महिला शक्ति की सकारात्मक सोच का अनुपम उदाहरण देखिए जयपुर में

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श्रीफल न्यूज के लिए जयपुर से मनीष गोधा की रिपोर्ट

जयपुर। दुनिया भर में गुलाबी नगरी के नाम से विख्यात जयपुर यू तो कई कारणों से पहचाना जाता है, लेकिन जयपुर जैन समाज की महिला शक्ति ने यहां कुछ ऐसे उपक्रम शुरू किए है, जिनकी मिसाल बहुत कम देखने को मिलती है। यहां पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित और प्रबंधित एक संस्था जौहरी बाजार दिगम्बर जैन महिला समिति महिला विकास केन्द्र, शुद्ध भोजनालय, वृद्धाश्रम और चिकित्सालय व डायग्नोस्टिक सेटर जैसे उपक्रम संचालित कर रही है और इन उपक्रमों की सफलता ने यह साबित किया है कि महिला शक्ति की रचनात्मक सोच जब धरातल पर उतरती है तो समाज को बहुत कुछ ऐसा दे जाती है जिस पर पूरे समाज को गर्व होता है।

एक ने सोचा और हाथ जुटते चले गए

यह संगठन एक महिला की सोच का परिणाम है। इनका नाम है डॉ शीला जैन। विनोबा भावे जैसे युगपुरूष को मानने वाले सर्वोदयी चिंतक और होम्योपैथी के चिकित्सक स्वर्गीय डॉ सरदार मल गंगवाल की धर्मपत्नी डॉ शीला जैन स्वयं एक होम्पोपैथ हैं और जयपुर की शान माने जाने वाले जौहरी बाजार में ही नागौरियों के चौक में निवास करती हैं। होम्यापेथी चिकित्सक होने के नाते उनका सिर्फ जैन समाज ही नहीं बल्कि हर समाज की महिलाओं और लोगों से जुडाव रहा। जौहरी बाजार दिगम्बर जैन महिला समिति की स्थापना से पहले भी वे गरीब बच्चियों की पढाई, शादी और अन्य तरह की सहायता अपने स्तर पर करती रहती थी।


डॉ शीला जैन स्वयं एक लम्बे-चौडे परिवर की सदस्य हैं, लेकिन 1990 के बाद परिस्थतियां कुछ ऐसी बनी कि उन्होंनेे खुद को अपने परिवार तक सीमित रखने के बजाए, पूरे समाज को अपना परिवार बनाने का निर्णय कर लिया और बस यहीं से जौहरी बाजार दिगम्बर जैन महिला समिति के विचार ने जन्म लिया।

जयपुर का जौहरी बाजार जैन परिवारों का गढ है। यहां हर दूसरा-तीसरा मकान दिगम्बर जैन परिवार का मकान है। लगभग हर चौराहे पर दिगम्बर जैन मंदिर हैं। डॉ शीला जैन ने जौहरी बाजार के दिगम्बर जैन समाज की इस ताकत को पहचाना और जौहरी बाजार की ही कुछ अन्य महिलाओं जैसे पुष्पा सौगानी, विद्या कासलीवाल, तरूणा संघी, राज गोधा, विमला देवी छाबड़ा, इंद्रा चांडकीका आदि के साथ मिल कर सन 1993 में इस संगठन की नींव डाल दी।


कहते हैं जब उद्देश्य सच्चा हो तो लोग अपने आप जुटते चले जाते है। इन महिलाओं ने एक सच्चे और पवित्र उद्देश्य के साथ काम शुरू किया तो एक-एक करके अन्य महिलाएं भी जुटती चली गई और आज इस संगठन से करीब साढे सात सौ महिलाएं जुडी हुई हैं। अनूठी बात यह है कि संगठन सिर्फ जौहरी बाजार की दिगम्बर जैन महिलाओं का है और इसकी प्रमुख गतिविधियां भी यहीं तक सीमित हैं, इसके बावजूद इस संगठन को पूरे देश के दिगम्बर जैन समाज में जाना जाता है।

मंच, माला, माइक से दूर सच्ची सेवा को समर्पित

आमतौर पर जब इस तरह के संगठन बनते हैं तो वे धार्मिक गतिविधियों, मंच, माला, माइक और सम्मान समारोहों तक सीमित रह जाते हैं, लेकिन इस संगठन की सबसे बडी खूबी ही यही है कि इसने स्वयं को सिर्फ धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन कामों को प्राथमिकता दी, जिनकी समाज को वास्तव में जरूरत थी और शायद यही कारण रहा कि यह संगठन अपने उपक्रमों की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए जब भी समाज के पास गया तो उसने जितना मांगा उससे ज्यादा मिला और सिर्फ दिगम्बर जैन समाज ही नहीं, बल्कि अन्य समाज के लोगों और सरकार का सहयोग भी मिला। संस्था की ओर से संचालित चिकित्सालय और डायग्नोस्टिक सेंटर में तो बडा सहयोग प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता और तत्कालीन सांसद दारा सिंह ने अपने सांसद कोटे से किया। ासंगठन ने जो भी उपक्रम शुरू किए उनमें सरकार के मुख्यमंत्री, मंत्रियों और उच्च पदस्थ लोगों की मौजूदगी रही जो इस बात का प्रमाण है कि जो काम हो रहा है, वह प्रामाणिक और सर्व समाज के लिए उपयोगी साबित हो रहा है।

