छह मुमुक्षुओं ने वरण किया वैराग्य का पथ

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– संसार पथ से बढ़े संयम के पथ पर कदम

– आचार्यश्री सुंदर सागर ने तीन को आर्यिका और तीन को क्षुल्लक जैनेश्वरी दीक्षा  दी 

– 21 चरण में हुई दीक्षा, देशभर के हजारों लोग बने ऐतिहासिक मौके के साक्षी, सात दिवसीय दीक्षा महोत्सव संपन्न

बांसवाड़ा । नगर के लिए शुक्रवार दिन इतिहास के पन्नों पर लिखा जाएगा। मोहन कॉलोनी में चल रहे सात दिवसीय दीक्षा महोत्सव के आखिरी दिन शुक्रवार को आचार्यश्री सुंदर सागर महाराज ने छह मुमुक्षुओं को जैनेश्वरी दीक्षा दी । इनमें तीन ने आर्यिका और तीन ने क्षुल्लक दीक्षा ली। अब इन्हें सांसारिक नाम छोड़कर नए नामों से पुकारा जाएगा। महोत्सव की विशेषता यह रही कि तय कार्यक्रम के अनुसार दीक्षा पांच की होनी थी, पर सुबह एटा की विश्वलता दीदी ने आचार्यजी से दीक्षा दिलाने का निवेदन किया। इस पर परिवार की सहमति और समाज की अनुमोदना के बाद उनकी भी दीक्षा कराई।


दीक्षा के बाद ये होंगे अब नए नाम

• रीता दीदी अब आर्यिका श्री सुकाव्यमति
• पूजा दीदी अब आर्यिका श्री सुलक्ष्यमति
• सुरभि दीदी अब आर्यिका श्री सुरम्यमति
• लक्ष्मी दीदी अब क्षुल्लिका श्री सुतथ्यमति
• रश्मि दीदी अब क्षुल्लिका श्री सुनम्यमति
• विश्वलता दीदी अब क्षुल्लिका श्री सुपथ्यमति


संभवतय: यह पहली बार है जब शहर में दिगंबर जैन आचार्य ने छह मुमुक्षुओं को एक साथ दीक्षा दिलाई हों। पांच आचार्य सहित 70 पिच्छीधारी संयमी और भट्टारक स्वस्तिश्री सिद्धांत कीर्ति स्वामी अरतीपुर (कर्नाटक) के साथ देशभर से आए श्रावक इस गरिमापूर्ण धार्मिक आयोजन के साक्षी बने।

दीक्षार्थियों में से एक इंजीनियर और एक पीएचडी हैं। आचार्यश्री सुंदर सागर महाराज 26 साल में 36 दीक्षा दिलाकर उन्हें संयम मार्ग पर ला चुके हैं। इस मौके पर राष्ट्रीय सुंदर युवा मंच ने आचार्यश्री सुंदर सागर महाराज को राष्ट्र संत की उपाधि दी। समाज द्वारा  आचार्य सुंदर सागर महाराज को सिद्धान्त चक्रवर्ती,आचार्य श्री समता सागर महाराज को धर्ममूर्ति उपाधि, आचार्य श्री विभव सागर महाराज को काव्य केसरी उपाधि, आचार्य श्री सुवीर सागर को सौम्य मूर्ति की उपाधि और आचार्य श्री अनुभव सागर महाराज को आगमविद की उपाधि दी गई।


अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने बताया कि शुभ मुहूर्त 9.30 बजे दीक्षार्थी रीता दीदी, पूजा दीदी, सुरभि दीदी, लक्ष्मी दीदी, रश्मि दीदी और विश्वलता दीदी को मंदिर से पंडाल तक पालकी में लाए। इस मौके पर उपस्थित श्रावक-श्राविकाएं जयकारे लगाकर यह बतलाना चाहते थे कि हम उपस्थित है और दीक्षा महोत्सव की अनुमोदना कर रहे है। दीक्षा दिलाने के लिए मंच पर आचार्यश्री सुंदर सागर महाराज के सान्निध्य में चार आचार्य समता सागर महाराज, आचार्य विभव सागर, सुवीर सागर, अनुभव सागर और मुनि आज्ञा सागर विराजमान रहे।


समाज के महामंत्री मनोज जैन ने बताया कि 12:30 बजे आचार्य श्री सुंदर सागर ने दीक्षार्थी बहनों के सिर पर मंत्रोच्चारण के साथ 21 चरण में दीक्षा के संस्कार पूरे किए। इस दौरान मंच पर दीक्षाथियों ने अघ्र्य समर्पित किए। कार्यक्रम का शुभारम्भ कलश स्थापना, दीप प्रज्जवलन, मंगलाचरण, भजन से हुआ। उपस्थित सभी आचार्यों ने धर्म सभा को संबोधित किया।

