प्रकृति के निरंतर शोषण से हरियाली को अमावस्या ना लग जाए- आचार्य अनुभव सागर महाराज

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लोहारिया (बांसवाड़ा)। युवाचार्य श्री अनुभव सागर जी महाराज ने हरियाली अमावस्या के अवसर पर कहा कि लोग अत्यंत उत्साह के साथ हरियाली अमावस्या मना तो रहे हैं परंतु कहीं यह उत्साह मात्र पर्व मनाने तक ही तो सीमित नहीं रह गया है। इस पर विचार करना आवश्यक है। लोहारिया में चातुर्मास के दौरान मंगलवार को आचार्य ने कहा कि वर्तमान में हमारी हालत उस व्यक्ति की तरह है जो उसी डाली को काट रहा है, जिस पर वह बैठा है। पर्यावरण की अनदेखी बड़ी लापरवाही है। भौतिक विकास के लिए जलवायु,वनस्पति आदि प्राकृतिक संपदा का जमकर दुरुपयोग ही हमारी पराजय का कारण बन रहा है। आज हमारी हालत उस बिल्ली की तरह है जिसे लगता है कि उसे कोई नहीं देख रहा, जो उसकी मुर्खता रहती है। संसारी प्राणी भी यही भूल कर रहा है। हमारा बोया हुआ ही हमारे पास वापस आता है। प्रकृति के प्रति अगर हमारा समर्पण नहीं रहा तो वर्तमान में दिख रही हरियाली को अमावस्या लगते ज्यादा देर नहीं लगेगी। प्रकृति हमारे विकार और विषैले तत्वों को सोखकर हमें सकारात्मक ऊर्जा के साथ ऑक्सीजन भी देते हैं जो कि हमारे लिए जीवनदायिनी हैं। उन्होंने कहा कि मानव अपना विकास करें लेकिन प्रकृति की बलि चढ़ाकर बलवान नहीं बना जा सकता। चारों तरफ कंक्रीट के जंगल खड़े होते जा रहे हैं। दूसरी तरफ लोग प्लास्टिक- पॉलीथिन व अन्य कचरा फेंककर प्रकृति के साथ छल करते हैं, लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि यह छल प्रकृति के साथ नहीं बल्कि उनके स्वयं के साथ ही है।

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