शास्त्रि-परिषद का शिक्षण -प्रशिक्षण शिविर, अधिवेशन एवं पुरस्कार समर्पण समारोह अभूतपूर्व सफलता के साथ सम्पन्न

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समर्पण और संकल्प के साथ शास्त्रि-परिषद समाज को आगे बढ़ाए : आर्यिकारत्न स्वस्तिभूषण माता जी

शताधिक विद्वान हुए सम्मिलित

अनेक प्रस्ताव हुए पारित , पांडुलिपि का विशेष प्रशिक्षण

रिपोटिंग- डॉ. सुनील जैन संचय, ललितपुर

जयपुर।  118 वर्ष प्राचीन अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्रि- परिषद् (रजि.) का 22 मई से 26 मई 2022 तक शिक्षण- प्रशिक्षण शिविर एवं 27 मई को परिषद का खुला अधिवेशन, पुरस्कार समर्पण, उपाधि अलंकरण पिंक सिटी जयपुर में स्थित भट्टारक की नसिया में परम पूज्या, गणनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी के मंगल ससंघ सानिध्य में डॉ. श्रेयांस कुमार बड़ौत की अध्यक्षता,
महामंत्री ब्रह्मचारी जय कुमार निशांत टीकमगढ़ के संचालन एवं प्रतिष्ठाचार्य विनोद कुमार जैन रजवास
के संयोजन में अभूतपूर्व सफलतापूर्वक संपन्न हुआ । जिसमें देश के विभिन्न स्थानों से शताधिक विद्वान सम्मिलित हुए।
परिषद के प्रचारमंत्री डॉ. सुनील जैन संचय ललितपुर ने जानकारी देते हुए बताया कि 21 मई को गणमान्य अतिथियों , विद्वानों द्वारा जहां आयोजन की पत्रिका का विमोचन किया गया वहीं 22 मई को प्रातः बेला में विधिवत रूप से शिविर का उदघाटन किया गया।

वरिष्ठ विद्वानों ने दिया प्रशिक्षण , आर्यिकाश्री ने दिया मार्गदर्शन :
शिविर के दौरान माताजी के मंगल प्रवचन – प्रातः 8.30 बजे से, सायकांल 7.30 बजे से रात्रि 9.00 बजे तक – महिला- पुरुषों के लिए विशेष कक्षा-प्रवचन कला प्रशिक्षण एवं छहढाला के छठवें अध्याय पर उदबोधन आदि प्रतिदिन संपन्न हुआ। आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण जी माता जी ने अपने प्रवचनों के माध्यम से अपना मार्गदर्शन प्रदान किया।शिविर में विषय विशेषज्ञ वरिष्ठ विद्वानों द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें आगम और अध्यात्म पर डॉ. श्रेयांस जैन जी बड़ौत, जैन न्याय पर डॉ शीतलचंद्र जैन जी जयपुर, यंत्र, मंत्र , तंत्र पर प्रतिष्ठाचार्य ब्र. जयकुमार जी निशान्त टीकमगढ़, व्याकरण एवं व्याकरण संबंधी उच्चारण, शुद्धि आदि पर प्राचार्य अरुण जैन जी सांगानेर,
जैन मंदिर वास्तु -डॉ राजकुमार जी कोठारी, प्रवचनकला-पंडित विनोद जैन जी रजवांस, ध्यान -इंजी. नवीन जैन जी जयपुर, पांडुलिपि विज्ञान व वाचन-डॉ सोमबाबू जीशर्मा, छहढाला-डॉ. ब्र. अनिल जी जैन प्राचार्य सांगानेर द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया गया। पांडुलिपि प्रशिक्षण विद्वानों के आकर्षण का केंद्र भी रहा। प्रात 5:30 बजे से ध्यान प्रशिक्षण श्री नवीन जैन बिलटी वालों के द्वारा कराया गया।

पूरी दिनचर्या थी सुव्यवस्थित : आयोजन की पूरी दिनचर्या अनुशासित और सुव्यवस्थित रही दिनांक 22 मई 2022 प्रातः 6:00 बजे विधान, 7:30 बजे मंगलाचरण ध्वजारोहण, चित्र अनावरण,दीप प्रज्वलन के साथ उदघाटन हुआ इसके बाद नियमित कक्षाएं शुरू हो गईं। 26 मई 2022 तक प्रातः 5:30 बजे प्रशिक्षण ध्यान योग, 6:10 से दैनिक क्रियाएं स्नान आदि, 7:00 बजे अभिषेक पूजन , 7:30 बजे अल्पाहार , 8:00 बजे प्रशिक्षण अध्यात्म और सिद्धांत, 8:40 पर जैन न्याय, 9:20 पर आर्यिकाश्री द्वारा प्रवचन, दोपहर 2:00 बजे प्रशिक्षण मंत्रोचार एवं उसके नियम, 2:40 मंदिर वास्तु प्रकरण एवं पांडुलिपि प्रशिक्षण , 3:30 गुणस्थान चर्चा, 4:10 बजे यंत्र -मंत्र -तंत्र, 4:50 बजे आर्यकाश्री द्वारा प्रवचन , संध्या 7:30 बजे आरती, 8:00 बजे प्रशिक्षण प्रवचन कला का प्रशिक्षण हुआ। विद्वानों ने उत्साह व रुचि के साथ भाग लिया। भट्टारक की नसिया में जयपुर में आवास, भोजम आदि की सुंदर व समुचित व्यवस्था भट्टारक की नसिया की कमेटी द्वारा की गई । जिसकी विद्वानों ने खूब सराहना की।
कार्यकारिणी बैठक 26 को रात्री में सम्पन्न हुई ,जिसमें अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

