अपनी जन्मभूमि से जुड़े रहने और आभार मानने के लिए गांववासियों के लिए कर रहे काम

गांव के प्रति ऐसा जुड़ाव महामस्तकाभिषेक में अपने गांव छानी के 90 लोगों को उनके कलश के साथ लेकर गए राजेश शाह

प्रिया व्यास की रिपोर्ट 

अहमदाबाद । कहते है पंछी भोजन की तलाश खत्म कर कही से भी अपने घर ही लौटते है, और वह घर उन्हें पूरे मन से स्वीकार कर उनका स्वागत करता है। ऐसे ही राजस्थान के छानी गांव में 31 अगस्त 1957 में जन्मे राजेश शाह है जो अपने देश मुश्किल दौर का सामना करके तो लौटे पर अपनी रूट्स से जुड़े रहे और अपने साथ 150 लोगों को साथ लेकर आए। राजेश शाह बताते है मैं 1982 में  व्यवसाय के लिए कुवैत गया जहां पर मैंने दस साल व्यवसाय किया। 1990-91 में  खाड़ी संकट के दौरान वापस भारत लौट कर आना पड़ा। इस समय मैं अकेला भारत नहीं लौटा अपने साथ 150 अपने लोगों को साथ लेकर लौटा। जिन्हें मदद की ज़रुरत थी उनकी मदद भी की। इस मुश्किल दौर में अपना देश अपना गांव और अपने लोगों का महत्व जाना। तभी से तय कर लिया था कि अपने देश में रह कर ही अपनी जन्मभूमी गांव और समाज के लिए मैं तत्पर रहुंगा और सिर्फ इतना ही नहीं अपने गांववासियों को भी समाज से जोड़े रखने और उन्हें आगे लाने का काम करुंगा जिसकी कोशिश जारी है।

राजेश जी के बारे में – 

राजेश बताते है मेरे इस सेवा कार्य में मेरी पत्नि विमला शाह हर मोड़ पर मेरे साथ खड़ी है वहीं मेरा बड़ा बेटा भद्रेश मुंबई में बिल्डर है। दूसरा बेटा भावेश अमेरिका से लौटकर मुंबई में बड़े भाई के साथ व्यवसाय संभाल रहा है। दामाद राजेश जैन उदयपुर के ख्यात पीडियाट्रिशियन है तो बेटी एमबीए है। व्यवसाय और अपने द्वारा किए गए सेवा कार्यों पर बात करते हुए कहा कि मैंने कुवैत से लौटकर फर्नीचर का व्यवसाय शुरू किया। व्यवसाय को आगे बढ़ाने की कढ़ी में ही मैंने स्टील फर्नीचर का कारखाना शुरू किया। डुंगरपुर में व्यवसाय के साथ ही कई संस्थाओं से जुड़ कर सेवा कार्य में भी संलग्न रहा।  वहीं वुडन और स्टील फर्नीचर का व्यवसाय बैच कर मुंबई और उदयपुर में अपना दूसरा व्यवसाय शुरू किया। इस दौरान उदयपुर में संस्थाओं से जुड़ कर सेवा कार्य किए।

इसके साथ ही समाज में अच्छी पहचान बनाते हुए महासभा राष्ट्रीय संस्था में उपाध्यक्ष के रूप में काम कर रहे है। वहीं बाहुबली भगवान श्रवणबेलगोला मस्तकाभिषेक में राजस्थान से संयोजक के रुप में कार्य किया। साथ ही मस्ताभिषेक के दौरान अपने गांव के और आने परिचित  120  लोगों को उनके कलश के साथ लेकर गए और अभिषेक करवाया। वही हाल ही में मांगीतुंगी में हुए महामस्तकाभिषेक में गांव के 90 लोगों को लेकर गए और महामस्तकाभिषेक करवाया ।

जारी रखेंगे सेवा कार्य –
राजेश जी बताते है बच्चे बिज़नेस संभाल रहे है तो मैंने अपने आपको सेवाकार्य के लिए सेवतंत्र कर लिया है। कई संस्थाओं के साथ जुड़ कर मेरे सेवाकार्य जारी है हालही में रायगढ में पुराने मंदिर को तोड़ कर उसका जीर्णोध्दार में सहयोग कर रहें ।  इस प्रकार जीर्णोध्दार के कार्य जारी रहेंगे ।  वहीं महासभा के लिए अपने अपने दोस्त डॉ. विनीत जैन  से म्यूज़ियम के लिए जमीन उपलब्ध करवाई।


ऐसे ही महावीर में 24 साल बाद 27 नवंबर से 4 दिसंबर तक महामस्ताभिषेक किया जा रहा है। इसके लिए राजस्थान से मुझे संयोजक बनाया गया। सभी ने मिल कर महामस्ताभिषेक के लिए 2000 रुपए जनमंगल कलश रखा गया, जिससे हर व्यक्ति भाग ले सकें।

इस लोटरी सिस्टम के ज़रिए वे लोग जो 2 लाख रुपए खर्च नहीं कर सकते वे 2000 रुपए दे कर महाभिषेक कर सकेंगे।
आने वाले समय में सेवा कार्य की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए साधू आहार विहार के लिए कमिटी बना कर व्यवस्था पर विचार कर रहे है। इसके साथ ही संत भवन, छात्रावास और हॉस्पिटल बनाने जैसी योजना शामिल है जिससे लोगो को सुविधा मिल सकें।

