धर्मसभा में भी मन एकचित्त नहीं तो कर्मबंध तयः आचार्य श्री सुन्दर सागर जी

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लक्ष्य पहले बनाइए, फिर आत्मा की चर्चा करिए

 

न्यूज सौजन्य -कुणाल जैन 

प्रतापगढ़। आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने भक्तजनों और श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा है कि भगवान महावीर का शासन निर्बाध चला आ रहा है। आज भी उस वीतराग वाणी को सुनकर लोग अपना जीवन धन्य कर रहे हैं। आचार्य कुन्दकुन्द स्वामी ने समयसार में कहा है कि आत्मा केवल ज्ञानस्वरूप है। हमारी सभी की आत्मा केवल ज्ञानी है। जब आपकी आत्मा का स्वभाव केवल ज्ञानी है तो आप कैवल्यज्ञान को प्राप्त कर सकते हैं। अगर आपका ध्यान धर्मसभा में भी एकचित्त नहीं है, तो आप कर्मबंध की ओर जा रहे हैं।
आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने आगे कहा है कि आप परमात्मा की शक्ति लेकर बैठे हैं। आपकी आत्मा तो हर भव और हर जन्म में आपके साथ थी। आपके पास पहले भी कैवल्यज्ञान था। आज भी आत्मा ज्ञानस्वरूप ही है। उन्होंने कहा कि आचार्य कुन्दकुन्द स्वामी कहते हैं कि तेरी आत्मा कल भी परमात्मा था, आज भी परमात्मा स्वरूप है और कल भी रहेगी। जैन धर्म में उत्कृष्ट परिणाम लाना सस्ता नहीं है। जैन धर्म इतना सस्ता नहीं है। चौबीस घंटे में एक घंटे समयसार सुनना है और तेईस घंटे अपनी ही दुनिया में रहना है तो माया-मोह में पड़े रहोगे। आपका लक्ष्य क्या है, पहले यह तैयार करिए। फिर आत्मा की चर्चा करिए। जब आपका मन अच्छा है तो सब अच्छा लगेगा।

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