आचार्य श्रीवर्धमान सागर का विशाल शोभायात्रा के रूप में मुख्य मंदिर में मंगल प्रवेश

  • मंगल कलश स्थापना समारोह में जुटे श्रद्धालु
  • पूरे कस्बे को पताकाओं से सजाया
  • डीएम, एसपी ने लिया व्यवस्थाओं का जायजा

श्रीमहावीरजी। कस्बे के प्रसिद्ध दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्रीमहावीरजी में आचार्य 108 श्री वर्धमान सागर महाराज का सोमवार को ससंघ श्रीमहावीरजी में मंगल प्रवेश हुआ और चातुर्मास कलश की स्थापना की गई। आचार्य वर्धमान सागर कर्नाटक के कौथली गांव से पदविहार करते हुए 1500 किमी दूरी तय कर श्रीमहावीरजी पहुंचे हैं। आचार्य श्री के सान्निध्य में 24 नवम्बर से वृहद् स्तर पर पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं 27 नवम्बर से 21 वीं सदी का प्रथम महामस्तकाभिषेक महोत्सव विशाल स्तर पर होगा। राज्य सरकार की ओर से इन्हें राजकीय अतिथि का भी दर्जा दिया गया है।

आचार्य श्री का विशाल शोभायात्रा के रूप में बैण्डबाजों पर भजनों की धुन के साथ महावीरजी के मुख्य मंदिर में प्रवेश हुआ। शाम 4 बजे कटला प्रांगण में मंगल कलश स्थापना समारोह अयोजित हुआ। मंगल प्रवेश जुलूस में शामिल होने के लिए बसों एवं सैकड़ों वाहनों द्वारा जयपुर, दिल्ली व अन्य शहरों से श्रद्धालु महावीरजी पहुंचे थे। अध्यक्ष सुधांशु कासलीवाल, मानद मंत्री महेन्द्र कुमार पाटनी, कार्याध्यक्ष विवेक काला एवं संयोजक सुरेश सबलावत ने बताया कि आचार्य ने गंभीर नदी के उस पार शांतिवीर नगर से 12.15 बजे बैंडबाजों के साथ शोभायात्रा के साथ मुख्य मंदिर में प्रवेश किया। मंगल प्रवेश जुलूस की अगुवाई ग्वाला परिवार के महिला एवं पुरुष कर रहे थे। धर्मचक्र, ऐरावत हाथी और मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित विद्यालय के छात्र-छात्राएं ध्वज पताकाएं लेकर चल रहे थे। महिलाएं सिर पर मंगल कलश धारण किए थीं । दर्जनों घोड़ी व ऊंट शोभायात्रा के साथ थे। व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए जिला कलेक्टर अंकित कुमार, पुलिस अधीक्षक नारायण टोगस, एसडीएम अनूप सिंह, पुलिस उपाधीक्षक किशोरी लाल आदि भी मौजूद रहे।

मंदिर दर्शन के बाद म्यूजियम के पास बनाए गए विशाल पण्डाल (वर्धमान सभागार ) में धर्मसभा का आयोजन किया गया। आचार्य वर्धमान सागर ने अपने प्रवचनों में कहा कि भगवान महावीर ने अपनी आत्मा को परमात्मा बनाकर आमजन के मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त किया है। भगवान महावीर के अहिंसा के संदेश को जीवन में धारणा कर चौरासी योनियों के बाद मिले मानव जीवन को सार्थक बनाना चाहिए। चातुर्मास मंगल कलश को पंडित मुकेश जैन द्वारा मंत्रोच्चारण कर शुद्धिकरण कर चातुर्मास मंगल कलश स्थापित किया। जैन भामाशान आर .के .मार्बल किशनगढ़ के अशोक पाटनी एवं परिवारजन ने मंगल कलश स्थापना का पुण्यार्जन किया।

उल्लेखनीय है कि 24 वर्ष बाद श्रीमहावीरजी में आचार्य वर्धमान सागर का ससंघ आगमन हुआ है। वे यहां पर चातुर्मास वर्षायोग साधना करेंगे। पूरे कस्बे को पताकाओं सहित विभिन्न प्रकार से सजाया गया है।

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