मुनि पद्मकीर्ति महाराज का देवलोक गमन, बिस्तुनिया गांव में उमड़ा जनसमूह

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झालावाड़। बिस्तुनिया गांव से शुक्रवार की सुबह एक दुखद समाचार आया, कि मुनि श्री पद्मकीर्ति महाराज जी का देवलोक गमन हो गया हैं। आपको बता दें कि आचार्य वर्धमान सागरजी महाराज के शिष्य थे मुनि श्री पद्मकीर्ति जी महाराज। सुबह 9 बजकर 58 मिनट पर मुनि श्री पद्मकीर्ति जी महाराज का देवलोक गमन हुआ। मुनि श्री पद्मकीर्ति जी महाराज के समाधिमरण का समाचार जैसे ही गांव में फैला, जैन समाज के लोगों में शोक की लहर दौड़ पड़ी। उनकी चकडोल यात्रा के समय बड़ी संख्या में श्रावक, जैन समाज के लोगों सहित आस-पास के गांवों के गणमान्य व्यक्ति भी शामिल हुए। मुनि श्री पद्मकीर्ति जी महाराज को उनके सांसारिक पुत्र राकेश ने मुखाग्नि दी।

मुनि श्री पद्मकीर्ति जी महाराज अपने गुरू आचार्य वर्धमान सागर महाराज ने ससंघ कर्नाटक के कोथली से राजस्थान के श्रीमहावीर तीर्थ के लिए विहार कर रहे थे। विहार में ससंघ में 10 मुनि महाराज, 15 साधवी माताजी, 2 क्षुल्लक महाराज एवं श्रावक साथ चल रहे थे। विहार के दौरान मुनि श्री पद्मकीर्ति जी महाराज की तबीयत कुछ दिनों से खराब चल रही थी। गुरुवार को मुनि संघ ने विहार के दौरान ढाबला में रात्रि में विश्राम किया। सुबह जैसे ही ढाबला से विहार कर मुनि संघ बिस्तुनिया गांव पहुंचा, तभी मुनि श्री पद्मकीर्ति जी महाराज की तबीयत बिगड़ गई। जहां पर आचार्य वर्धमान सागरजी महाराज सहित अन्य महाराज श्री ने मुनि पद्यकीर्ति जी को नमोकार मंत्रोच्चार सुनाया और सम्यक समाधि दी। दोपहर 2 बजे उनकी अंतिम यात्रा प्रारंभ हुई, शाम पौने चार बजे बिस्तुनिया गांव में अंतिम संस्कार हुआ।

 

मुनि पद्मकीर्ति का जीवन परिचय :-

आपको बता दें कि श्री पद्मकीर्ति महाराज का मुनि जीवन 10 माह का रहा। मुनि श्री पद्मकीर्ति जी महाराज का सांसारिक नाम इंदरमल किकावत था। उनका जन्म राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के धरियावद के तहसील खुंता में श्रावण बुद्धि छठ विक्रम संवत् 2012 को हुआ। इंदरमल जी ने 8वीं तक ही शिक्षा प्राप्त की, इनके परिवार में पत्नि, एक बेटा, एक बेटी, 3 भाई और एक बहन हैं। सन् 2017 में आचार्य वर्धमान सागरजी महाराज ने 7वीं प्रतिमा (ब्रह्मचारी व्रत) ली। 13 अगस्त 2021 को कर्नाटक के कोथली में दीक्षा ली।

 

कई शहरों से श्रावक आए अंतिम दर्शन के लिए :-

मुनि श्री पद्मकीर्ति जी महाराज के समाधिमरण का समाचार मिलते ही पिड़ावा, भवानीमंडी, मिश्रौली, करावन, सुनेल, आवर, रूनीजा, पगारिया, धतुरिया, डग, बोलिया, कोटा, खानपुर सहित मध्यप्रदेश से भी जैन समाज के लोग अंतिम दर्शनों के बिस्तुनिया गांव पहुंचे।

समाधि के लिए ग्रामीणों ने दी भूमि :-

मुनि श्री पद्मकीर्ति जी की समाधि के लिए बिस्तुनिया के ग्रामीणों ने सहयोग किया। गांव के सरपंच मदनसिंह एवं ग्रामीणों को जैसे ही मुनि श्री के देवलोक गमन के बारें में ज्ञात हुआ, तो उन्होंने महाराज जी की समाधि स्थल के लिए नि:शुल्क भूमि उपलब्ध करवाई। इस दौरान अन्य कार्य में भी सहयोग।

फ़ोटो- राजेन्द्र गनोडिया

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