सिद्धवरकूट में हो रही अनियमितताओं को लेकर जैन समाज ने किया पुरजोर विरोध

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न्यूज सौजन्य – सन्मति जैन

सनावद। नर्मदा नदी से कुछ ही दूरी पर स्थित चतुर्थ कालीन सिद्ध क्षेत्र सिद्धवरकूट में 2 चक्री, 10 कुमार सहित करोड़ो दिगंबर मुनिराज सिद्दत्व को प्राप्त हुए। यहां पर एक प्राचीन मंदिर और धर्मशाला स्थित है। लोकेन्द्र जैन ने बताया कि इस सिद्ध क्षेत्र पर 20 सालों से ट्रस्ट के चुनाव नहीं हुए और न ही क्षेत्र के विकास के लिए समाज की आमसभा बुलाई गई। पिछले 10 से 12 सालों से मात्र 8 ट्रस्टी क्षेत्र का संचालन कर रहे है। इन ट्रस्टियों द्वारा भी समाज के नवीन सदस्य नहीं बनाए जा रहे है जो की उनका मौलिक अधिकार है। साथ ही बताया कि अब तक के कार्यकाल में सदस्यों के समक्ष लेखा-जोखा प्रस्तुत करना भी उचित नहीं समझा और अग्रीम कार्ययोजना भी प्रस्तुत नहीं की गई।

वहीं दीपक कासलीवाल ने बताया कि जैन संत नंगे पांव पद विहार करते हैं। भीषण गर्मी में संत किसी उपयुक्त स्थान पर ग्रीष्मकालीन वाचना करते हैं,इस हेतु सिद्ध क्षेत्र सिद्धवरकूट में आचार्य विभव सागर अपने 27 साधुओं के साथ ग्रीष्मकालीन वाचना के लिए रुके थे। वहां उनके साथ क्षेत्र के ट्रस्टियों ने असंयमित भाषा का इस्तेमाल किया। इनके इस रवैये से साधु समाज आहत हुए और उन्हें भीषण गर्मी में क्षेत्र से मजबूरन विहार करना पड़ा।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर निमाड़,मालवा ही नहीं अपितु पूरे भारत वर्ष में निवासरत जैन समाज को झकझोर कर रख दिया। क्षेत्र में होने वाली अनियमितताओं से त्रस्त होकर सभी समाज जनों ने पुनासा जिला खंडवा जाकर अनुविभागीय अधिकारी चंदर सिंह सोलंकी को माननीय मुख्यमंत्री जी के नाम एक ज्ञापन सौंपा व जल्द जल्द से ट्रस्ट के खिलाफ उचित कार्यवाही करने का निवेदन किया।

इस मौके पर पंकज जटाले बैड़िया ने ज्ञापन का वाचन किया। इस अवसर पर जवाहरलाल जैन, देवेंद्र जैन, प्रवीण सेठी खंडवा ,दीपक

कासलीवाल, प्रकाश जैन,राजबहादुर इंदौर, डॉ. विनय जैन,सुशील जैन, अजय जैन धामनोद , लोकेंद्र जैन,सुधीर चौधरी, अक्षय जैन, सन्मति जैन ,अनुभव जैन, प्रदीप पंचोलिया सनावद, नरेंद्र जटाले, अजय शाह बैडिया और समाज जन उपस्थित रह।

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