णमोकार मंत्र और भक्तामर स्त्रोत को आवाज देने वाली लता मंगेशकर नहीं रहीं

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मुंबई । लता मंगेशकर ने 30,000 से ज्यादा गाने गाए, लेकिन जैन समाजजनों के घर में गूंजने वाला णमोकार मंत्र और भक्तामर स्त्रोत को भी उन्होंने अपनी सुमधुर आवाज दी। उन्होंने कई भाषाओं में जैन भजन भी गाए। कई मुनियों और आचार्यों की प्रशस्ति में गीत गाए। मध्य प्रदेश के इंदौर में जन्मी लता मंगेशकर का रविवार सुबह मुंबई में निधन हो गया। वे 92 साल की थी। उनके निधन पर दुनिया भर में उनके प्रशंसकों ने शोक जताया।

बचपन से ही निभाई परिवार की जिम्मेदारी
लता मंगेशकर के पिता दीनानाथ मंगेशकर संगीतकार और शास्त्रीय गायक थे। परिवार में संगीत का माहौल होने के कारण लता ने बचपन से ही संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी थी। गीत गाने के साथ नाटकों में अभिनय भी किया था। 13 साल की आयु में लता ने 1942 में पहला गाना मराठी भाषा में गाया था, तब उन्हें एक गीत गाने के लिए 25 रुपए मिले थे। उसी साल उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर का निधन हो गया था। तीन बहनों और एक भाई से बड़ी होने की वजह से घर की सारी जिम्मेदारी लता पर आ गई, जिसके चलते लता पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। बाद में कुछ फिल्मों में अभिनय करके और गाने गाकर परिवार का गुजारा किया। उन्होंने मंगला गौर (1942), माझे बाल (1943), गजभाऊ (1944), बड़ी मां (1945) और जीवन यात्रा (1946) सहित कुछ फिल्मों में छोटी-मोटी भूमिकाएं निभाई।

36 भाषाओं में गीत गाए
लताजी ने 36 अलग-अलग भाषाओं में हजारों गाने गाए। चीन के युद्ध मे हारने के बाद बनी फिल्म में कवि प्रदीप का लिखा गया गीत ए मेरे वतन के लोगों देशभक्ति गीतों की पहचान ही बन गया।

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