स्वर्ण व चांदी के रथ में निकली श्रीजी की भव्य शोभायात्रा

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लाडनूं। स्थानीय श्री दिगंबर जैन सुखदेव आश्रम मंदिर में विगत 8 दिन से चले आ रहा सिद्धचक्र विधान महोत्सव, सानंद संपन्न हुआ। चांदी व स्वर्ण रथ में निकली श्रीजी शोभायात्रा में सुजानगढ़, नागौर, कुचामन, सीकर आदि जगह से हजारों की संख्या में लोग पहुंचकर शोभायात्रा में सम्मिलित हुए। इससे पूर्व गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने संबोधित करते हुए कहा कि चुनौतियों से घबराए नहीं, परेशानियों से डरे नहीं, जीवन के इस पल में हर परिस्थिति के लिए तैयार रहें क्योंकि समय का कुछ पता नहीं कब किस मोड़ पर ले जाकर खड़ा कर दे किन्तु जो व्यक्ति संघर्ष से घबराता नहीं है वह निश्चित ही अपने अंजाम को प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि सिद्धचक्र विधान के शुभारंभ में ऐसे लगता था कि यह बड़ा अनुष्ठान कैसे पूर्ण होगा, कैसे इसकी व्यवस्थाएं संयोजित हो पाएंगी किन्तु आज का दिन देखकर यह लगता है कि यह शांतिनाथ भगवान का ही प्रभाव है कि हमने जो सोचा था उससे कहीं अधिक अच्छी प्रकार से यह अनुष्ठान पूर्ण हो रहा है। उन्होंने महोत्सव समिति के सदस्य एवं सकल जैन समाज के पदाधिकारियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यहां के लोग एवं युवा मंडल ने बहुत ही गंभीरता और समर्पण के साथ इस कार्य को अंजाम दिया है। इस अनुष्ठान की सफलता का श्रेय सभी पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य, आयोजन समिति के सदस्य एवं युवा मंडल के कार्यकर्ताओं को जाता है। उन्होंने कहा जो गुरु भक्ति लाडनूं के श्रावकों में देखने को मिली है, वह अद्वितीय है।

इस अवसर पर राज कुमार, रतन माला पाटनी एवं धर्मचंद गोधा, शांतिधारा की परिवार में श्रीजी शांतिधारा की। जैन समाज के चांद कपूर सेठी ने बताया कि भगवान के सारथी बनने का सौभाग्य पवन कुमार, साकेत सेठी, अशोक कुमार, अनिरुद्ध कुमार-कोटा, जिवणमल जैनाग्रवाल-दिल्ली, पाद प्रक्षालन श्रीधर जय कुमार जैन, श्रीजी को चावल डुलाने की डाक बनवारी, मोनू जैनाग्रवाल ने प्राप्त की।

इस अवसर पर हजारों की संख्या में उपस्थित लोगों के साथ श्रीजी की भव्य शोभा यात्रा नगर के मुख्य मार्गों से  होती हुई सुखदेव आश्रम आदिनाथ जैन मंदिर पहुंची जहां श्रीजी का भव्य अभिषेक शरद जैन सुधांशु द्वारा किया गया। इस अभिषेक शोभा यात्रा के दौरान जगह-जगह पुष्प वृष्टि, आरती व स्वागत किया गया। भागचंद जैन अग्रवाल ने बताया कि समापन के अवसर पर देव-शास्त्र-गुरु आदि की पूजा की गई तथा यज्ञ की आहुतियां दी गई। सिद्धचक्र विधान का पूजन, पंडित स्वतंत्र जैन के मार्गदर्शन एवं विधि-विधान पूर्वक द्वारा संपन्न कराई गई। इस अवसर पर महोत्सव समिति की सदस्यों ने इस अनुष्ठान में तन-मन और धन से समर्पित भाव से लगे हुए सभी कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। यह जानकारी आयोजन समिति के संयोजक रॉबिन बड़जात्या ने दी।

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