समय शुभ है तो इस समय शुभ कर्म करिए-आचार्य श्री सुन्दर सागर जी महाराज

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न्यूज़ सौजन्य- कुणाल जैन

प्रतापगढ़। आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने भक्तजनों और श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा है कि वीतराग शासन में वीतराग वाणी सुनने को मिल रही है तो यह मानना चाहिए कि पुण्य की चक्की चल रही है। रोज मंदिर जाते हो, क्योंकि -जाना है कैसे भी-, क्यों जाना है यह पता नहीं है। समय शुभ है तो इस समय शुभ कर्म करिए। उन्होंने उदाहरण दिया कि कुन्दकुन्द स्वामी को तो कोई प्रेरणा देने वाला नहीं था। न कोई कलम थी और न ही किताब। फिर भी उन्होंने हमसब के लिए जिनवाणी शास्त्र लिखे। उन्होंने अपना शुभउपयोग लगाया। फिर शास्त्र लिख डाले। आत्मा में रमे। आपमें भी कैवल्यज्ञान उत्पन्न करने की सामर्थ्य है। आपने अपना मूल्य नहीं समझा। जिनसे आपका कोई सम्बंध नहीं, जो आपके कोई नहीं, फिर भी आप उसे अपना कहते हैं। और जो आपकी निज आत्मा है, आपके साथ है, फिर भी आपने उससे सम्बंध नहीं बनाया। अपना नहीं कहा।
आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने आगे कहा कि आप इस भव में आत्मा को परमात्मा से मिला सकते हो। सबका भला करते हो। अपनी आत्मा का तो सोचो। उसकी भलाई का सोचो। भगवान यदि मंदिर में ही होते तो सारे मुनि मंदिर में ही रहते। आपने हमेशा पर को देखा है, पर स्वयं को नहीं देखा। आपको बोध नहीं कि मेरा भगवान है कौन।

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