नया दावा-अशोक स्तंभ नहीं, बल्कि ‘मनोज्ञ स्तंभ’

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श्रीफल न्यूज के लिए प्रकाश श्रीवास्तव की रिपोर्ट

जयपुर।  इतिहास में अब तक यही मान्यता रही है कि सम्राट अशाेक ने बिहार के वैशाली जिले में भगवान बुद्ध की स्मृति में सिंह वाले स्तम्भ का निर्माण कराया था। लेकिन, अब इसे लेकर एक नया दावा सामने आया है। उत्खनन में मिले पुरातात्विक अवशेषों पर शाेध कर रहे जैन दार्शनिकों ने दावा किया है कि यह अशोक स्तंभ भगवान बुद्ध नहीं, बल्कि भगवान महावीर की दीक्षा की स्मृति में बनाया गया ‘मनोज्ञ स्तंभ’ है।
वैसे तो बिहार का वैशाली जिला अपने आप में विशद इतिहास को समेटे हुए है। वैशाली से ही गणतांत्रिक शासन व्यवस्था की शुरुआत की गई थी। ऐसे में विश्व को सर्वप्रथम गणतंत्र का पाठ पढ़ाने वाला जिला वैशाली ही है। यह भूमि महावीर स्वामी की जन्मभूमि और भगवान बुद्ध की कर्मभूमि भी है। वैशाली के बासोकुंड गांव के पास कुंडलपुर में भगवान महावीर स्वामी का जन्म हुआ था। अब इस भूमि पर भगवान महावीर का भव्य मंदिर बना हुआ है। वैशाली बौद्धों के लिए भी पवित्र भूमि है क्योंकि यहीं पर बुद्ध ने अपने निर्वाण की घोषणा भी की थी।
इतिहासकार सच्चिदानंद चौधरी की किताब के हवाले से वैशाली इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च के डाॅ आरसी जैन और वैशाली के महावीर पुस्तक के संपादक राजेन्द्र जैन ने बताया है कि महावीर ने ज्ञातृ वन में 12 वर्ष तप के बाद राजा बकुल के भवन में प्रथम आहार किया था। इस भवन के अवशेष एक सिंह वाले स्तंभ के पास मिले हैं। दावा है कि अशाेक ने महावीर की स्मृति में यह स्तंभ बनवाया था।

स्तंभ पर एक ही सिंह बड़ा सबूत
जैन दार्शनिकों का तर्क है कि भगवान महावीर का प्रतीक चिह्न एक सिंह है और वैशाली के प्रसिद्ध अशोक स्तंभ में भी एक ही सिंह है। जबकि बुद्ध से जुड़े स्थलों पर प्रतीक चिह्नों में सिंह की संख्या चार है। महावीर के जन्मस्थल की मिट्टी काे अहिल्य माना जाता है। यानी ऐसी भूमि जहां हल नहीं चलाया जा सकता। इसलिए इसके आसपास के स्थान पर कभी हल नहीं चलाया गया। इन सब साक्ष्य के मद्देनजर उपरोक्त दावा किया गया है।

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