कार्य और अचिवमेंट –

  •   वर्ष 1996-97 में रोटरी क्लब डूंगरपुर के अध्यक्ष रहे एवं ऐतिहासिक सामाजिक कार्यों को अंजाम दिया।
  •  डूंगरपुर में सुप्रकाश ज्योति –      मंच द्वारा इन्हें वागड़ रत्न और नगर परिषद द्वारा डूंगरपुर रत्न से नवाज़ा गया।
  •    1997-2001तक यह डूंगरपुर चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स के भी अध्यक्ष रहे जिसके अंतर्गत रिकॉर्ड नंबर ऑफ़ नए मेंबर्स बनाए एवं आस पास के सभी व्यापारियों को चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स से जोड़ा।
  • वर्ष 2007 में  बिल्डर्स असोसिएशन ऑफ़ उदयपुर के उपाध्यक्ष रहे एवं भारत विकास परिषद के अध्यक्ष के रूप में सराहनीय काम किए।
  • 2018 में बाहुबली मस्तकाभिषेक के दौरान राजस्थान प्रांत के मुख्य संयोजक रहे व कई लोगों की यात्रा एवं अभिषेक का संयोजन किया।

  • उदयपुर में बाहुबली मंच द्वारा इन्हें समाज रत्न से नवाज़ा गया।
  •  दो वर्षों से भारत वर्षीय दिगंबर तीर्थ संरक्षणी महासभा के राजस्थान प्रान्त के अध्यक्ष हैं ।
  •  वर्तमान में ये ध्यानेादय तीर्थ क्षेत्र उदयपुर के ट्रस्टी है एवं चतुर्मास कमेटी के अध्यक्ष रह चुके हैं।
  • हालही मैं मेवाड़ जैन समाज द्वारा इन्हें मेवाड़ जैन समाज गौरव अलंकरण से नवाजा गया है।
  • भारत वर्षीय दिगम्बर जैन महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष है।
  • श्रीफल फाउंडेशन के मुख्य ट्रस्टी के रूप में भी कार्यरत है।
  • साथ ही अपने गांव छानी में समवशरण बना रहे है।

नई पीढ़ी को संस्कृति, संस्कार और महापुरुषों से अवगत कराने के लिए सोशल मीडिया पर कर रहे प्लेटफार्म तैयार…

श्रीफल फाउण्डेशन द्वारा नई पीढ़ी को आचार संस्कार और अपनी संस्कृति से रूबरू करवाने के लिए प्लेटफार्म तैयार किया जा रहा है। जिसे जल्द ही
आचार्य,मुनि,आर्यिका माता से संस्कृति, संस्कार और आशीर्वाद लेकर समाज के कार्य करने वालों से विचार कर शुरू किया जाएगा।

उत्कृष्ट कार्यो के लिए हसमुख गांधी का मांगीतुंगी में सम्मान

मांगीतुंगी। दिगंबर जैन समाज की कई राष्ट्रीय संस्थाओं के नेतृत्वकर्ता इंदौर के वरिष्ठ समाजसेवी श्री हसमुख उर्मिला जैन गांधी का जैन तीर्थ मांगीतुंगी महाराष्ट्र में विशेष सम्मान किया गया। मांगीतुंगी में स्थापित विश्व की सबसे बड़ी तीर्थंकर ऋषभदेव की प्रतिमा के महामस्तकाभिषेक समारोह के दौरान श्री गांधी के द्वारा धर्म, समाज, संस्कृति के क्षेत्र में की जा रही सेवाओं और महामस्तकाभिषेक समारोह मैं दिए गए अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया गया। श्री गांधी को समारोह के द्वितीय चरण शुभारंभ के प्रथम दिन हस्तिनापुर के पीठाधीश स्वास्ति श्री रविंद्रकीर्ति स्वामीजी ने शॉल, श्रीफल एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मान किया। श्री गांधी समाज की कई राष्ट्रीय संस्थाओं के भी पदाधिकारी हैं और हमेशा समर्पित भाव से धार्मिक सामाजिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाते आएं हैं। सम्मान के अवसर पर इंदौर सहित देशभर से कई श्रद्धालु उपस्थित रहे। समाज जन ने श्री गांधी के सफलतम कार्य और सम्मान के लिए बधाई दी।साथ ही सम्मान के दिन श्री गांधी ने जीवन के 64 वर्ष पूरे किए। इसके साथ ही उनके स्नेहीजन ने उन्हें जन्मदिन की बधाई दी व स्वामीजी ने उनसे महामस्तकाभिषेक करवा कर विशेष आशीर्वाद प्रदान किया।

10 जुलाई तक होगा महामस्तकाभिषेक

श्री गांधी ने बताया कि भक्तों की भावनाओं को देखते हुए मस्तकाभिषेक कार्यक्रम 10 जुलाई 22 तक बढ़ा दिया गया है।

 

राजेन्द्र जैन महावीर,सनावद

300 किमी का पैदल विहार कर आर्यिका पूर्णमति माताजी ने किया शहर में मंगल प्रवेश समग्र जैन समाज ने की अगवानी

