महावीर शासन के चार सिद्धांत – बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा मत कहो और बुरा मत सोचो, अपने मन का चित्त सही जगह लगाएं – आचार्य श्री सुंदर सागर जी

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आचार्य श्री का आज का विचार:
जैन धर्म पाना सौभाग्य है । उससे जीवन में उतारना महासौभाग्य है ।

 

न्यूज सौजन्य- कुणाल जैन

प्रतापगढ़ । महावीर स्वामी के शासन चार सिद्धांत देते है बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा मत कहो और सब से महत्वपूर्ण बुरा मत सोचो। आप घर परिवार में है तो घर परिवार के बारे में सोचे, दुकान पर है तो दुकान के बारे में सोचें और मंदिर में है तो जिनेंद्र देव के बारे में सोचे। हमेशा अपने भावों को शुद्ध रखिए मंदिर में है तो घर परिवार, खानपान के बारे में मत सोचिए कही उसी समय आयु बंध हो गया तो मंदिर में रहते हुए भी उसी खानपान परिवार में रह जएंगे। यह बात प्रतापगढ़ (राज.) नया मंदिरजी में दिव्य तपस्वी आचार्य श्री सुंदर सागर जी गुरुदेव संसघ के सानिध्य में चल रहे सिद्धचक्र महामंडल विधान में धर्मसभा को अपनी अमृतवाणी में कही। आचार्य श्री ने अपने मन के चित्त को सही जगह लगाने की बात कहते हुए कहा कि आप स्तुति करते है तो ऐसे करें कि तेरी छत्रछाया भगवन मेरे सिर पर हो मेरा अंतिम मरण समाधि मेरे मन पर हो। मन अगर सही उपयोग में है तो पुण्य बंध कर सकते है वरना पुण्य कार्य करते हुए भी पाप बंध कर जाएंगे। सिद्धों की आराधना वाले इस सिद्धचक्र महामंडल विधान को करके अपने कर्मो की निर्जरा कीजिए। अपना मन इस विधान में जिनेंद्र देव की आराधना में लगाए इस से आपका कल्याण होगा।

साथ ही कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली है जो आपको जैन धर्म मिला क्योकि पूरे विश्व में किसी भी समुदाय में आपको भगवान महावीर के शासन जैसा शासन नहीं मिलेगा। यह एकमात्र ऐसा शासन है जो जीव मात्र में भी भगवान आत्मा मानता है। अहिंसा करुणा से भरे इस शासन में आपका जन्म हुआ है। इस शासन में गृहस्थ अवस्था की मां के अलावा भी आपको एक माँ जिनवाणी मां मिली है। गृहस्थ अवस्था की मां तो हर जन्म में बदल जाएगी पर मां जिनवाणी मां आपको जन्ममरण के इस दुख से पार लगा देगी। अतः आप सौभाग्यशाली है जो आपका जन्म ऐसे जैन कुल में हुआ है।

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