गोनेर में तीन दिवसीय शिखर ध्वज दण्ड स्थापना समारोह सम्पन्न

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  • श्रीजी ने रथ में विराजमान हो किया नगर भ्रमण
  • 108 कलशों से हुआ श्रीजी का अभिषेक

 

जयपुर, 27 जून। श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के जीर्णोद्धार के उपलक्ष्य में गोनेर में आयोजित तीन दिवसीय शिखर ध्वज दण्ड स्थापना समारोह सोमवार को श्रीजी की भव्य रथयात्रा के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर आदिनाथ भगवान का 108 कलशों से अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। प्रथम कलशाभिषेक एवं शांतिधारा का पुण्य लालचंद गोधा सारसोप वालों ने प्राप्त किया।
मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र सेठी ने बताया कि सुबह आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी के सान्निध्य में मंदिर में विराजमान भगवान आदिनाथ की मूलनायक प्रतिमा का 108 कलशों से मंत्रोच्चार के साथ अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने श्रीजी का अभिषेक किया।
समिति के महावीर पाटनी ने बताया कि अभिषेक एवं नित्य पूजा के बाद श्रीजी को रथ में विराजमान कर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। घोड़़े, पालकी एवं बैण्ड-बाजे के साथ रथयात्रा मंदिर से रवाना होकर जगदीश चौके होते हुए कस्बे का भम्रण करती हुई वापस मंदिर पहुंचकर विसर्जित हुई। इस दौरान पूरा गोनेर कस्बा श्रीजी एवं गुरू मां के जयकारों तथा मंगल भजनों से गूंजता रहा।
रथयात्रा के बाद धर्मसभा का आयोजन किया गया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ने कहा कि सांसारिक एवं सांस्कारिक ज्ञान दोनों में बड़ा अंतर है। सांसारिक ज्ञान हमें मोह, लोभ, लालच और परिग्रह की ओर ले जाता है, जबकि सांस्कारिक ज्ञान हमें सही राह दिखाकर संयम, तप, त्याग, अपरिग्रह और मुक्ति के पथ की ओर अग्रसर करता है।
प्रबंध समिति के अरूण सेठी ने बताया कि दोपहर में दर्शनाचार्य पं. प्रद्युम्न शास्त्री के निर्देशन में मुनिसुव्रतनाथ विधान पूजन किया गया। शाम को आर्यिकाश्री ने गोनेर से सेक्टर-17, प्रतापनगर के लिए विहार किया। इस दौरान गोनेर एवं जयपुर शहर के निवासी विहार यात्रा में शामिल हुए।
बच्चों ने मोबाइल छोड़, थामी जिनवाणी
तीन दिवसीय समारोह में आर्यिक स्वस्तिभूषण माताजी के सान्निध्य में न केवल धार्मिक क्रियाएं सम्पन्न हुई, बल्कि आर्यिकाश्री ने समारोह में शामिल हुए बालकों में नैतिक मूल्यों के विकास के लिए उनका मार्गदर्शन किया। बच्चों ने इस अवसर पर मोबाइल के न्यूनतम उपयोग का संकल्प लिया। उन्होंने मोबाइल छोड़ जिनवाणी हाथ में ली। आर्यिकाश्री ने बच्चों में संस्कारों और अध्यात्मक विकास की नींव भी रखी। उन्होंने श्रीजी के अभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए बच्चों का आह्वान किया तो सोमवार सुबह बड़ी संख्या में अभिभावकों के साथ बच्चे भी अभिषेक करने पहुंचे। कई बच्चों ने अपने जीवन में प्रथम बार अभिषेक किया। इस अवसर पर आर्यिकाश्री ने बच्चों से कहा कि वे देव, शास्त्र एवं गुरू के प्रति अपार श्रद्धाभाव रखें, इससे न केवल सांसारिक जीवन में उन्हें यश और प्रगति मिलेगी, बल्कि उनका आध्यात्मिक विकास भी होगा।

न्यूज सौजन्य- अरुण सेठी,जयपुर

 

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