  • माताजी के स्वागत में सड़कों पर रांगोली भी सजाई गई जुलूस में यातायात बाधित न हो इसके लिए 150 से अधिक युवाओं ने यातायात व्यवस्था संभाली
  • आर्यिका पूर्णमति माताजी 8 आर्यिकाओं के साथ 120 दिन इंदौर में प्रवचनों की अमृत वर्षा करेंगी

इंदौर। आचार्य विद्यासागर महाराज की शिष्या आर्यिका पूर्णमति माताजी ने आठ आर्यिकाओं के साथ रविवार को सत्यसाईं विद्या विहार से शहर में मंगल प्रवेश किया। इस मौके पर दिगंबर समाज द्वारा भव्य जुलूस निकाला गया। महिलाओं ने भजनों की प्रस्तुति दी। जैन समाज बंधुओं ने माताजी का स्वागत किया। आर्यिका पूर्णमति माताजी 29 साल बाद इंदौर में चातुर्मास के लिए आई हैं। मंगल जुलूस में बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए।
दिंगबर जैन समाज व दयोदय चेरिटेबल फाउंडेशन ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने बताया मंगल जुलूस सत्यसाईं चौराहे से प्रारंभ होकर एलआईजी चौराहा, पलासिया चौराहा होते हुए कंचनबाग समवशरण जैन मंदिर पहुंचा। माताजी के स्वागत में सड़कों पर रंगोली भी सजाई गई। माताजी ने ससंघ विहार गंजबासौदा से शुरू किया था। करीब 300 किमी का पैदल विहार करते हुए सुबह वे इंदौर पहुंचीं। जुलूस में समाज की महिलाएं 108 कलश और पुरुष 108 धर्म ध्वज लिए नजर आए।

35 से अधिक महिला मंडल ने दी भजनों की प्रस्तुति

जुलूस में दिगंबर जैन समाज के अलग-अलग संगठनों से जुड़े 35 से अधिक महिला मंडल द्वारा भजनों की भी प्रस्तुतियां दी गई। जुलूस के अग्र भाग में जहां महिलाएं सिर पर कलश धारण कर शामिल हुईं, वहीं मध्य भाग में महिलाएं भजनों की भी प्रस्तुतियां दे रही थीं। महिलाएं धर्म ध्वजा हाथों में थामे गुरुवर की अगवानी में जय-जयकार लगाते हुए चल रही थीं। जुलूस में यातायात बाधित न हो इसके लिए 150 से अधिक युवाओं ने यातायात व्यवस्था संभाली।

हमारे मन की मैल साफ कर आत्मा को शुद्ध बनाता है चातुर्मास

कंचनबाग स्थित समवशरण जैन मंदिर में आर्यिका पूर्णमति माता ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए प्रवचन में कहा- चातुर्मास जैन शासन का अद्भुत पर्व है। इस दौरान प्रकृति अपने यौवन पर होती है। चारों ओर माहौल खुशनुमा और पवन शीतलता लिए होती है। चातुर्मास निर्मल गंगा के समान होता है, जो हमारे मन की मैल को साफ कर आत्मा को शुद्ध बनाता है। चातुर्मास सूर्य की रोशनी बनकर हमारे जीवन को प्रकाशित करता है।
उन्होंने कहा- जिस प्रकार एक सुंदर भवन की सफाई के लिए झाड़ू कारगर होती है, ठीक उसी प्रकार आत्मा पर चढ़े मैल की सफाई चातुर्मासिक झाड़ू करती है। यह झाड़ू हमारे जीवन का उद्धार करने का कार्य करती है। परमात्मा के निकट अपनी आत्मा को पहुंचाने के लिए कषायों, वासनाओं को हटाने के लिए एवं सद्गणों, संस्कारों को जानने के लिए चातुर्मास पर्व की आराधना की जाती है। जिस प्रकार हम किसी अल्पकालिक प्रवास के पूर्व तैयारी करते हैं तो यह चातुर्मास तो अनमोल पर्व है। इसकी तैयारी भी हमें विशिष्टता के साथ करना चाहिए। हमारी आत्मा को उज्ज्वल करने वाला चातुर्मासिक पर्व प्रदान करने के लिए परमात्मा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करना ही मुख्य होता है। आर्यिका पूर्णमति माताजी 8 आर्यिकाओं के साथ 120 दिन इंदौर में प्रवचनों की अमृत वर्षा करेंगी।

120 दिन बहेगी प्रवचनों की अमृत वर्षा
माताजी के लगभग 120 दिन लगातार इंदौर में अपने प्रवचनों की अमृत वर्षा करेंगी। प्रवचनों में श्री सकल दिगंबर जैन समाजजनों के साथ ही अन्य राज्यों व शहर के भक्त भी चातुर्मास में शामिल होकर धर्मसभा का लाभ लेंगे।

साभार- दैनिक भास्कर ,इंदौर

हर मनुष्य एक आत्मा है और हर आत्मा आनंद से भरपूर है, जरूरत समझने की

अपने 34वें चातुर्मास के लिए इंदौर पधारी आर्यिका पूर्णमति माताजी ने की शहर की तारीफ

