महाराणा प्रताप ने जीवन पर्यंत अहिंसा परमो धर्म के मूल सिद्धांत का पालन किया

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• महाराणा प्रताप की प्रतिमा अनावरण समारोह में बोले आचार्य सुंदर सागर

समाचार सौजन्य- चेतना जैन,जयपुर 

बांसवाड़ा । महाराणा प्रताप ने अपनी वीरता और शौर्य के बल पर पूरे राजपूताना पर शासन किया। उन्होंने जैन धर्म और क्षत्रिय समाज के संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि जैन धर्म के पहले तीर्थंकर भगवान आदिनाथ भी क्षत्रिय थे। उन्होंने अपने शासनकाल के दौरान क्षत्रिय धर्म निभाकर पहले शत्रुओं का नाश किया बाद में सब कुछ त्यागकर समाज को राह दिखाई। इसी तरह इस कुल में ही भगवान राम हुए और इसी कुल में उदयसिंह और महाराणा प्रताप ने जन्म लिया। सभी ने समाज को अपना योगदान दिया। वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप की अष्टधातु से निर्मित प्रतिमा के अनावरण के मौके पर आयोजित समारोह में दिगंबर जैन आचार्यश्री सुंदर सागर महाराज ने महाराणा प्रताप की वीरता का उल्लेख करते हुए उन्हें राजपूताना का गौरव बताया। उन्होंने कहा कि राणा प्रताप ने भी जैन धर्म के मूल सिद्धांत अहिंसा परमोधर्म का जीवन पर्यन्त पालन किया।
आचार्यश्री सुंदर सागर ने कहा कि उदयसिंह मुगलों के सामने समर्पण की तैयारी कर रहे थे पर पुत्र महाराणा प्रताप ने पिता का हौसला बढ़ाया और बाद में उन्होंने मुगलों का बहादुरी से मुकाबला किया। चित्तौडगढ़ को हारने के बाद भी महाराणा ने संघर्ष और सत्य का रास्ता नहीं छोड़ा। महाराणा प्रताप युद्ध में जब सारा धन हार और उनके सामने विपत्ति आई तो पूरे समाज ने उनका साथ दिया। एक जैन श्रावक भामाशाह ने सारा धन महाराणा प्रताप को दे दिया। भामाशाह ने परिवार की चिंता नहीं की। इसी तरह जैन समाज हमेशा क्षत्रियों के साथ रहा। यही वीरता का असर है क किताबों में मुगलों का उल्लेख चंद लाइन में सिमट जाता है पर महाराणा प्रताप का उल्लेख के लिए पूरी किताब कम रह जाती है। उनकी कहानी बताती है कि कोई व्यक्ति आपके घर में आकर महिलाओंं पर कुदृष्टि डालें तो क्या करेंगे। हम पराधीनता में रहना स्वीकार नहीं कर सकते। जब जब कोई बाहरी शक्ति हमारे सामने आएगी हमें कर्तव्य याद आता है। यह बात बताती है कि हम कायर नहीं है शूरवीर हैं। महाराणा प्रताप की मृत्यु पर उनके जीवनभर शत्रु रहे मुगल राजा अकबर ने भी उनके शौर्य की प्रशंसा की।
आचार्यश्री सुंदर सागर ने कहा कि हम व्यक्ति नहीं उसके गुणों को मानते हैं। परिवार, देश और साधु संतों की रक्षा करने वाले हैं। उन्होंने मीराबाई और पन्नाधाय का भी जिक्र किया। उन्होंने महान व्यक्तियों के जीवन चरित्र पढऩे को कहा। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह व रघुराज प्रतापसिंह विधायक (उ.प्र.)को आचार्यश्री ने आशीर्वाद देकर पुस्तकें भेंट की। इस मौके पर अंर्तमुखी मुनि पूज्य सागर महाराज भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में महेन्द्रजीत मालवीया कैबिनेट मंत्री,राजस्थान सरकार,करणी सेना के संस्थापक लोकेंद्रसिंह कालवी, सांसद कनकमल कटारा, जिला प्रमुख रेशम मालवीया, नगर सभापति जैनेंद्र त्रिवेदी सहित अनेक अतिथि उपस्थित थे ।

वागड़ क्षत्रिय महासभा (बांसवाड़ा) की ओर से आयोजित कार्यक्रम को सफल बनाने में सर्वसमाज ने भूमिका निभाई। क्षत्रिय महासभा के स्थानीय अध्यक्ष राजेंद्रसिंह चौहान के अलावा करणी सेना प्रदेशाध्यक्ष भंवरसिंह सलाड़िया ने कार्यक्रम को सफल बनाने में कमी नहीं छोड़ी। सर्व समाज की ओर से रियासत परिवार के जगमालसिंह ने सभी का आभार जताया

 

चेतना जैन,जयपुर

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