विश्व शांति के लिए की श्रीजी की शांतिधारा

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लाडनूं। सुखदेव आश्रम जैन मंदिर में चले आ रहे आठ दिवसीय सिद्धचक्र विधान महोत्सव के चौथे दिन दो जनवरी भी बड़े ही उल्लास एवं भक्ति भाव पूर्वक श्रीजी की आराधना की गई। इस अवसर पर जैन समाज महोत्सव समिति के मार्गदर्शक चांदकपूर सेठी ने बताया कि इस अनुष्ठान में स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल होकर धर्म लाभ ले रहे हैं।जैन समाज के लोगों ने सिद्ध भगवान को अर्घ्य समर्पित किए। गणिनी आर्यिका विभाश्री माता ने विश्वशांति की कामना करते हुए श्रीजी की शांतिधारा की। शांतिधारा जैन समाज के अध्यक्ष एवं महोत्सव के सौधर्मेंद्र सुरेश कासलीवाल, पोमराज  विशाल कुमार, अंकुश सेठी एवं मेड़ता से आए संजय कुमार, भरत कुमार जैन, बाबूलाल, भागचंद सेठी ने की।  गणिनी माता का पाद प्रक्षालन मानिकचंद पवन कुमार छाबड़ा, सुजानगढ़ वंशीधर अग्रवाल, जयपुर, जेठमल अशोक कुमार सेठी लाडनूं आदि ने किया।सुशील बड़जात्या ने बताया कि रात्रि में टीकमगढ़ की मोनू एंड पार्टी की ओर से हाय बुढापा एवं भारत बाहुबली शीर्षकों से नाटकों का मंचन किया गया। जिसके मुख्य पात्र शंभू जैनाग्रवाल, रुबल बड़जात्या संतोष गंगवाल,सुभाष सेठी, भागचंद सेठी, महेन्द्र गंगवाल दिनेश पाण्ड्या, नरेश बड़जात्या, विपुल जैन, रिया सेठी, मोनिका जैन सोगानी, ज्योति गोधा, पायल गोधा प्रिया पाटनी थे। रात्रि में भगवान की महाआरती करने का सौभाग्य सुरेश कुमार, शांतू-रिचा कासलीवाल को प्राप्त हुआ। जिनके निजनिवास से निकली शोभायात्रा बड़ा मंदिर, मुख्य मार्गों से होती हुई सुखदेव आश्रम पहुंची, जहां श्रीजी की भव्य महाआरती की गई। इस अवसर पर राजशाही अंदाज में इन्द्रों का जुलूस, बाघ्घी,  ढोल-नगाड़े, गाजे-बाजे के साथ निकाली गई। जैन समाज के लोगों ने स्वागत-सम्मान करते हुए जगह-जगह  सामूहिक व नृत्य प्रस्तुत किए तथा शोभा यात्रा का स्वागत किया गया। इससे पहले जैन समाज के मंत्री अनिल पहाड़िया ने आगंतुक अतिथियों का स्वागत किया।

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