इंदौर । आचार्य विद्यासागर महाराज की शिष्या आर्यिका पूर्णमति माताजी ससंघ का नगर आगमन हो चुका है। सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा रविवार सुबह 7 बजे सत्यसाईं चौराहे से उनकी अगवानी की जाएगी। शहर में यह उनका पहला चातुर्मास है। इसके पहले वे 34 स्थानों पर चातुर्मास कर चुकी हैं। गुरु की आज्ञा पर अब तक 45 हजार किमी का पैदल विहार कर चुकीं आर्यिका पूर्णमति माताजी का कहना है, हर मनुष्य एक आत्मा है और हर आत्मा आनंद से भरपूर है। जरूरत है तो सिर्फ लोगों को उस आनंद को समझने की। सत्संग इसका माध्यम होते हैं, जहां आकर लोगों को आनंद और आत्मज्ञान की अनुभूति होती है और वह जीवन को एक नई दृष्टि से देख पाते हैं। ‘पत्रिका’ से विशेष चर्चा में माताजी ने आध्यात्म और अपने जीवन से जुड़े कई रोचक किस्सों के बारे में विस्तार से बताया। माताजी से चर्चा के प्रमुख अंश…।

 

सवाल: इस चातुर्मास के दौरान दिए जाने वाले प्रवचन किस विषय पर केंद्रित होंगे?

जवाब: लोगों की भावनाओं को देखते हुए ही प्रवचन दिए जाते हैं। कोई बनाया हुआ विषय नहीं होता। जिस प्रकार भूख लगने पर भोजन की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार लोगों की मनोस्थिति को भांपते हुए प्रवचन दिए जाते हैं। यदि लोगों में आपसी प्रेम की कमी है तो कैसे आपसी सूत्र में पिरोकर आपस में प्रेम, वात्सल्य में वृद्धि करें, उस पर प्रवचन होते हैं। बाहर की प्रसिद्धि व आत्मसिद्धी के लिए जी सकें, इसके लिए कोशिश कर सकते हैं। मुझे विश्वास है, यहां के लोग बहुत अच्छे हैं और उन्हें प्रवचन से शांति मिलेगी।

सवाल: आपका प्रवास इंदौर में पहले भी हो चुका है, अब कैसा बदलाव दिख रहा है?

जवाब: 35 वर्ष पूर्व मैंने कंचनबाग के उदासीन आश्रम में चार वर्ष रहकर धर्मशिक्षा ली थी। तब के इंदौर और आज के इंदौर में बहुत अंतर आ चुका है। वैसे समय के साथ व्यवहार में भी बदलाव आ जाता है। शहर कोई भी हो, सभी को खुशी चाहिए। सभी आत्माओं के अंदर खुशी निहित होती है, लेकिन सत्संग में आकर उन्हें खुशी मिलती है। फर्क सिर्फ दुनिया को अलग नजरिये से देखने की है।

सवाल: आपके चातुर्मास में क्या विशेषता है, जो समाजजन इतने उत्सुक हैं?

जवाब: चातुर्मास में व्यवहार, आचारण, विचार और आत्म शुद्धि होती है। चातुर्मास के जरिए हमारी कोशिश होती है कि लोगों में आध्यात्म को लेकर रूचि बढ़े। व्यवहार में सामंजस्य हो। विचार अच्छे हों और सभी मनुष्य आत्माएं ही तो हैं। सभी आदर से जीयें, आपस में प्रेम और वात्सल्य की भावना हो, ये हमारी मंशा होती है।

सवाल: जैन समाज के संगठनों में आपसी मनमुटाव की स्थिति क्यों बनती है?

जवाब: मुझे ऐसा नहीं लगता कि मनमुटाव है। फिलहाल पूरा समाज एक माला की तरह दिखाई दे रहा है। मोती छोटे-बड़े हो सकते हैं, लेकिन भाव सभी का समान होता है। सभी लोग भावनाओं से भरे हुए हैं। सभी भगवान के भक्त हैं। मनमुटाव तो दो भाइयों में भी देखने को मिलता है। फिर भी सत्संग को लेकर सभी उत्सुक हैं।

सवाल: धर्म और वैराग्य के प्रति आपका झुकाव कब और कैसे हुआ?

जवाब: मेरा सौभाग्य था कि बचपन से ही मुझे आचार्य विद्यासागर, उनके गुरु आचार्य ज्ञानसागर और उनके भी गुरु शिवसागर महाराज का सान्निध्य मिला। जब में साढ़े 4 वर्ष की थी, तब आचार्य शिवसागर महाराज को एक भजन सुनाया था। उन्होंने तभी कह दिया था कि यह बालिका निश्चित दीक्षा लेगी। उसके बाद मैंने दीक्षा लेने के बाद गुरुओं का आशीर्वाद प्राप्त किया।

सवाल: युवा पीढ़ी को आध्यात्म से जोड़ने के लिए आपके क्या सूत्र वाक्य हैं?

