चौथे दिन दीक्षाथियों की हल्दी और मेहंदी की रस्म

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सात दिवसीय दीक्षा महोत्सव : आचार्य विभव सागर ने भी ससंघ किया मोहन कॉलोनी में मंगल प्रवेश

तृष्टि जैन 

बांसवाड़ा । मोहन कॉलोनी बांसवाड़ा में सात दिवसीय दीक्षा महोत्सव के चौथे दिन दीक्षार्थी बहनों की हल्दी की रस्म हुई। आचार्यश्री सुंदर सागरजी महाराज,  आचार्यश्री सुवीर सागर महाराज,आचार्य श्री अनुभव सागर महाराज, अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज सहित 30 मयूर पिच्छीधारी संतों के सान्निध्य में हो रहे आयोजन में आचार्य विभव सागर महाराज ने अपने विशाल संघ के साथ कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश किया।
दीक्षार्थी बहन रीता दीदी, पूजा दीदी, सुरभि दीदी, लक्ष्मी दीदी, रश्मि दीदी ने पंचामृत अभिषेक के साथ श्री शांतिनाथ विधान में जिनेन्द्र भगवान के गुणों का गुणगान करते हुए भक्ति नृत्य साथ मंडल पर अर्घ्य समर्पित किए। दोपहर में समाजजन और संघ के भैया-बहनों ने दीक्षार्थी बहनों को हल्दी लगाई। यह हल्दी रस्म होली के रूप में परिवर्तित हो गई और श्रावकों ने एक दूसरे को गुलाल, हल्दी लगाकर होली खेली।
अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज में बताया कि शाम को पांचों दीक्षार्थी बहनों को मेहन्दी लगाने का कार्यक्रम हुआ। पांचों के धर्म माता-पिता, परिवार और समाजजन के लोगों ने मेहंदी लगाने के साथ यह सुनिश्चित कर दिया कि अब बहिन संसार के मार्ग पर नहीं आएंगी। धर्म के माता पिता और परिवारजनों ने बहनों को धर्म के मार्ग के विदा कर दिया। समाज अध्यक्ष पवन नश्नावत ने बताया कि 8 दिसंबर को दीक्षार्थी बहनों के धर्म के माता-पिता बनेंगे। श्रावक के घर में दीदियों का मंगल स्नान करवाया जाएगा। इस अवसर पर समाजजन उपस्थित रहेंगे। शाम को गांधी मूर्ति से मोहन कॉलोनी की दीक्षार्थियों की शोभायात्रा निकाली जाएगी। विधान के पुण्यार्जक नंदबाला नानालाल नाशनावत परिवार रहा ।

दु:ख आता है तो प्राणी को भगवान की याद करता है: आचार्य सुंदर सागर

इस अवसर पर आचार्य श्री सुंदर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षार्थी बहन श्री शांतिनाथ विधान कर रही हैं। दीक्षार्थी बहनें इस विधान से जिनेन्द्र भगवान की आराधना करते हुए यह भावना कर रही हैं कि विश्व में कोरोना महामारी पुन: न आए और विश्व के प्राणी, जो भय, धन, तन और किसी शारीरिक कष्ट से दुखी है तो इन सबका यह दुख दूर हो जाए और सन्मार्ग की प्राप्ति हो। साथ ही बहनें अपने भावों को विशुद्ध करने के लिए और कर्म निर्जरा के लिए तथा शांति की प्राप्ति के लिए श्री शांतिनाथ भगवान को महाअघ्र्य चढ़ाए। उन्होंने कहा कि जब जब दु:ख आता है तो प्रत्येक प्राणी को भगवान की याद करता है। प्राणी जब अपने इष्ट जिनेन्द्र की आराधना करता है तो दु:ख दूर होते हैं। उसी प्रकार जिनेन्द्र की आराधना करने से संसार के दुख भी दूर होते हैं और आत्मा पवित्र होती है।
आचार्य अनुभव सागर ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि संसार कोई धन से, कोई शरीर के रोग से ,कोई मानसिक रोग से तथा कोई शारीरिक रोग से दु:खी है। यह सब भगवान श्री शांतिनाथ की आराधना करने से दूर होते हैं।

ये समाजजन रहे मौजूद
इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष पवन नश्नावत,रमणलाल कलावत, अशोक मेहता, पोपटलाल कोठारी, जिनेद्र रजावत, शैलेष किकावत, लोकेश आसावत, धर्मेंद्र वोरा, शीतल वैध,मनोज जैन, राहुल नश्नावत ,अमन जैन,प्रशीश जैन, प्रतीक वैध, अविचल जैन,प्रिन्स जैन,अंकीत वोरा,निखिल जैन,मयंक जैन,पारस जैन,सनत जैन सहित समाजजन उपस्थित रहे ।


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