स्थापना के बाद सिर्फ 14 साल में चार बडे उपक्रमो की शुरूआत

यह इस संस्था से जुडी महिलाओं की मेहनत और जिजीविषा का ही परिणाम है कि स्थापना के बाद सिर्फ 14 वर्ष में इस संस्था ने चार बडे उपक्रमों की शुरूआत कर दी जो निरंतर सफलतापूर्वक चल रहे हैं।
स्थापना के तुरंत बाद इस बात की आवश्यकता महसूस की गई कि जयपुर में आने वाले समाज बंधुओं के लिए एक ऐसे भोजनालय की नितांत आवश्यकता है जहां उन्हें शुद्ध भोजन मिल सके। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जौहरी बाजार की सबसे प्राचीन और बडी धर्मशाला बंजी ठोलियों की धर्मशाला के नजदीक ही एक भवन में भोजनालय का निर्माण कराया गया और जैसे होता है कि साध्य की पवित्रता साधन अपने आप जुटा देती है, तो वही हुआ और 13 अप्रेल 1996 को भोजनालय का शिलान्यास हुआ तथा एक सिर्फ एक वर्ष की अवधि में यह बन कर तैयार हो गया और 9 मई 1997 को तत्कालीन उपमुख्यमंत्री हरिशंकर भाभडा ने इसका उद्घाटन कर दिया। आज पिछले 25 वर्ष से यह भोजनालय सफलतापूर्वक चल रहा है और समाज बंधुओं को बहुत कम दरों पर शु;द्ध भोजन उपलब्ध करवा रह है।


भोजनालय की स्थापना बाद समाज की जरूरतमंद, निर्धन महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोडने का विचार किया गया और एक महिला विकास केन्द्र की स्थापना की गई। 1998 में इसका शिलान्यास हुआ और सिर्फ दो वर्ष की अवधि में यह बन कर तैयार हो गया, जिसका उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने किया। आज यह केन्द्र समाज की कई महिलाओ को रोजगार दे रहा है। इस केन्द्र के जरिए महिलाओं से आटा, बेसन, मसाले, पापड, आचार आदि तैयार कराए जाते हैं और केन्द्र द्वारा संचालित एक दुकान से इनका विक्रय बिना किसी लाभ-हानि के किया जाता है। यही सामान जयपुर की विभिन्न कॉलोनियों में भी भेजा जाता है जहां माह में एक निश्चित दिन संस्था की महिला कार्यकताएं पहुंच कर इस सामान की बिक्री करती हैं।

इस केन्द्र की स्थापना के अगले वर्ष ही संस्था ने वृद्धाश्रम की स्थापना का काम हाथ मंे लिया और अप्रेल 2001 में इसकी स्थापना भी कर दी। तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ही इसका लोकार्पण भी किया। आज यहां 15 से 20 बुजुर्ग हमेशा रहते है, जिनका खाना-पीना और चिकित्सा सम्बन्धी जरूरतें निशुल्क पूरी की जाती हैं।


इसी के साथ संस्था ने एक चिकित्सा और डायग्नोस्टिक सेंटर की स्थापना का विचार भी बनाया और इस दिशा में काम शुरू किया तो समाज बंधुओ के साथ ही तत्कालीन सांसद दारा सिंह भी इस योजना से जुडे और अपने सांसद कोष से सहायता दी। वर्ष 2005 में इसका शिलान्यास हुआ और दो वर्ष में इसका निर्माण पूरा हो गया। वर्ष 2007 में तत्कालीन गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने इसका लोकार्पण किया और आज यह चिकित्सालय और डायग्नोस्टिक सेंटर सिर्फ जैन समाज ही नही बल्कि सर्व समाज के लिए उपयोगी साबित हो रहा है।
सिर्फ महिलाओं के सहयोग से किसी संस्था को संचालित करना आसान काम नहीं होता है, लेकिन डॉ शीला जैन और उनकी सहयोगी महिलाओं ने यह कर दिखाया और यह साबित कर दिया कि महिला शक्ति जब समाज के लिए कुछ रचनात्मक करने का ठान लेती है तो कोई बाधा उसे रोक नहीं सकती।

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