जवाब: जिसने आध्यात्म को मान लिया है, वहीं आध्यात्मिक है। मैंने अभी तक जो देखा है कि नई पीढ़ी आध्यात्म की ओर बहुत जल्दी आकर्षित होती है। आध्यात्म सीधे दिमाग में प्रवेश करता है। आध्यात्म जीवन को देखने का तरीका बदल देता है। आध्यात्म से जीवन को जीने की राह मिलती है। अच्छा सोचो और आनंद से जीयो, यही आध्यात्म है।

साभार-पत्रिका इंदौर

 

रानी चेलना महिला मंडल की कार्यकारिणी का गठन

 

बांसवाड़ा । समाज के कार्य में अपना सहयोग देने व सांस्कृतिक कार्यक्रम में पूरी भागीदारी को बखूबी निभाने के लिए हर साल बांसवाड़ा की कमर्शियल कॉलोनी के रानी चेलना महिला मंडल का गठन किया जाता है। कार्यकारिणी की अध्यक्ष हीना जैन ने बताया की इस कड़ी को आगे बढ़ाते हुए 2 जुलाई को नई कार्यकारिणी का गठन किया गया।

कार्यकारिणी

कार्यकारिणी में मंडल के सरंक्षक तिलका गांधी,सरोज पंचोरी,दीपिका खोड़निया,सीमा शाह,अल्पा सारगिया,दीपिका सेठ रहे।

वहीं संयोजिका संध्या जैन,अध्यक्ष हीना जैन, उपाध्यक्ष डिम्पल शाह,सचिव प्रियंका (पिंकी) शाह, सह सचिव रीना शाह, सोनल जैन, कोषाध्यक्ष टीना मयंक जैन, सह कोषाध्यक्ष पायल गांधी, सांस्कृतिक मंत्री शिल्पा दोसी,ज्योति शाह, शिखा गांधी, ममता शाह, सीमा संदीप कोठारी,जानू सारगिया,हिमानी धिरावत, प्रवक्ता शीतल सेठ, विहार कमेटी तिलका गांधी, रेखा गांधी,दीपा कोठारी को चुना गया।

इस दौरान कॉमर्शियल कॉलोनी बांसवाड़ा अध्यक्ष राकेश जैन, पूर्व अध्यक्ष मांगीलाल कोठारी,लक्ष्मीलाल जैन समस्त कार्यकारिणी सदस्यों को बधाई दी।

महान संत के बारे में कुछ लिखना सहज नहीं, पर उनसे जुड़े व्रतांतों से उनके तप, त्याग और संयम की प्रतिमूर्ति होने का पता चलता है…

श्रीफल के लिए सुरेश सबलावत की कलम से

ऐसे ही आचार्य से जुड़े व्रतांत उनके 33 वें आचार्य पदारोहण दिवस पर साझा किए गए

तीर्थंकर भगवान महावीर की परंपरा के सच्चे निर्वाहक आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज का नाम जैन समुदाय में बड़ी श्रद्धा और गौरव के साथ लिया जाता है। भगवान महावीर के बताए मार्ग पर चलकर उन्होंने मुनि के रूप में मिले अपने नाम को सार्थक किया है।

आषाढ़ शुक्ल द्वितीया (24 जून 1990 )को पारसोला में मुनि वर्धमान सागर महाराज का आचार्य पदारोहण हुआ। 33 वाँ आचार्य पदारोहण दिवस कोटा के पास केशवरायपाठन में मनाया गया । राजस्थान के कहि हिस्सो से देशभर से हजारों श्रावक इस पुण्य अवसर का लाभ लेने पहुंचे थें । दिगंबर जैन परम्परा के ऐसे महान संत के बारे में कुछ भी लिखना सहज नहीं हो सकता, लेकिन उनसे जुड़े एक वृतांत को साझा करना चाहूंगा, जिससे पता चलता है कि आचार्य वर्धमान सागर जी तप, त्याग और संयम की प्रतिमूर्ति हैं।

आचार्य वर्धमान सागर महाराज को आचार्य पद देने में एक नहीं दो दो परंपरा के आचार्य की अनुमोदना रही। वे चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शांतिसागर महाराज की परंपरा के पंचम पट्टाधीश हैं।

दिगम्बर जैन समाज की 5-6 बड़ी संस्थाओं के आचार्य अजित सागर महाराज के आदेश का पालन करते हुए वर्धमान सागर महाराज ने आचार्य पद संस्कार की अनुमोदना की और पारसोला में 25 से 30 श्रावकों के बीच आचर्य पुष्पदन्त सागर महाराज ने आचार्य पद के संस्कार की अनुमोदना की ।

“म्हारे संघने तो वर्धमान सम्हाल सके”। सन 1986 के चातुर्मास के समय सीकर में यह बात चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शांतिसागर महाराज की परंपरा के तृतीय पट्टाधीश आचार्य धर्म सागर महाराज ने किशनगढ़ के गुलाबचंद गोधा को तब कही जब गोधा ने यह पूछा कि भविष्य में इतने बड़े संघ को कौन संभालेगा।

मुनि वर्धमान सागर कोई पद स्वीकार करना ही नहीं चाहते थे। आचार्य धर्मसागर महाराज की सामाधि के बाद संघ के साधुओं का 1987 का चातुर्मास किशनगढ़ में हुआ, वहाँ समाज द्वारा मुनि वर्धमान सागर जी को उपाध्याय पद देने को कहा गया, लेकिन मुनिश्री ने मना किया। उसके बाद चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य ने पत्र लिख उन्हें अपने पास बुला लिया। वर्ष 1990 में जब आचार्य अजित सागर महाराज का स्वास्थ्य खराब हुआ तब उन्होंने एक पत्र में अपना आचार्य पद मुनि वर्धमान सागर के लिए लिख दिया। जब यह बात संघ और समाज को पता चली तो विवाद के सुर उठे, तब मुनि वर्धमान सागर ने आचार्य अजित सागर महाराज को कहा कि मैं साधक ही ठीक हूं, मुझे साधना में आनंद आता है। मुनि की बात सुनकर आचार्य अजित सागर जी ने सहज और सरल भाव से कहा कि वर्धमान ! मैंने संघ, समाज और परम्परा के हित के लिए ही सोच समझकर निर्णय लिया है।