 कार्यक्रम का संचालन अनुभव सागर जी महाराज एवं ब्रह्मचारी आशीष भैया ने किया। आभार प्रदर्शन समाज अध्यक्ष पवन नश्नावत ने किया। कार्यक्रम में कर्नाटक से अरतिपुर जैन मट के भट्टारक सिद्धांत कीर्ति स्वामी जी का भी सान्निध्य प्राप्त हुआ। दीक्षार्थी बहनों को सुरेश, डॉ. शैलेन्द्र, मनोज एटा, दिलीप चेतना बंडी रतलाम, सरोज, उमेश रतलाम, अनूप बोरखा वाले, रवीन्द्र, पंकज एटा ने पिच्छिका भेंट की। दि लीप चेतना रतलाम, सरोज उमेश रतलाम, दीपचन्द इटावा, महावीर कुमार बाराबंकी, प्रदीप कानपुर ने कमंडल भेंट किए। इस मौके पर अन्य श्रावकों ने दीक्षार्थियों को शास्त्र जाप माला और वस्त्र भी भेंट किए। उपस्थित समस्त आचार्य और मुनि संघ ने आचार्य सुंदर सागर जी महाराज को पिच्छिका भेंट की। संचालन व्यवस्था सनत जैन, मयंक जैन और पारस जैन ने संभाली।

इस अवसर पर आदिसागर जाग्रति महिला की राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेरणा शाह ,समाज के संरक्षक अशोक वोरा,समाज अध्यक्ष पवन कुमार नश्नावत, उपाध्यक्ष पवन कुमार वोरा, महामंत्री मनोज जैन, कोषाध्यक्ष कांतिलाल रणियावत, सहमंत्री रमेशचंद्र रजावत, अजबलाल वोरा,डॉ दिनेश कुमार जैन,जिनेन्द्र रजावत, दिनेश रजावत,ऋषभ नश्नावत,महावीर नश्नावत, सतीश वैध,अशोक वैध, लोकेन्द्र नश्नावत,सुनील न१नावत,हेमंत कलावत,धमेन्द्र वोरा,सुप्रकाश मित्र मण्डल,सुप्रकाश महिला मण्डल, विमल सन्मति युवा मंच, बहु मण्डल के सदस्यो सहित समाजजन उपस्थित रहे ।

संसार पथ से यूं बढ़े संयम के पथ पर कदम … यानी
इस तरह 21 चरण में हुई दीक्षा

पहला चरण : सभी छह दीक्षार्थियों ने आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज से दीक्षा कराने का निवेदन किया।
दूसरा चरण : आज्ञा लेकर चौकी पर बैठीं एवं मंच पर उपस्थित संत समुदाय औऱ श्रावकों से दीक्षा की स्वीकृति मांगी।

तीसरा चरण : दीक्षाथियों ने केशलोंच किया।
चौथा चरण : वृहत शांतिमंत्र उच्चारण से तीन बार गंधोदक क्षेपण किया।


पांचवां चरण : वर्धमान मंत्र से केशर आदि मंगल द्रव्य से आशीर्वाद प्राप्त किया।
छठवां चरण : आचार्यश्री सुन्दर सागर महाराज ने पंचमुष्ठी केशलोंच किया।


सातवां चरण : केशलोंच के पूर्ण होने के बाद सिद्ध भक्ति पूर्व केशलोंच निष्ठापन किया।
आठवां चरण : जल से सिर प्रक्षालन किया गया।


नवां चरण : जीवन भर श्वेत साड़ी पहनने का संकल्प लिया। ( यह वह चरण है कि दीक्षार्थी चाहे तो वापस घर जा सकता है।)
दसवां चरण : दीक्षार्थियों ने फिर हाथ जोड़कर दीक्षा संस्कार करने लिए निवेदन किया।


ग्याहरवां चरण: दीक्षा प्रदाता आचार्य श्री सुन्दर सागर ने सिर पर श्रीकार लेखन किया।
बरहवां चरण : सिर पर 108 लोंग से सर्व शांतिमंत्र।


तेरहवां चरण : दीक्षार्थी के हाथ की अंजलि में केशर कर्पूर से श्रीकार लेखन किया।
चौदहवां चरण : हथेली की अंजलि के अंदर चारों दिशाओं में 3,24,5,2 अंक का लिखकर अंजलि भरी। मन्त्रों से व्रतों का आरोपण किया।


पंद्रहवां चरण : शांतिभक्ति पढ़कर हथेली की अंजलि में भरे द्रव्य को धर्म के माता-पिता को दिया।
सोलहवां चरण : दीक्षार्थियों के सिर पर लोंग से मंत्रों द्वारा सोलह संस्कार विधि की।

सत्रहवां चरण : गुरुर्वावलि पढ़कर पांचों दीक्षार्थी बहनों का नामकरण संस्कार किया गया।
अठारहवां चरण : आचार्यश्री ने दीक्षार्थियों को पिच्छी प्रदान की गई।


उन्नीसवां चरण : आचार्यश्री ने शास्त्र प्रदान किए।
बीसंवा चरण : आचायश्री कमण्डल प्रदान किए ।

इक्कीसवां चरण : आचार्यश्री सुन्दर सागर जी ने दीक्षार्थियों को माला प्रदान की।

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