खुला अधिवेशन :
27 मई 2022 प्रातः6:00 बजे अभिषेक -पूजन के बाद ,8:00 बजे से अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन शास्त्रि परिषद् का वार्षिक खुला अधिवेशन, पुरस्कार समर्पण, विद्वानों का सम्मान आदि का कार्यक्रम नसिया स्थित इंद्रलोक ऑडिटोरियम में समारोह पूर्वक किया गया जिसके मुख्य अतिथि डॉ. मणीन्द्र जैन दिल्ली रहे। इस दौरान कोषाध्यक्ष पं. सुखमाल जैन सहारनपुर ने परिषद का आय-व्यय प्रस्तुत किया। महामंत्री ब्र. जय कुमार निशान्त टीकमगढ़ ने पिछली कार्यवाही पढ़कर सुनाई गई जिसे उपस्थित सभी सदस्यों ने ध्वनिमत से पारित किया।

समर्पण और संकल्प के साथ शास्त्रि-परिषद समाज को आगे बढ़ाए : आर्यिकारत्न स्वस्तिभूषण माता जी

इस अवसर पर आर्यिकारत्न स्वस्तिभूषण माता जी ने कहा कि ज्ञान के बिना सब व्यर्थ है। ज्ञान की महिमा अतुलनीय है। जिनवाणी के प्रचार-प्रसार में विद्वानों की अहम भूमिका है। एक सूत्र में बंधकर समाज का उत्थान करें। विद्वानों को आज की तकनीक को ध्यान में रखते हुए समझना, बोलना सीखना चाहिए। शास्त्रि-परिषद अच्छा कार्य कर रही है। समर्पण और संकल्प के साथ शास्त्रि-परिषद समाज को आगे बढ़ाएं।
शास्त्रि – परिषद् देव-शास्त्र-गुरु के संरक्षण में निरंतर संलग्न : डॉ. श्रेयांस कुमार जैन
परिषद के अध्यक्ष डॉ. श्रेयांस कुमार जैन ने अध्यक्षीय उदबोधन में कहा कि शास्त्रि – परिषद् बहु आयामों के साथ देश, धर्म और समाज की सेवा करते हुए देव-शास्त्र-गुरु के संरक्षण में निरंतर संलग्न है।
संयुक्तमंत्री पंडित विनोद जैन रजवांस ने का परिचय दिया।

अनेक प्रस्ताव हुए पारित :
आयोजन में अनेक समाज-संस्कृति हितैषी प्रस्ताव पारित किए गए।
1. ग्रंथ प्रकाशन से पूर्व साहित्य विद विद्वानों से विधिवत संपादन कराया जाय ताकि अशुद्धियों से बचा जा सके।
2. आचार्य कुंद कुंद का अवर्णवाद किसी भी प्रकार से स्वीकार नहीं। कुन्दकुन्द स्वामी का अवर्णबाद करने वाले लोगों का शास्त्रिपरिषद पुरजोर विरोध करती है।
3. श्रमण परंपरा में बढ़ता शिथिलता चिन्तनीय है। परिषद ने शिथिलाचार रोकने के लिए एक नियमावली जारी की तथा अपील की कि विद्वान शिथिलाचार दूर करने में योगदान दें।
4. परिषद के शिक्षण-प्रशिक्षण शिविर अब आवश्यकतानुसार वर्ष में दो बार आयोजित होंगे। जिसमें आर्यिकारत्न स्वस्ति भूषण माता जी मार्गदर्शन प्राप्त होगा। इसके लिए एक उप समिति बनाई गई जिसका संयोजक पंडित प्रद्युम्न शास्त्री जयपुर को बनाया गया। समिति में अनेक विद्वानों के नाम शामिल हैं।
इस मौके पर मुख्य अतिथि डॉ. मणीन्द्र जैन दिल्ली ने कहा कि जैन पुरातत्व, इतिहास आदि के लिए बहुत कार्य करने की आवश्यकता है, इस दिशा में कुछ कार्य करने की योजना है। इसके लिए उन्होंने शास्त्रि-परिषद का साथ मांगा। उन्होंने अपने पिता जी की स्मृति में पंडित इंद्रमणि स्मृति पुरस्कार शास्त्रि परिषद के तत्वावधान में देने की घोषणा की ।


