मैगी खाने वाले परिवारों से आहार नहीं लेंगे जैन साधु-संत

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नई दिल्ली। मैगी नूडल्स पर पहले भी देशभर में कई सवाल उठ चुके हैं। बहुचर्चित ब्रांड के सैंपल्स में मैगी में तय मात्रा से 17 गुना ज्यादा लेड यानी सीसा पाया गया था। पैकेट में जिक्र न होने के बावजूद मैगी के मसाले में मोनो सोडियम ग्लूटामेट पाए जाने की खबरें थीं। अब जैन समाज के साधु- संतों ने मैगी को मांसाहारी खाद्य पदार्थ घोषित कर उसका सेवन न करने का आह्वान किया है। इतना ही नहीं, जिस जैन परिवार में मैगी का सेवन होता हो, वहां से आहार न लेने का भी फैसला किया गया है।
जानकारी के अनुसार पूज्य आचार्य महाप्रयण जी ने जैन समाज के सदस्यों को निर्देशित किया है कि मैगी मांसाहारी खाद्य पदार्थ है। उसका सेवन न करें। उसका सेवन श्रावक-श्राविकाओं के लिए प्रतिबंधित है। आचार्यजी ने कहा कि अभिभावक यह सुनिश्चित करें कि बच्चे मैगी से दूर रहें और उसका सेवन न करें।
उन्होंने कहा कि जानकार कहते हैं कि खून में सीसे की अधिक मात्रा में जमा होने से बच्चों के दिमागी विकास पर स्थायी असर पड़ सकता है। मैगी में स्वास्थिय के लिए कई हानिकर तत्व मिलाए जाते हैं जो नुकसानदेह हैं।

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