दीक्षा महोत्सव में किया पंचामृत अभिषेक, 9 को होगी भजन संध्या

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आचार्य सुंदर सागर महाराज ने कहा- आत्मकल्याण के लिए ली जाती है दीक्षा

बांसवाड़ा। शहर की मोहन कॉलोनी में चल रहे सात दिवसीय दीक्षा महोत्सव के तीसरे दिन भी विभिन्न धार्मिक क्रियाएं जारी रहीं।
आचार्य सुंदर सागर महाराज, आचार्य सुवीर सागर महाराज, आचार्य अनुभव सागर महाराज, अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज सहित 30 संतो के सानिध्य में दीक्षार्थी रीता दीदी, पूजा दीदी, सुरभि दीदी ,लक्ष्मी दीदी ,रश्मि दीदी ने पंचामृत अभिषेक किया और आचार्य विमल सागर ,आचार्य सन्मति सागर विधान करते हुए 72 अर्घ्य समर्पित किए।
पांचों दीक्षार्थी बहनों को हाथ में आहार करने का अभ्यास करवाते हुए आहार करवाया गया। दीक्षार्थी बहनों की आचार्य संघ की और से अक्षत, श्रीफ़ल, बादाम, फल, सुपारी आदि द्रव्यों से गोद भराई की गई। विधान के पुण्यार्जक उर्मिला देवी पवन कुमार वोरा थे।

अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज में बताया कि आचार्य श्री आदिसागर महाराज की 109 वीं जन्म जयंती के सुअवसर पर  5 बहनों की दीक्षा सम्पन्न होगी। 9 दिसम्बर को रात्रि में भजन सम्राट विक्की डी.पारिख,मुम्बई की भजन संध्या होगी।
इस अवसर पर आचार्य सुंदर सागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षा आत्मकल्याण के लिए ली जाती है। दीक्षा वही ले पाते हैं जो बड़भागी होते हैं।  विषय कषायों से रहित होकर जो आत्म हित के लिए साधना के मार्ग पर उतारता है वही मुमुक्षु  कहलाता है अर्थता मोक्ष की अभिलाषा जिसके मन में होती है वही मोक्ष प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने कहा कि तपस्वी सम्राट आचार्य सन्मति सागर महाराज  सम्पूर्ण जैन दिगम्बर जैन संत समुदाय में सर्वोत्कृष्ट तपस्वी थे। उन्होंने अपनी तप साधना के बल पर इस पंचम काल में भी  मुमुक्षुओं के लिए सम्यक तप की आराधना का मार्ग प्रशस्त किया है। आचार्य विमल सागर महाराज निमित्तज्ञान के धनी और वात्सल्यरत्नाकर के नाम से विश्व मे विख्यात थे और सम्पूर्ण विश्व के कल्याण की भावना से दिन-रात तप साधना में लगे रहते थे। ऐसे महान आचार्य का विधान कर दीक्षार्थी दीदीयां धन्य हो गई है।
आचार्य श्री ने कहा कि मोहन कॉलोनी बांसवाड़ा का पुण्य है कि दीक्षा के समय यहां विराजमान होंगे।   सम्यकदर्शन और वात्सलय अंग का इससे बडा उदाहरण नहीं हो सकत। दीक्षार्थी बहनें इस दृश्य को देखकर अपनी विशुद्धि की वृद्धिगत कर रही हैं।
इस अवसर पर मंदिर  अध्यक्ष पवन कुमार नश्नावत, उपाध्यक्ष पवन कुमार वोरा, महामंत्री मनोज जैन, कोषाध्यक्ष कांतिलाल रणियावत, सहमंत्री रमेशचंद्र रजावत, कार्यकारिणी सदस्य वोरा अशोक जैन, अजबलाल वोरा, रमणलाल न१नावत,सतीश वैध,अशोक वैध, डॉ दिनेश कुमार जैन,ऋषभ नश्नावत,महावीर नश्नावत,लोकेन्द्र नश्नावत,तेजपाल गनोडिया,सुनील न१नावत, विपीन वोरा, जयेश जैन, निरज जैन समाजजन आदि उपस्थित थे।

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