विपत्ति में धैर्य और प्रभु भक्ति ही सहाराः मुनि श्री सुधासागर जी

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  • भक्ताम्मर स्त्रोत का पाठ असीम शक्ति का पुंज
  • क्षेत्रपाल मंदिर पर हुईं अभिषेक की मांगलिक क्रियाएं

ललितपुर। आध्यात्मिक संत निर्यापक मुनि श्री सुधासागर महाराज ने विपत्ति में धैर्य धारणकर अपने आराध्य देव प्रभु और शास्त्रों में वर्णित उपदेशों पर चलने की सीख दी है। उन्होंने कहा कि यदि आप पत्थर पर भी श्रद्धा रखते हैं तो उसमें भी देवता नजर आते हैं। उसीका पुण्य रहता है कि बडी बडी मुसीबतों का पहाड़ भी धूल के गुबार की तरह बिखर जाता है। उन्होंने भक्ताम्मर स्त्रोत के पाठ को असीम शक्ति का पुंज बताते हुए कहा, बस श्रद्धा की जरूरत है। उस पर श्रद्धा से अमल करो तो जिन्दगी में कितनी भी बड़ी मुसीबत आ जाए, वह तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती है।

मुनि श्री ने बेटी- बचाओ अभियान के तहत बेटियों को संरक्षित और सुरक्षित करने की सीख देते हुए कहा कि बेटियों को कोसना नहीं है। तुम्हारे पास जो भी है, वह अच्छा मानकर अपना लेना। आपके अच्छे दिन आ जाएंगे। कोसने को जिन्दगी का अभिशाप बताते हुए उन्होंने कहा कि अपनी शक्ति को पहचानो। जब आप दूसरे के बारे में अच्छा सोचेंगे तो वह भी तुम्हारा भला सोचेगा।
मंगलवार को प्रातःकाल क्षेत्रपाल मंदिर, मूलनायक वेदिका पर अभिषेक की मांगलिक क्रियाएं हुईं। इसके उपरान्त शान्तिधारा मुनि श्री के मुखारविन्द से हुई। पादप्रक्षालन एवं दीपप्रज्जवलन के उपरान्त मुनि श्री को श्रावकों ने शास्त्र भेंट किया। कार्यक्रम का संचालन महामंत्री डा. अक्षय टडैया ने किया। मुनि सुधासागर महाराज को पडगाहन प्रदीप सिंघई सीएससी परिवार, मुनि पूज्य सागर महाराज को पडगाहन सुमित जैन मिठयाए, ऐलक धैर्य सागर महाराज को पडगाहन हीरालाल जसबंत जैन बंट परिवार एवं क्षुल्लक गंभीर सागर महाराज को पडगाहन अभय जैन पारौल परिवार को मिला।

श्रमण संस्कृति के रक्षक स्नातक विद्वान
श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर जयपुर अन्तर्गत संचालित स्नातक परिषद के विद्वानों के दसलक्षण धर्म प्रवचन प्रशिक्षण ऑनलाइन के माध्यम से एक माह के कार्यक्रम का विमोचन मुनि सुधासागर महाराज के ससंघ सान्निध्य में जैन पंचायत के अध्यक्ष अनिल जैन अंचल के साथ स्थानीय विद्वान मुकेश शास्त्री, आलोक मोदी, डा. सुनील जैन संचय, डा. आलोक
शास्त्री रानू, राजेश शास्त्री, सचिन शास्त्री आनंद शास्त्री बार, विकास शास्त्री आदि ने संयुक्त रूप से किया। इस मौके पर मुनि श्री ने आशीर्वाद देते हुए कहा कि स्नातक विद्वान पर्यूषण पर्व पर समाज के बीच श्रमण संस्कृति की रक्षार्थ, जो कार्य कर रहे हैं, वह प्रशंसनीय है।

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