जैन समाज तीर्थों की रक्षा के लिए आगे आएः मुनि श्री आदित्य सागर जी

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  • सम्मेद शिखरजी तीर्थ को पर्यटन क्षेत्र घोषित किए जाने का विरोध

न्यूज़ सैजन्य-राजेश जैन दद्दू 

इंदौर। केंद्र सरकार द्वारा जैन समाज के शाश्वत तीर्थ सम्मेद शिखर को पर्यटन क्षेत्र घोषित किए जाने के विरोध में मंगलवार को समोसरण मंदिर, कंचन बाग में मुनि श्री आदित्य सागरजी महाराज ने प्रवचन देते हुए समग्र जैन समाज से आह्वान किया कि वह शिखरजी तीर्थ को पर्यटन क्षेत्र घोषित किए जाने के विरोध में आगे आए और संगठित होकर अहिंसक आंदोलन चलाकर विरोध प्रदर्शित करे।
उन्होंने कहा कि जैन अहिंसक हैं, कायर नहीं, मौन हैं लेकिन पशुओं के समान मूक नहीं हैं। इसलिए समग्र जैन समाज का कर्तव्य है कि वह अपने तीर्थों की रक्षा के लिए आगे आए, संगठित बने, संगठित रहें। यदि हमने तीर्थों की रक्षा नहीं की तो हमारे धर्म की रक्षा भी नहीं हो पाएगी। शिखरजी हमारा प्राचीन एवं शाश्वत तीर्थ है, वहां का कण-कण पवित्र है। पर्यटन क्षेत्र घोषित होने से तीर्थ की पवित्रता नष्ट होगी और उस पुण्य भूमि पर मांस मदिरा का विक्रय एवं सेवन व अन्य दुराचरण की गतिविधियां प्रारंभ हो जाएंगी जिसे जैन समाज बर्दाश्त नहीं कर सकता।
सरकार अपने निर्णय पर पुनर्विचार करे और तीर्थराज शिखर जी को पर्यटन क्षेत्र घोषित किए जाने की अधिसूचना अविलंब वापस ले। आपने यह भी कहा कि जब जैन समाज किसी के अन्य तीर्थ पर अतिक्रमण नहीं करता तो हमारे जैन तीर्थों पर कब्जा करने का किसी को कोई अधिकार नहीं है।

मुनि श्री के प्रवचन के पूर्व मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त जस्टिस जे के जैन ने तीर्थराज शिखरजी को पर्यटन क्षेत्र घोषित किए जाने को जैन समाज की आस्था एवं तीर्थ की सुरक्षा पर प्रहार बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार का निर्णय अव्यवहारिक है एवं तीर्थ की पवित्रता, प्राचीनता को नष्ट करने वाला है। उन्होंने कहा कि निर्णय के विरोध में शीघ्र ही अहिंसक तरीके से आंदोलन किए जाने की रूपरेखा तैयार की जाएगी। धर्मसभा को मुनि श्री अप्रमित सागर जी ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर पंडित रतनलाल शास्त्री, आजाद जैन, हंसमुख गांधी, टी के वेद, डॉक्टर जैनेंद्र जैन, अशोक जैन सीए आदि समाज श्रेष्ठी उपस्थित थे।

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