पुरुषार्थ से ही जीवन में बदलावः मुनि श्री विशल्य सागर जी

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न्यूज सौजन्य- राजकुमार अजमेरा

झुमरी तिलैया (कोडरमा)। झारखंड सरकार के राजकीय अतिथि सम्मान प्राप्त जैन संत गुरुदेव मुनि 108 श्री विशल्य सागर जी ने अपनी अमृतवाणी में कहा है कि पुरुषार्थ से ही जीवन में बदलाव आता है। जीवन में दूषित विचारों को त्याग करना चाहिए। यदि जीवन की इमारत को बनाना है तो क्रोध, मान, माया, लोभ को हटाना होगा। मनुष्य पर्याय में ही जीवन के महल को बनाया जा सकता है। हमें सोना नहीं है, जीवन को सोना बनाना है। समय का सदुपयोग जरूरी है। भगवान की मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता है। हमें अपने जीवन से खराब कर्मों को हटाना है। मनुष्य हमेशा दूसरे की संपत्ति को अपना मान बैठता है। इस विकृति से बचना होगा तभी मनुष्य मानसिक परेशानियों से बच सकता है और शांति का अनुभव कर सकता है।
स्थानीय जैन मंदिर, पानी टंकी रोड में चातुर्मास स्थापना का राजा श्रेयांश कलश लेने का सौभाग्य रतन लाल, सुरेश कुमार, विनोद कुमार, संदीप पहाड़िया परिवार को मिला। आचार्य विराग सागर जी के चित्र अनावरण का सौभाग्य एवं गुरुदेव विशल्यसागर जी के चरण धोने एवं शास्त्र भेंट करने का भी सौभाग्य पहाड़िया परिवार को मिला। कार्यक्रम के संयोजक सुरेंद्र काला, मंत्री ललित सेठी, उप मंत्री नरेंद्र झाझंरी ने सभी अतिथियों को माला, दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया।
जैन समाज के मीडिया प्रभारी नवीन जैन राजकुमार अजमेरा ने बताया कि इस मौके पर जैन समाज के उपाध्यक्ष कमल सेठी, दिगंबर जैन विद्यालय के संयोजक सुनील छाबड़ा, मनीष सेठी, सुबोध गंगवाल, मनोज सेठी, महिला समाज की अध्यक्ष नीलम सेठी, मंत्री आशा गंगवाल, शकुंतला पहाड़िया, रश्मि पहाड़िया, शशि पहाड़िया, ज्योति पहाड़िया, किरण देवी, विधि, चारवि, ऋषभ पहाड़िया, सिद्धार्थ,अनिल,सुनील पहाड़िया, राजकुमार पहाड़िया आदि भक्तजन उपस्थित थे।

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