पुरस्कार अलंकरण : आयोजन में निम्नलिखित विद्वानों को परिषद द्वारा उनकी उल्लेखनीय सेवाओं के लिए विभिन्न वार्षिक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
1. पंडित प्रवर बाबूलाल जमादार स्मृति पुरस्कार-ब्र. नितिन भैया जी खुरई। 2. प्रतिष्ठाचार्य मन्नूलाल जैन स्मृति पुरस्कार- डॉ विमल जैन जयपुर, 3. श्रेष्ठी श्री जोरावल रजनदेवी जैन स्मृति पुरस्कार- श्री त्रिलोक जैन बड़ागांव, 4. हीराबाई जैन स्मृति पुरस्कार-पंडित शीतल चंद्र जैन ललितपुर, 5. आचार्य विशुद्ध सागर पुरस्कार-डॉ कमलेश जैन बसंत तिजारा, 6. पंडित प्रवर नरेंद्र प्रकाश प्राचार्य फिरोजाबाद स्मृति पुरस्कार- डॉ. अनिल जैन पत्रकार जयपुर, 7. डॉ कपुरचंद्र जैन खतौली स्मृति पुरस्कार- डॉ. आनंद कुमार जैन वाराणसी, 8. पंडित प्रसन्न कुमार पुरस्कार -पंडित वैभव जैन शास्त्री चौमू, 9. फूलचंद्र सेठी स्मृति पुरस्कार- वर्ष 2020 पंडित कृष्ण मोहन जैन धौलपुर, वर्ष 2021 श्री मनीष कुमार उदयपुर, वर्ष 2022 डॉ महावीर वर्द्धमान सोलापुर को प्रदान किया गया।

 

उपाधि अलंकरण : इस मौके पर प्रतिष्ठाचार्य एवं विधानाचार्य की उपाधियों से विधिवत रूप से निम्न विद्वानों को अलंकृत किया गया।

प्रतिष्ठाचार्य उपाधि :
ब्र. संजय जैन आहार जी एवं पंडित मुकेश जैन शास्त्री विन्रम गुड़गांव को प्रदान की गई।
विधानाचार्य उपाधि :
पंडित दीपक शास्त्री दिल्ली व पंडित संदीप शास्त्री मेहगांव को प्रदान की गई।
प्रत्येक पुरस्कृत विद्वान को 11 हजार रुपये की पुरस्कार राशि का चेक, प्रशस्ति पत्र, साहित्य, शाल, स्मृति चिन्ह, माला, तिलक आदि के द्वारा सम्मानित किया गया।

हुआ अनेक कृतियों का विमोचन :
आयोजन में अनेक महत्वपूर्ण कृतियों का विमोचन अतिथियों एवं विद्वानों द्वारा किया गया, जिन कृतियों का विमोचन हुआ वे इस प्रकार हैं :-
नवागढ़ विरासत- ब्र. जय कुमार निशान्त, परिषद की प्रमुख पत्रिका ‘बुलेटिन’ का प्रो. रतन चंद्र जैन भोपाल स्मृति विशेषांक, परिषद की शोध पत्रिका जैन सिद्धांत,प्रतिष्ठा पुष्प, षटखंडागम रचनास्थल अंकलेश्वर (गुजरात)- डॉ अनिल जैन पत्रकार जयपुर, पर्यावरण संरक्षण : एक अनुचिंतन-डॉ भरत जैन इंदौर, शांतिनाथ विधान अर्थ सहित, स्वस्ति भूषण कलेंडर आदि प्रमुख हैं।
आचार्य श्री ज्ञानसागर जी का आचार्य पदारोहण दिवस मनाया : आयोजन के दौरान सराकोद्धारक आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज का दसवां आचार्य पदारोहण दिवस श्रद्धा पूर्वक मनाया गया। ब्र. अनीता दीदी जी ने आचार्यश्री के विराट व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला तथा आचार्यश्री की स्मृति में प्रकाशित होने जा रहे स्मृति ग्रंथ के लिए श्रद्धांजलि लेख, संस्मरण आदि विद्वानों से भेजने का अनुरोध किया। ब्र. अनीता दीदी, ब्र. मंजुला दीदी, ब्र. मनीष भैया आदि त्यागीव्रतियों ने आचार्यश्री की पूजन संपन्न करायी।
बने संरक्षक :इस अवसर पर श्रेष्ठि श्री रमेशचंद्र ठोलिया एवं श्रेष्ठि श्री चेतन निमोड़िया ने शास्त्रि-परिषद को एक लाख ग्यारह की राशि की स्वीकृति प्रदान कर संरक्षक बनने की घोषणा की।
आयोजन में श्री सुधांसु कासलीवाल, श्री महेंद्र पाटनी, श्री राजकुमार सेठी, श्री विवेक जी काला, श्री पवन गोधा, श्री सुरेश जैन संघपति, श्री विजय जैन चांदी वाले, श्री कमलबाबू जैन, श्री रमेशचंद्र ठोलिया, श्री चेतन निमोड़िया आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
आयोजन में 106 विद्वानों की गरिमापूर्ण उपस्थिति ने चार चांद लगा दिए।

 

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