अजित सागर महाराज के पत्र में क्या लिखा था, वह बात उनकी समाधि की वियानजंलि सभा में ही पता चली, जब महासभा अध्यक्ष निर्मल सेठी ने वह पत्र मुनि वर्धमान सागर महाराज को दिया। मुनि ने वह पत्र मुनि पुण्य सागर महाराज को देने को कहा जब मुनि पुण्य सागर जी ने वह पत्र खोला तो आचार्य पद वर्धमान सागर महाराज को देने की बात पता चली।

आचार्य पद को लेकर निर्मल सेठी ने असम में विराजमान गणिनी आर्यिका सुपार्श्वमति माताजी से पूछा तो उन्होंने कहा कि मेरा ज्योतिष और मैंने तो अपना आचार्य वर्धमान सागर को मान लिया है।

अंततः मुनि वर्धमान सागर जी अपने आचार्य के आदेश का पालन कर आचार्य का पद ग्रहण किया और पूरे संघ को साथ लेकर अपने दायित्व का निर्वहन किया।

वर्धमान सागर जी के प्रति संघ और समाज में अपार श्रद्धा का भाव दर्शाता है कि जो विश्वास आचार्य अजित सागर जी और सुपार्श्वमती माता जी ने व्यक्त किया था, उस विश्वास को कायम रखने में मुनि वर्धमान सफल सिद्ध हुए।

जैन समाज में एकाएक महिला मेट्रो ट्रेन ऑपरेटर बन 5 साल पूरे किए कविता मंजय्या , (मेट्रो रेल की परिचालक) ने…

5 साल में अब तक 100000 से भी ज्यादा किलोमीटर ट्रेन चलाने का अद्वितीय रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी है श्रीमती कविता मंजय्या

कहते है कि सपनों के बिना हर व्यक्ति अधूरा है। सपने ही आगे बढ़कर लक्ष्य हासिल करने की हिम्मत देते है। ऐसे ही श्रीमति कविता मंजय्या ने परिवार के साथ अपने सपनों को साकार किया है। उनकी सफलता की कहानी उन्हीं से जाने…

कविता बताती है वे कर्नाटक के शिमोगा डिस्ट्रिक्ट सागर तालुका से है। परिवार कृषि परिवार से बिलॉन्ग करती है। पिताजी नील कुमार और माताजी सुमित्रा है। साथ ही बताया कि मैंने एसडीएम उजीरे कॉलेज से डिप्लोमा इन इलेक्ट्रॉनिक्स में किया है। इसके बाद गुरु परिवार के आशीर्वाद से मंजय्या से मेरा विवाह हुआ।मेरा एक बेटा भी है।

करियर –

जैन धर्म का अतिशय क्षेत्र श्रवणबेलगोला में स्थित बाहुबली तांत्रिक महाविद्यालय मेंमैंने अपना वृत्ति जीवन प्रारंभ किया इसी समय में बेंगलुरु के मेट्रो का सीईटी परीक्षा दी। जिसमें उन्नत श्रेणी में यश प्राप्त किया इसका परिणाम मेट्रो ट्रेन में एससी/टीओ (स्टेशन कंट्रोलर एंड ट्रेन ऑपरेटर) होकर दिसंबर 2016 में वृत्ति जीवन का नया सफर शुरू किया।

कविता बताती है मेरे यहां तक के सफर में मेरे पूरे परिवार का सहयोग मिला। उन्हीं के सहयोग से में अपने सपने को जी रही हूं। जॉब शिफ्ट में होने से घर और बेटे को समय देना मुश्किल हो रहा था। अपना काम अच्छे से कर सकूं और बेटे को पेरेंट्स में से किसी एक की देख रेख में रख सकें इसके लिए मेरे पति ने अपना जॉब तक छोड़ दिया। अक्सर कहते है सफल व्यक्ति के पीछे किसी का हाथ होता है जो राह मैंने चुनी उस पर आगे बढ़ना ही नहीं बल्कि मंजील तक पहुंचने के िलए मेरा हौसला भी बढ़ाया।

गौरव और सम्मान

साधकों को गौरव देना हमारे समाज का कर्तव्य है

1. “बेस्ट महिला ट्रेन ऑपरेटर” प्रशस्ति का भजन

अखिल कर्नाटक महिला संघ से अभिमान पूर्वक गौरव सम्मान मिला।

2. कर्नाटक जैन एसोसिएशन सहित और जैन समाज के संघ संस्थाओं ने काम को देख कर गौरव प्रदान किया।

गोनेर में तीन दिवसीय शिखर ध्वज दण्ड स्थापना समारोह सम्पन्न

  • श्रीजी ने रथ में विराजमान हो किया नगर भ्रमण
  • 108 कलशों से हुआ श्रीजी का अभिषेक

 

