जिनके वचन शुद्ध, उनके वचन सिद्ध -आचार्य अनुभव सागर

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लोहारिया (बांसवाड़ा)। आचार्य अनुभव सागर महाराज ने कहा कि जो अपने वचनों का प्रयोग दूसरों के हित के लिए करते हैं, मन की साधना करते हैं उन्हें किसी सिद्धि की आवश्यकता नहीं होती है। संतुलित प्रवृत्ति के चलते उनके वचन अपने आप सिद्ध हो जाते हैं। लोहारिया में प्रातकालीन स्वाध्याय के बाद अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वचनों के जादूगर को नहीं बल्कि वचनों के संतुलन से सिद्धहस्त मुख्य मार्ग के नेता को नमस्कार करना चाहिए, जिन्होंने हमारा पथ प्रदर्शन किया है। हमें अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का मार्गदर्शन किया, ऐसे श्रमण साधकों को नमस्कार करते हैं। उन्होंने कहा कि संसार के नेता तो कभी भी अपना दल बदल लेते हैं, स्वार्थ उनकी नियत को मिट्टी में मिला देता है। वे कितना भी साम-दाम-दंड- भेद कर लें परंतु एक समय के उपरांत उन्हें कुर्सी और पद छोडऩा ही पड़ता है! उन्होंने कहा कि हमारे मुख से निकला हुआ एक शब्द भी एक समय में उध्र्वगमन करता हुआ सीधा सिद्धालय तक यात्रा कर लेता है। जापानी वैज्ञानिक डॉक्टर मसारु इमोटो ने पानी पर किए अपने बहुचर्चित प्रयोग से सिद्ध किया कि हमारे शब्द पानी की आव्विक संरचना उसके परमाणुओं रूप रंग आदी को संस्कृत अथवा विकृत कर सकते हैं। हमारा कहा हुआ शब्द दूसरों को तो प्रभावित करता ही है उससे कहीं ज्यादा वह हमारे परिणामों को प्रभावित करता है। तभी तो वैराग्य में प्रभु की हित-मित-प्रिय वाणी संसार के दुखों से संतप्त प्राणियों के कष्टों को छण में हर लिया करती है।

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