संस्कृति और संस्कार शाला में दिखा उत्साह

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रिपोटिंग-सुनील जैन “संचय”,ललितपुर

ललितपुर। श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर ने धर्म और संस्कारों की शिक्षा में एक बार फिर सक्रियता दिखाई।
संस्था ने श्रमण संस्कृति गौरव रजत महोत्सव के अन्तर्गत संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के आशीर्वाद एवं निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागरजी महाराज की पावन प्रेरणा से ललितपुर में 26 मई से 5 जून तक दस दस दिवसीय श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविरों का आयोजन किया। शिविरों में भारी उत्साह से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और लाभ लिया।

संस्कारों का शंखनाद कर नैतिक और धार्मिक प्रेरणा

ललितपुर शहर के श्री आदिनाथ जैन मंदिर, शांतिनाथ जैन मंदिर नईबस्ती, नया मंदिर, बड़ा मंदिर, जैन मंदिर बाहुबली नगर, अटा जैन मंदिर, जैन मंदिर डोडाघाट,एम्बोरोसिया कॉलोनी व आदिनाथ जिनालय तथा मड़ावरा स्थित जैन मंदिर में ये दस दिवसीय शिविर संचालित हुए । जिसमें सांगानेर जयपुर से आए विद्वानों द्वारा बालबोध भाग, भक्तामर स्तोत्र, छहढाला, तत्त्वार्थसूत्र, इष्टोपदेश, द्रव्य संग्रह , आलाप पद्धति, पूजन प्रशिक्षण आदि की कक्षाएं संचालित की की गई।

5 जून को सामूहिक समापन समारोह

4 जून को सभी शिविर स्थानों पर पढ़ाए गए बिषय की परीक्षाएं आयोजित की गई। प्रत्येक शिविर स्थान पर आयोजित परीक्षा में प्रत्येक कक्षा में प्रथम, द्वितीय , तृतीय स्थान पाने वाले शिविरार्थियों के साथ शिविर में प्रशिक्षण प्रदान करने वाले विद्वानों, संयोजकों को 05 जून को श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान साँगानेर एवं दिगम्बर जैन पंचायत समिति के तत्वावधान में सामूहिक समापन समारोह में क्षेत्रपाल जैन मंदिर में पुरस्कृत एवं सम्मानित किया जाएगा। शिविर में भाग लेने वाले प्रत्येक शिविरार्थी को प्रमाण-पत्र दिया जाएगा। समापन समारोह में मुनि श्री अजित सागर जी महाराज ससंघ का सान्निध्य मिलने की भी प्रबल संभावना है। जैन पंचायत के अध्यक्ष अनिल अंचल व महामंत्री डॉ. अक्षय टडैया ने आयोजन में सम्मिलित होने की अपील की है।

शिविर प्रभारी आलोक मोदी, शिविर प्रभारी मुकेश शास्त्री, स्थानीय संयोजकगण डॉ. सुनील संचय, सचिन शास्त्री , दिलीप जैन शास्त्री, प्राचार्य विनीत शास्त्री, राजेश शास्त्री, सुनील शास्त्री, विकास शास्त्री आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

उत्तम जीवन शैली अपनाने का संकल्प

विद्वानों द्वारा शिविरार्थियों को जहाँ ग्रंथों का अध्ययन कराया जा रहा है वहीं बताया जा रहा है कि हम सभी उत्तम जीवन शैली अपनाने का संकल्प लें। प्रतिदिन मंदिर जाकर भगवान के दर्शन, अभिषेक, पूजा करें। टीवी देखते हुए भोजन न करें। फास्ट फूड खाने से बचें। अपने माता पिता की आज्ञा का पालन करते हुए देश व समाज के हित में कार्य करने के लिए संकल्पित हों। भारतीय संस्कृति के अनुरूप जीवन जिया जाय।

इतनी भीषण गर्मी में भी बड़ी संख्या में सभी शिविर स्थानों पर शिविरार्थिगण उत्साह से भाग ले रहे हैं। सभी मंदिरों के प्रबंधकगण इसमें अपना अहम योगदान प्रदान कर रहे हैं।

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