जयपुर, 27 जून। श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के जीर्णोद्धार के उपलक्ष्य में गोनेर में आयोजित तीन दिवसीय शिखर ध्वज दण्ड स्थापना समारोह सोमवार को श्रीजी की भव्य रथयात्रा के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर आदिनाथ भगवान का 108 कलशों से अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। प्रथम कलशाभिषेक एवं शांतिधारा का पुण्य लालचंद गोधा सारसोप वालों ने प्राप्त किया।
मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र सेठी ने बताया कि सुबह आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी के सान्निध्य में मंदिर में विराजमान भगवान आदिनाथ की मूलनायक प्रतिमा का 108 कलशों से मंत्रोच्चार के साथ अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने श्रीजी का अभिषेक किया।
समिति के महावीर पाटनी ने बताया कि अभिषेक एवं नित्य पूजा के बाद श्रीजी को रथ में विराजमान कर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। घोड़़े, पालकी एवं बैण्ड-बाजे के साथ रथयात्रा मंदिर से रवाना होकर जगदीश चौके होते हुए कस्बे का भम्रण करती हुई वापस मंदिर पहुंचकर विसर्जित हुई। इस दौरान पूरा गोनेर कस्बा श्रीजी एवं गुरू मां के जयकारों तथा मंगल भजनों से गूंजता रहा।
रथयात्रा के बाद धर्मसभा का आयोजन किया गया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ने कहा कि सांसारिक एवं सांस्कारिक ज्ञान दोनों में बड़ा अंतर है। सांसारिक ज्ञान हमें मोह, लोभ, लालच और परिग्रह की ओर ले जाता है, जबकि सांस्कारिक ज्ञान हमें सही राह दिखाकर संयम, तप, त्याग, अपरिग्रह और मुक्ति के पथ की ओर अग्रसर करता है।
प्रबंध समिति के अरूण सेठी ने बताया कि दोपहर में दर्शनाचार्य पं. प्रद्युम्न शास्त्री के निर्देशन में मुनिसुव्रतनाथ विधान पूजन किया गया। शाम को आर्यिकाश्री ने गोनेर से सेक्टर-17, प्रतापनगर के लिए विहार किया। इस दौरान गोनेर एवं जयपुर शहर के निवासी विहार यात्रा में शामिल हुए।
बच्चों ने मोबाइल छोड़, थामी जिनवाणी
तीन दिवसीय समारोह में आर्यिक स्वस्तिभूषण माताजी के सान्निध्य में न केवल धार्मिक क्रियाएं सम्पन्न हुई, बल्कि आर्यिकाश्री ने समारोह में शामिल हुए बालकों में नैतिक मूल्यों के विकास के लिए उनका मार्गदर्शन किया। बच्चों ने इस अवसर पर मोबाइल के न्यूनतम उपयोग का संकल्प लिया। उन्होंने मोबाइल छोड़ जिनवाणी हाथ में ली। आर्यिकाश्री ने बच्चों में संस्कारों और अध्यात्मक विकास की नींव भी रखी। उन्होंने श्रीजी के अभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए बच्चों का आह्वान किया तो सोमवार सुबह बड़ी संख्या में अभिभावकों के साथ बच्चे भी अभिषेक करने पहुंचे। कई बच्चों ने अपने जीवन में प्रथम बार अभिषेक किया। इस अवसर पर आर्यिकाश्री ने बच्चों से कहा कि वे देव, शास्त्र एवं गुरू के प्रति अपार श्रद्धाभाव रखें, इससे न केवल सांसारिक जीवन में उन्हें यश और प्रगति मिलेगी, बल्कि उनका आध्यात्मिक विकास भी होगा।

न्यूज सौजन्य- अरुण सेठी,जयपुर

 

एक ऐसी सेमिनार, जो बना सकती है आपके बच्चों का स्वर्णिम भविष्य

भोपाल। रविवार 26 जून को भोपाल के कोहेफिजा जैन मंदिर में प्रात:10 बजे सेमिनार शुरू होगा। इस सेमिनार में बच्चों को अच्छी गाइडेंस, बेरोजगारों को व्यापार ऋण के रूप में बड़ा लाभ दिला सकती है। सेमिनार में बताई जाने वाली योजनाएं सभी को एक साथ बड़े विस्तार के साथ बताई जाती हैं। इसके उपरांत प्रत्येक जिज्ञाषु के प्रत्येक प्रश्न का उत्तर ONE- TO- ONE दिया जाता है। सेमिनार में हर छोटी-छोटी बातों को समझाया जाता है।

अल्पसंख्यक योजनाओं के अलावा कई ऐसी जानकारियां जो विद्यार्थियों के भविष्य के लिए अत्यंत उपयोगी है। पिछले कई वर्षों से लगातार अनेक परिवार स्कॉलरशिप का अप्रत्याशित लाभ उठा रहे हैं। इससे न केवल उच्च स्तरीय कॉलेज में कम परसेंटेज होने पर भी बच्चे एडमिशन ले चुके बल्कि लाखों रुपये की स्कालरशिप का लाभ भी उठा रहे हैं, वो भी सम्पन्न वर्ग से। आप यह भ्रम छोड़ दें कि योजनाएं केवल गरीबों के लिए होती हैं ऐसा सोचने वाले अपने बच्चों और स्वयं के साथ अन्याय कर रहे हैं। प्रशासनिक सेवा कोचिंग, विदेश में शिक्षा योजना, सिंगल गर्ल चाइल्ड, पीएचडी, यूपीएससी, पीएससी, ज्यूडिशियल सहित बीसों योजनाएं है। विभिन्न रोजगार ऋण योजनाएं और अन्य ढेर सारी योजनाओं की जानकारी एक ही कार्यक्रम में। जो लोग सेमिनार अटेंड न कर जानकारी नहीं ले पाते उनको बाद में इधर-उधर जानकारी के लिए भटकते देखा जाता है।

