नवागढ़ महोत्सव : हुए विविध आयोजन

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चित्रकला प्रतियोगिता में नवागढ़ वैभव के उकेरे चित्र
‘जीना है तो पापा शराब नहीं पीना’ बच्चों के नृत्य ने दिया शराब छोड़ने का संदेश
श्रद्धालुओं ने किया जिनाभिषेक एवं विधान
भक्ति नृत्य व नाट्य प्रस्तुति देख भाव विभोर हुए श्रद्धालु
अद्भुत, ऐतिहासिक धरोहर है नवागढ़ : मुनि श्री यागवेन्द्रसागर
ललितपुर, नवागढ़। महरौनी विकासखंड में स्थित दिगम्बर जैन प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र नवागढ़ में आचार्य आचार्य श्री प्रमुखसागर जी ससंघ , मुनि श्री यागवेन्द्रसागर के सान्निध्य में ब्र. जय निशांत भैया के निर्देशन में त्रिदिवसीय नवागढ़ महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को प्रातः मंगलाष्टक, अभिषेक, पूजन श्रद्धा भक्ति के साथ किया गया इसके बाद अरनाथ मंडल विधान किया गया। मंडल विधान में श्रद्धालुओं ने आस्था पूर्वक अर्घ्य समर्पित किए।

नवागढ़ तीर्थक्षेत्र कमेटी के प्रचारमंत्री डॉ. सुनील संचय ललितपुर ने बताया कि महोत्सव के दूसरे दिन कुमारी परी जैन ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। कुमारी अवनी, परी जैन ने भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत कर सभी को अपनी ओर आकर्षित किया। पूर्व माध्यमिक विद्यालय नवागढ़ की बच्चियों ने भ्रूण हत्या और बेटी बचाओ पर कविता प्रस्तुत की एवं शराब नशा त्याग पर ‘जीना है तो पापा शराब नहीं पीना’ पर भव्य नृत्य प्रस्तुति कर शराब त्यागने का संदेश दिया। इस भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए अतिथियों ने बच्चों को नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया ।

महोत्सव के दूसरे दिन दोपहर में 1 बजे से नवागढ़ वैभव पर चित्रकला पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें अनेक प्रतिभागियों ने भाग लेकर नवागढ़ स्थित पुरा वैभव पर चित्र उकेर कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। नवागढ़ में स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय के बच्चों ने भी इस प्रतियोगिता में उत्साह पूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता के निर्देशक ब्र. जय निशान्त जी एवं संयोजक डॉ. सुनील संचय ललितपुर, श्रीमती किरण जैन बड़ागांव, श्रीमती शशि जैन ककरवाहा रहे। उल्लेखनीय है कि नवागढ़ में खुदाई के दौरान अनेक अति प्राचीन ऐतिहासिक तथ्य व साक्ष्य निरंतर मिलते रहते हैं। इन पर लगातार खोज हो रही है। यहां पर जो भी खनन होता है, भले ही मकान की नींव खोदी जा रही हो, उसमें खुदाई के दौरान सावधानी बरती जाती है। क्योंकि, खुदाई के दौरान अक्सर प्रतिमाएं निकल आती हैं। फाइटोन पहाड़ी के निकट जैन पहाड़ी पर स्थित संघ साधना स्थल, गुफाओं में उकेरी गई आकृति और चरण चिह्न यहां जैन विरासत का साक्षात्कार कराते हैं। रॉक पेंटिंग, कपमार्ग, हैंगिंग रॉक, बैलेंस रॉक, मैटेलिक साउंड रॉक इसके विशेष पर्यटन स्थल होने का साक्ष्य हैं।
मुनि श्री यागवेन्द्रसागर ने अपने प्रवचन में कहा कि पुण्यशाली व्यक्तियों को ही तीर्थ स्थानों की यात्रा करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। नवागढ़ क्षेत्र पर अभूतपूर्व शांति का अनुभव होता है। मूलनायक अरनाथ भगवान की प्रतिमा अद्भुत अतिशयकारी है। दर्शन कर मन प्रफुल्लित हो जाता है।
संघस्थ ब्र. वीणा दीदी ने कहा कि जहाँ आकर मन का मैल धुल जाय, प्रेम भावना प्रस्फुटित हो जाय उसका नाम है मेला। जहाँ पर कर्मों का बंध न हो उसे वंदना कहते हैं।
ब्र. संतोष भैया ने कहा कि नवागढ़ सदियों पहले गढ़ा गया। नवागढ़ में गुरुकुल की योजना बनना मील का पत्थर साबित होगा।
द्रोणगिरि क्षेत्र के मंत्री भागचन्द्र पीली दुकान बड़ामलहरा ने अपने सम्बोधन में नवागढ़ को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक वैभव सम्पन्न धरोहर बताया।

इस अवसर पर भागचन्द्र पीली दुकान, मनोज बंगेला सागर, भजन सम्राट रूपेश जैन, क्षेत्र के अध्यक्ष सनत जैन एडवोकेट, वीरचंद नेकोरा, राजकुमार चूना,पंडित मनीष संजू, सेठ नरेंद्र मैनवार, अशोक मैनवार, सुरेन्द्र सोजना, इंजी. शिखर चंद्र जैन, धीरेन्द्र सिंघई बड़ागांव, पंडित रमेश घुवारा, , कैलाश जैन, आनंदी लाल जैन, राजीव चंद्रपुरा, राजकुमार सेठ , संतोष शास्त्री शाहगढ़, डॉ. भरत गुढ़ा, सुरेन्द्र सिंघई, राहुल ककरवाहा, सुनील शास्त्री, सुरेश टीकमगढ़, सनत कुटेरा, विमल पठा, मुन्ना लाल सागर आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। महोत्सव में संगीतकार पुष्पेंद्र एंड पार्टी ककरवाहा ने दिया।
इस अवसर पर गुढ़ा, महरौनी, मड़ावरा, ललितपुर, बड़ागांव, ककरवाहा, नेकौरा, सोजना, मैनवार, टीकमगढ़, खरगापुर, कारीटोरन, हीरापुर, दमोह आदि स्थानों से प्रमुख गणमान्य महानुभाव उपस्थित रहे।
आयोजन को सफल बनाने में नवागढ़ तीर्थक्षेत्र कमेटी, युवा जागृति संघ, महिला मंडल आदि का योगदान रहा। इस मौके पर बालिका मंडल ककरवाहा द्वारा सती मैना सुंदरी नाटिका प्रस्तुत की गई जिसे खूब सराहा गया।
मंगलवार को होगा 108 युगल इन्द्रों द्वारा अरनाथ विधान : महोत्सव के अंतिम दिन 108 युगल इन्द्रों द्वारा श्री अरनाथ महामण्डल विधान का आयोजन संगीत की मधुर स्वर लहरियों के बीच विधि विधान पूर्वक किया जाएगा।

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