शाश्वत तीर्थ पारसनाथ पर्वत को पर्यटन क्षेत्र घोषित करने के विरोध में काला दिवस, पैदल मार्च

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  • पूरे क्षेत्र को अतिशीघ्र “जैन तीर्थस्थल” घोषित करने की मांग
  • जैन समाज की सहमति के ही वन्य जीव अभ्यारण्य का एक भाग घोषित कर दिया

 

न्यूज़ सौजन्य- सचिन जैन 

 

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा जैन समाज के शाश्वत तीर्थ पारसनाथ पर्वत को पर्यटन क्षेत्र घोषित किए जाने के विरोध में मंगलवार को विश्व जैन संगठन द्वारा काला दिवस मनाते हुए विशाल पैदल मार्च का आयोजन किया गया। प्रसिद्ध जैन लाल मंदिर, लाल किला से राजघाट तक पैदल मार्च किया गया। विशाल पैदल मार्च के संयोजक और विश्व जैन संगठन के अध्यक्ष संजय जैन ने बताया कि केंद्र व झारखंड सरकार को दिए निवेदनों पर कोई कार्रवाई न किए जाने के विरोध में काला दिवस और विशाल पैदल मार्च का आयोजन किया गया।
जैन संत पूज्य क्षुल्लक श्री योग भूषण जी महाराज, गुरु गणी श्री राजेंद्र विजय जी महाराज और भट्टारक सौरभ सैन जी ने अनादि काल से जैन तीर्थ की स्वतंत्र पहचान और प्राचीन प्राकृतिक स्वरूप को पूर्ववत बनाए रखने और झारखंड सरकार व वन मंत्रालय से शाश्वत जैनतीर्थ को वन्य जीव अभ्यारण्य व पर्यटन स्थल आदि की सूची से बाहर करने की मांग की।
लाल किले से राजघाट तक पैदल यात्रा तीन किमी लम्बी है। इस उमस भरी गर्मी, धूप में पैदल चलकर जैन समाज के सभी लोग श्री सम्मेद शिखर जी की रक्षा के लिए सुबह 10 बजे लाल किला पहुंचे। राजघाट तक मार्च के दौरान किसी ने ना ही कुछ खाया और न ही पानी पिया।
दिल्ली की प्रमुख जैन संस्थाओं के पदाधिकारियों श्री चक्रेश जैन, मदन लाल जैन, पवन गोधा, विकास जैन, नीरज जैन, पुनीत जैन, महासभा से सुमित जैन और दिल्ली व अन्य राज्यों से आये विभिन्न जैन संस्थाओं व अन्य गणमान्यों ने झारखंड और केंद्र सरकार से गजट रद्द कर पर्वत का वंदना मार्ग अतिक्रमण मुक्त, यात्री पंजीकरण, सामान जांच के लिए दो चेक पोस्ट, पर्वत पर सोलर लाईट और पर्वत व मधुबन की पवित्रता के लिए सम्पूर्ण क्षेत्र को मांस-मदिरा मुक्त पवित्र “जैन तीर्थस्थल” अतिशीघ्र घोषित करने की मांग की।
उत्तर प्रदेश से बड़ौत के सचिन जैन ने बताया कि सर्वोच्च जैन तीर्थ पारसनाथ पर्वत को बिना जैन समाज की सहमति के वन्य जीव अभ्यारण्य का एक भाग घोषित कर पर्यटन स्थल बनाकर तीर्थ की स्वतंत्र पहचान को नष्ट करना है।

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