हो सकता है कोई योजना अभी आपके काम की न हो लेकिन वहीं योजना आपके भाई बन्धु, मित्र, रिश्तेदार, समाज जन के लिए तो उपयोगी हो सकती है। आपके द्वारा अटेंड की गई इस मीटिंग से किसी का जीवन बदल सकता है। यदि आप किसी सेवाभावी संस्था से जुड़े हैं तब तो आपको निश्चित ही यह जानकारी लेना ही चाहिये।

मुख्य मार्गदर्शक एवम मोटिवेशनल स्पीकर-

अनिल जैन बड़कुल, राष्ट्रीय चेयरमैन

अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ, दिगम्बर जैन महासमिति

आयोजक एवम् निवेदक-

समस्त प्रबंधकारिणी समिति, दिगम्बर जैन मंदिर कोहेफिजा, भोपाल एवम् सकल जैन समाज भोपाल

गोनेर में 500 वर्ष प्राचीन जिनालय का हुआ जीर्णोद्धार अब 25 जून से तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान

गोनेर में तीन दिवसीय शिखर ध्वज दण्ड स्थापना समारोह

आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी का भव्य मंगल प्रवेष शनिवार को

जयपुर । श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के जीर्णोद्धार के उपलक्ष्य में गोनेेर में तीन दिवसीय शिखर ध्वज दण्ड स्थापना समारोह का आयोजन 25 से 27 जून तक किया जाएगा। आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी के ससंघ सान्निध्य में होने वाले इस समारोह में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र सेठी ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारम्भ 25 जून को प्रातः आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी के भव्य मंगल प्रवेश के साथ होगा। इसी दिन सुबह अभिषेक, शांतिधारा, झंडारोहण, आचार्य निमंत्रण, देवाज्ञा, जाप्यानुष्ठान आदि कार्यक्रम होंगे। इसके बाद आर्यिक स्वस्तिभूषण माताजी के मंगल प्रवचन होंगे। दोपहर 2 बजे से वृहद वास्तु विधान पूजन होगा। शाम को महाआरती, शास्त्र प्रवचन एवं ऋद्धि सिद्धि मंत्रों सहित भक्तामर अनुष्ठान होगा।
प्रबंध समिति के महावीर पाटनी ने बताया कि रविवार 26 जून को सुबह अभिषेक, शांतिधारा एवं यागमण्डल विधान तथा ध्वजशुद्धि विधान पूजन किया जाएगा। इसके बाद आर्यिकाश्री के प्रवचन, शिखर ध्वज दण्ड स्थापना के कार्यक्रम होंगे। दोपहर में मुनिसुव्रतनाथ विधान के बाद धर्मसभा एवं भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। शाम को महाआरती एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
पदम पाटनी ने बताया कि अंतिम दिन सुबह नित्य अभिषेक एवं पूजन के बाद श्रीजी की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। आर्यिकाश्री के प्रवचन के बाद समारोह का समापन होगा। समस्त विधान एवं पूजन आदि कार्यक्रम जैन दर्शनाचार्य पं. प्रद्युम्न कुमार शास्त्री एवं वास्तुविद् राजकुमार कोठ्यारी के मार्गदर्शन में सम्पन्न होंगे। समारोह में देश-प्रदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन होगा।

डिजिटल कांच डिस्पले वर्क के साथ हुआ मंदिर का जीर्णोद्धार
मंदिर प्रबंध समिति के सदस्य महावीर कुमार सेठी एवं संजय सेठी ने बताया कि गोनेर स्थित आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर का निर्माण करीब 500 वर्ष पूर्व चूने एवं पत्थर से हुआ था। इसके प्राचीन एवं हैरिटेज स्वरूप को यथावत रखते हुए इसका जीर्णोद्धार करवाया गया है। जिनालय में भगवान आदिनाथ की अतिशयकारी मूल नायक प्रतिमा विराजमान है। जीर्णोद्धार कार्य के तहत मंदिर में दीवारों पर कांच का अत्याधुनिक डिजिटल वर्क करवाया गया है, जिसमें विभिन्न देव स्थानों के साथ ही भक्तामर काव्य का कलात्मक चित्रण किया गया है। मंदिर परिसर में संतों एवं मुनियों के विश्राम एवं आहारषाला की समुचित व्यवस्था की गई है। अरुण सेठी एवं रामबाबू पाटनी ने बताया कि जैन अतिषय क्षेत्र बाड़ा पदमपुरा एवं आगरा रोड स्थित चूलगिरी जाने के लिए प्रायः गोनेर होकर ही संतों एवं श्रद्धालुओं का आवागमन होता है। ऐसे में विहार के दौरान संत एवं मुनि आदि गोनेर में अल्प विश्राम के लिए रूकते हैं।

रिपोर्टर- अरूण सेठी,जयपुर

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