षियों के अस्पताल का शुभारंभ किया गया है। मड़ावरा विकासखंड में स्थित अतिशय क्षेत्र गिरार जी से संयुक्त मंत्री प्रदीप जैन मडावरा ने बताया कि गिरारगिरी बहुत ही प्राचीन चमत्कारी अतिशय क्षेत्र है। उन्होंने गिरार क्षेत्र की विभिन्न गतिविधियों पर प्रकाश डाला। युवा उद्योगपति व समाजश्रेष्ठी कपिल मलैया सागर ने आभार व्यक्त किया। संचालन करते हुए जयपुर के पं. प्रद्युम्न शास्त्री ने बुंदेलखंड के तीर्थक्षेत्रों के संरक्षण और सम्वर्द्धन के बारे में चर्चा की।
तृतीय दिवस
तीन दिवसीय वेबिनार के अंतिम दिन समापन सत्र में 2 अक्टूबर को मंगलाचरण टीकमगढ़ के पं. संजय शास्त्री ने किया वहीं श्री दिगंबर जैन महासमिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मणीन्द्र जैन, मुंबई ने दीप प्रज्वलित किया।
उत्तर प्रदेश उत्तरांचल तीर्थ क्षेत्र कमेटी के मंत्री डॉ. सुनील संचय ललितपुर अतिथि परिचय दिया और कार्यक्रम भूमिका प्रस्तुत की।
इस दिन मुख्य अतिथि भारतीय जनता पार्टी की पूर्व राष्ट्रीय सचिव प्रखर वक्त श्रीमती सुधा मलैया ने कहा कि बुंदेलखंड में प्राचीन ऐतिहासिक विरासत समेटे अनेक अतिशय व सिद्ध क्षेत्र हैं। ये हमारी विरासत की अमूल्य धरोहर और हमारी पहचान हैं। उन्होंने अतिशय क्षेत्र कुंडलपुर, दमोह का विस्तार से परिचय दिया और यहां प्राचीन समय से लेकर वर्तमान में चल रहीं गतिविधियों पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कुंडलपुर में विराजमान ऋषभदेव की प्राचीन प्रतिमा को पूरे विश्व में बड़े बाबा के नाम से जाना जाता है।
अंतिम सत्र की अध्यक्षता करते हुए सागर के युवा उद्योगपति , श्रेष्ठी कपिल मलैया ने कहा कि हमारे ये तीर्थ हमारी आन-बान-शान हैं। ऐसे में हमारा दायित्व बनता है कि इनके संरक्षण और सम्वर्द्धन के लिए हम आगे आएं।
मुख्यवक्ताओं में जैन पंचायत ललितपुर के अध्यक्ष अनिल अंचल ने कहा कि तीर्थक्षेत्रों को सरकार के सहयोग से पर्यटन क्षेत्रों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। ललितपुर में परम पूज्य मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज की प्रेरणा से क्षेत्रपाल मंदिर में चल रहे भव्य विशाल मंदिर की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि दिगम्बर जैन क्षेत्रपाल मंदिर उत्तर प्रदेश का सबसे विशाल और भव्य मंदिर बनने जा रहा है। सिद्धक्षेत्र द्रोणगिरी जिला छतरपुर से महामंत्री भागचंद पीलीदुकान बड़ामलहरा ने सिद्धक्षेत्र द्रोणगिरि के प्राचीन इतिहास एवं वर्तमान गतिविधियों से अवगत कराया।
अतिशयक्षेत्र आहार जी से डॉ. नरेंद्र कुमार जैन ने आहार जी क्षेत्र के पुरातत्व, प्राचीनता और वर्तमान में संचालित विभिन्न जनकल्याणी कार्यों पर प्रकाश डाला। वहीं अतिशय क्षेत्र हटा जी टीकमगढ़ से महामंत्री अशोक जैन क्रांतिकारी ने हटा क्षेत्र के विकास और उन्नयन के बारे में प्रकाश डाला। संचालन संयोजक जयपुर के पं. प्रद्युम्न शास्त्री वेबिनार की आख्या प्रस्तुत की। संयोजक मनीष विद्यार्थी शाहगढ़ ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संयोजन एवं प्रस्तुति प्रद्युम्न कुमार शास्त्री जयपुर, मनीष विद्यार्थी शाहगढ, अंजना जैन जयपुर ने किया। निर्देशक उत्तर प्रदेश उत्तरांचल तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष श्री जवाहरलाल जैन सिकंदराबाद एवं श्री विमल सौगानी इंदौर रहे। सह निर्देशक युवा उद्योगपति कपिल मलैया सागर व वरिष्ठ समाजसेवी राजेश रागी बकस्वाहा रहे। समन्वयक डॉ सुनील जैन संचय रहे। वेबिनार में बुंदेलखंड के अनेक तीर्थक्षेत्रों के पदाधिकारियों व गणमान्य लोगों ने भाग लिया।

प्रेषक -डॉ सुनील जैन संचय

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